अम्ब उपमंडल की पिंडी खड्ड का तटीयकरण एवं श्मशानघाट का निर्माण की मांग
देवभूमि न्यूज डेस्क
राजीव शर्मन्
ऊना
ऊना जिले के सबसे बड़े उपमंडल अम्ब में पिंडी खड्ड में फैंकी जा रही गंदगी और आबादी बहुल क्षेत्र का पुराना श्मशानघाट विकराल समस्याओं का रूप धारण करता जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण की गर्ज से इन दोनों समस्याओं का निराकरण लाजमी है।
पिंडी खड्ड का तटीयकरण और पिंडी खड्ड में उपलब्ध जमीन पर नये श्मशानघाट की मांग बहुत पुरानी है जिसे अब हर हालत में क्रियान्वित करवाने का उचित समय आ गया है।यह दोनों समस्याएं आम जनमानस के स्वास्थ्य से जुड़ी होकर लोगों से खिलवाड़ करती नजर आ रही है। जिला ऊना के अम्ब उपमंडल तहसील मुख्यालय की पौराणिक खड्ड जिसे वर्तमान में “पिंडी खड्ड” के नाम से जाना जाता है,का तटीयकरण समय की मांग है।

अम्ब-हमीरपुर रोड की तराई में यह खड्ड कूड़े के ढेरों और अवैध खनन का शिकार बनकर रह गई है। इसलिए आम जनता जनार्दन की राय में इस खड्ड का तटीयकरण हर सम्भव प्रासांगिकता लिए हुए है। यही नहीं इसी खड्ड के मुहाने पर उपलब्ध सरकारी जमीन पर नया श्मशानघाट बनवाने की भी लगातार पुरजोर मांग दोहराई जा रही है। अम्ब उपमंडल तहसील मुख्यालय का पुराना श्मशानघाट दो-तीन वार्डों की हजारों की आबादी बहुल क्षेत्र में स्थित है जो कि वर्तमान परिपेक्ष्य में पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से हर हालत में पिंडी खड्ड में नये श्मशानघाट की तब्दीली का पर्याय बनता जा रहा है। पुराने श्मशानघाट की जद में सव्जी मार्किट, बिजली घर और कालेज आवासीय कॉलोनी स्थित होने से भी इसका अन्यत्र स्थानांतरण अवश्यंभावी है।

ऐसे में प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि आगामी एक दशक में पुराने श्मशानघाट को कदाचित बदलना एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। इसको हर हालत में बदलना ही समस्या का सर्व सम्मत हल है।
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु पुराने श्मशानघाट को प्रस्तावित नये पिंडी खड्ड श्मशानघाट में परिवर्तित करना परिवर्तन की जोरदार मांग है।
अतः स्थानीय लोगों ने पिंडी खड्ड का तटीयकरण और पिंडी खड्ड में नये श्मशानघाट को तत्काल प्रभाव से निर्मित करवाने की जोरदार मांग दोहराई है।