जिला मंडी उपनाम छोटी काशी और जिला ऊना उपनाम छोटा हरिद्वार धार्मिक श्रद्धालुओं के महातीर्थ।- राजीव शर्मन
देवभूमि न्यूज डेस्क
मंडी/ऊना
हिमाचल प्रदेश के दो जिलों जिला मंडी और जिला ऊना शिव-शक्ति की अराधना करने वाले भक्तों के महातीर्थ माने जाते हैं।
जिला मंडी मुख्यालय में सदियों से व्यास नदी की पावन धारा बहती है तो जिला ऊना में पौराणिक स्वर्ग नदी सोमभद्रा- स्वां नदी चिरकाल से जनपद में रची बसी मानी जाती है।

जिला मंडी में शैव भक्तों की आस्था के शिवालय और आदि शक्ति जगदम्बा के भव्य मंदिर है। वहीं ऊना में पांडवकालीन शिवालयों और माता चिंतपूर्णी ,श्री छिन्न मस्तिकाधाम, पांडवकालीन कामाख्या देवी जी, भद्रकाली जी धार्मिक स्थल है।
वर्तमान में दोनों जिलों का धार्मिक- सांस्कृतिक, पर्यटन आदान-प्रदान सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करते आ रहे हैं।

पौराणिक श्री मांडव्य ऋषि नगर जनपद छोटी काशी जिला मंडी में पर्यावरण संरक्षण हेतु श्री मांडव्य ऋषि झील का निर्माण नितांत आवश्यक है। इसी तर्ज पर जिला ऊना में भी सोमभद्रा-स्वां नदी में भी सोमभद्रा झील निर्माण को साकार करने की प्रबल सम्भावनायें विद्यमान है। जिला ऊना के माता चिंतपूर्णी के लिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु टिम्बर ट्राली योजना को भी साकार करवाया जा सकता है।

हिमाचल प्रदेश में मंदिरों की छोटी काशी जिला मंडी शहर अत्यंत पौराणिक शिव-शक्ति आराधना का प्रतीक है। यहां पर रियासत कालीन राजाओं ने भी धार्मिक तपश्चर्या के चलते विभिन्न शक्ति स्थलों को साकार किया था।
नई श्री मांडव्य जनपद के निर्माण में राजा अजवर सेन ने सन् ईस्वी 1527 को स्वयंभू बावा भूतनाथ जी का भव्य मंदिर निर्माण करवाया था। कालांतर में राजा सिद्ध सेन ने भव्य सिद्ध गणपति की स्थापना की। इसी तरह राजा श्याम सेन जी ने श्यामा काली टारणा माता जी का भव्य मंदिर बनवाया था। यह सब शिव-शक्ति स्थल आज भी इस ऐतिहासिक नगरी जिला मंडी शहर मुख्यालय की धार्मिक सांस्कृतिक विरासत को चार चांद लगा रहे हैं।

श्री मांडव्य नगर छोटी काशी जिला मंडी की मंडयाली धाम और सेपू बड़ी का उल्लेख भारत के प्रधानमंत्री जी ने भी किया है।
शिव-शक्ति के मंदिरों की रमणीयता और व्यास नदी (विपाशा) की अमृत धारा का जिला मंडी मुख्यालय का प्राचीन शहर मांडव्य नगर छोटी काशी नामकरण से भी जाना जाता है।
इसमें रियासती काल से ही मंडयाली संस्कृति का अलौकिक प्रचार प्रसार और रहन सहन समूचे हिमाचल प्रदेश में एक अमिट छाप छोड़ता आया है।
पूर्वोत्तर में कुल्लू मनाली ,पश्चिमोत्तर जम्मू-कश्मीर, उत्तर पठानकोट कांगड़ा और दक्षिण में चंडीगढ़-अम्बाला को सड़क सुविधाओं का जाल फैलाया जा चुका है।
भारत के परम आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी ने गत दिनों मंडी जिला मुख्यालय में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा था कि मंडी आने पर श्री स्वयंम्भू बावा भूतनाथ जी, यहां की मंडयाली धाम और सेपू बड़ी,बदाणे़ के मीठे की याद आ ही जाती है। इससे मंडयाली की समृद्ध धार्मिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान की विरासत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

