गिरीपार के शिक्षित युवा क्यों हाटी के नाम पर वोट करें- प्रदीप सिंगटा

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गिरीपार के शिक्षित युवा क्यों हाटी के नाम पर वोट करें- प्रदीप सिंगटा

देवभूमि न्यूज डेस्क
शिलाई

1967 में जब जौनसार बाबर को जनजाति का दर्जा मिला तो गिरीपार क्षेत्र के राजनेताओं को क्यों लाभ लेना उचित नही लगा, जबकि आज केंद्र सरकार औरआर जी आई ने दोनों के मध्य समरूपता को आधार बना कर ही हाटी को जनजाति पंजीकृत किया है।

1979-80 में राष्ट्रीय जनजाति आयोग द्वारा हाटी समुदाय को जनजाति घोषित करने की अनुशंसा के वाबजूद भी क्यों और किसने इतने वर्ष संवैधानिक संस्था की अनुशंसा को लागू नही किया?
1993 में विधान सभा की याचिका समिति की अनुशंसा पर राज्य सरकारों ने सकारात्मक क़दम क्यों नही उठाये?

. केंद्र सरकार की बार बार मांग के अनुरूप राज्य सरकार ने विशेषज्ञता प्राप्त राज्य जनजातीय शोध संस्थान क्यों नही बनाया?
राज्य सरकार ने हर बार हि0 प्र0 विश्वविद्यालय के जनजातीय विभाग को एथोनोग्राफिक रिपोर्ट तैयार करने का उत्तरदायित्व देना क्या प्रयोजित कायर्क्रम को नही दर्शाता है, जिस पर RGI हर बार अपनी आपत्तियां जता चुका था।
रिपार्ट को तैयार करने में तीन वर्ष व्यतीत करना और फिर राजगढ़ क्षेत्र की 19 पंचायतों को हाटी समुदाय से बाहर रखना क्या हाटी आंदोलन को कमजोर करने की मुहिम नही थी?
वर्ष 2018 में राज्य अनुसूचित जनजाति शोध संस्थान स्थापित किया जाना और तघ्यपूर्ण रिपोर्ट केंद्र सरकार को प्रस्तुत करना वर्तमान राज्य सरकार की हाटी मुद्दे के प्रति गंभीरता और समर्पण दर्शाता है।

हिमाचल सरकार के श्री जय राम ठाकुर पहले मुख्यमंत्री है जिन्होंने दिल्ली में केन्द्र सरकार के समक्ष खुद्द हाटी शिष्ट मंडल का प्रतिनिधित्व और पैरवी की।
55 वर्षो की लंबित मांग के अनुरूप RGI ने हाटी को 2022 में जनजाति के रूप में पंजीकृत किया।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में हाटी जनजाति को अनुसूचित जनजाति के रूप में अधुसूचित करने के लिए लिया गया निर्णय प्रतिवद्धता को दर्शाता है।
अंतिम अधिसूचना एक निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के बाद भारत के महामहिम राष्टपति द्वारा हस्ताक्षरित होती है जो निर्धारित समय परअवश्य जारी होगी।

जनजाति का दर्जा एक लेकिन लाभ अनेक: शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, व्यवसाय प्रोन्नति से लेकर छात्रवृति, छात्रावास की सुविधा के अतिरिक्ति 40 से अधिक केंद्रीय मंत्रालय व अन्य संस्थाएं सैकड़ों योजनाएं अनुसूचित जनजाति के उत्थान के लिए चलाई जा रही हैं।
सोंचे, समझे और मत डालते हुए अपने विवेक और अन्तर्रात्मा की आवाज़ अवश्य सुनें।