भारत के प्रधानमंत्री जी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने प्राचीन श्री मांडव्य नगर छोटी काशी जिला मंडी को एक सर्वांगीण विकास क्रांति की फेहरिस्त में सम्मिलित कर दिया है। इसके लिए दोनों का दिल की गहराइयों से हार्दिक साधुवाद किया जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं हो सकती।
शिव-शक्ति के महासंगम में वर्तमान शिवधाम ने तो मंडी को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से समृद्धशाली नई मांडव्य नगरी में तब्दील कर दिया है।
आम जनता जनार्दन की मंडी को चहुंमुखी सर्वांगीण विकासवादी गतिविधियों को भी नया जन्म दिया है। इसमें व्यास नदी में अत्यधिक पर्यटन झील श्री मांडव्य ऋषि झील का निर्माण भी किया जाना वांछित है।
अतः भविष्य में पर्यावरण संरक्षण हेतु अत्याधुनिक श्री मांडव्य ऋषि झील का निर्माण भी प्रासंगिक हैं।
आशा की जानी चाहिए कि इस झील निर्माण के साथ साथ जिला मंडी की प्राचीन मांडव्य जनपद संस्कृति के मांडव्य नगर को भी अवश्य ही साकार किया जायेगा।
श्री मांडव्य ऋषि झील से व्यास नदी विपाशा की सूखती धारा और पर्यावरण संरक्षण को एक नई दिशा दशा की पहचान मिलेगी। इससे शहर की सुन्दरता में भी निश्चित तौर पर इजाफा होगा। श्री मांडव्य ऋषि झील निर्माण से नौकायन, मत्स्य पालन और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इसी तरह चिरप्रतीक्षित रेहड़ धार-टारना धार टिम्बर ट्राली परियोजना को भी साकार किया जाना चाहिए। यही नहीं गंधेरू जंगल (गणधब्बा पर्वत) श्री सिद्ध गणपति शिखर से भी श्री कांगणी माता मोतीपुर धार जहां बहुआयामी धार्मिक सांस्कृतिक पर्यटन आदान-प्रदान का श्री शिवधाम कार्य पूर्ण प्रगति पथ पर अग्रसर है इसे भी टिम्बर ट्राली परियोजनाओं से जोड़ने पर अभूतपूर्व पर्यटन क्रांति का सूत्रपात होना स्वाभाविक सिद्ध होगा।
जिला ऊना में ब्राड गेज रेलवे लाईन विस्तार ने सर्वांगीण विकास क्रान्ति का सूत्रपात किया है। जिला ऊना की तर्ज पर जिला मंडी में भी ब्राड गेज रेलवे लाईन बिछाने की दरकार है।
वर्तमान में जिला ऊना को भी श्री छोटा हरिद्वार की संज्ञा से विभूषित किया गया है। जबकि जिला मंडी को छोटी काशी के नाम से भी सुप्रचारित माना जाता है। अतः दोनों जिलों में क्रमशः श्री मांडव्य झील एवं श्री सोमभद्रा झील को मंडी और ऊना में साकार करने की नितांत आवश्यकता है। इन झीलों के निर्माण से दोनों जिलों में धार्मिक सांस्कृतिक और पर्यटन विकास क्रान्ति का सूत्रपात निश्चित तौर पर होने वाला है।
एक समानता जिला मंडी और जिला ऊना की है कि वर्तमान में जिला मंडी में श्री मांडव्य गणेशोत्सव और जिला ऊना में अम्बिकानगर-अम्ब गणेशोत्सव का आयोजन लगातार किया जा रहा है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश सरकार को दोनों जिलों में धार्मिक सांस्कृतिक पर्यटन आदान-प्रदान की विरासत को सहेजने की बहुआयामी रचनात्मक एवं साकारात्मक पहल की शुरूआत करवानी चाहिए।