नवरात्री हवन, मंत्र विधि: नवरात्रि में घर पर कैसे करें हवन, जान लें सरल विधि, मुहूर्त और मंत्र

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✍️देवभूमि न्यूज 24.इन
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⭕(दुर्गा जी का हवन मंत्र):- हिंदू धर्म में हवन करने का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं हवन करने से पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त हो जाता है। नवरात्रि में भी कई लोग हवन-पूजन करते हैं।

वैसे तो इस पावन पर्व के आखिरी दो दिनों में हवन करना महत्वपूर्ण माना गया है लेकिन कई लोग हर दिन हवन करते हैं। कहते हैं हवन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और माता रानी की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। चलिए आपको बताते हैं नवरात्रि हवन मंत्र, सामग्री लिस्ट और संपूर्ण विधि।

📿नवरात्रि हवन साम्रगी
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एक सूखा नारियल, लाल रंग का कपड़ा या कलावा, मुलैठी की जड़, चंदन की लकड़ी, बेल, नीम, पीपल का तना और छाल, गूलर की छाल, आम की सूखी लकड़ियां, अश्वगंधा, ब्राह्मी, काला तिल, कर्पूर, चावल, गाय का घी, लौंग, शक्कर, रौली, मौली, अक्षत, पुष्प, इलायची, गुग्गल, जौ, हवन कुंड हवन सामग्री.

🪔नवरात्रि हवन विधि मंत्र सहित
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सबसे पहले मां दुर्गा की पूजा करें। पूजा के बाद पूजा स्थल पर ही हवन कुंड स्थापित करें। पृथ्वी माता का ध्यान करें। फिर अपनी हथेली को स्वच्छ करें और उसमें तीन बार जल हथेली में लेकर निम्नलिखित मन्त्रों का उच्चारण करते हुये आचमन करना है…

ॐ केशवाय नमः

ॐ नारायणाय नमः

ॐ माधवाय नमः

इसके बाद घी का दीपक प्रज्वलित करें एवं अग्निदेव का आवाहन करें। फिर अब अपने दायें हाथ में जल लेकर निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करना है..
मंत्र है- भूलोके धर्म स्थापनार्थम् सर्वेषाम् जनानाम् सुख शान्ति सिद्ध्यर्थम् दुर्गा होमकर्म यथाशक्ति करिष्ये

इस मंत्र को बोलते हुये जल को अपने सामने भूमि पर छोड़ दें। फिर हवन कुण्ड में कुछ सूखे नारियल के टुकड़े, लकड़ी और उपले डालें। फिर कपूर की सहायता से निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये अग्नि प्रज्वलित करें।

ॐ भूर्भुवस्सुवरोम्।

अब नीचे दिए गए मन्त्र का उच्चारण करते हुये अग्नि में आठ बार घी डालें।

ॐ भूर्भुवस्सुवः स्वाहा।

📿हवन में प्रारम्भिक आहुतियां इन मंत्रों के साथ दें…
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ॐ प्रजापतये स्वाहा, इदम् प्रजापतये न मम।

ॐ इन्द्राय स्वाहा, इदम् इन्द्रयै न मम।

ॐ अग्नये स्वाहा, इदं अग्नये न मम।

ॐ सोमाय स्वाहा, इदं सोमाय न मम।

ॐ भूर्भुवस्सुवः स्वाहा।

ॐ गं गणपतये नमः स्वाहा।

ॐ वं वरुणाय नमः स्वाहा।

निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये कल्पना करें कि भगवान गणेश हवन की दिव्य अग्नि में प्रवेश करके आपकी आहुतियां स्वीकार कर रहे हैं।

अत्र आगच्छ। आवाहिता भव।

इस मंत्र का उच्चारण करते हुये अग्नि में पिसा हुआ चन्दन अर्पित करें।

ॐ लं पृथिव्यात्मिकायै नमः

इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये हवन में फूल अर्पित करें।

ॐ हं आकाशात्मिकायै नमः

इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये एक धूपबत्ती जलाकर हवनकुण्ड के पास रखें।

ॐ यं वाय्वात्मिकायै नमः

इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये हवन कुण्ड को दीपक दिखायें।

ॐ रं अग्न्यात्मिकायै नमः

इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये फल का टुकड़ा, किशमिश और बनाया गया थोड़ा सा भोजन हवन में अर्पित करें।

ॐ वं जलात्मिकायै नमः

📿मुख्य देवी-देवता को आहुतियां
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इन तीन मन्त्रों में से किसी भी एक का उच्चारण करते हुये यज्ञ की अग्नि में घी अर्पित करें।

ॐ दुं दुर्गायै नमः स्वाहा।

ॐ श्रीं ह्रीं दुं दुर्गायै नमः स्वाहा।

ॐ दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै। ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रा सततं नमः॥ स्वाहा।

आप इस प्रक्रिया को अपनी इच्छानुसार जितनी बार चाहें कर सकते हैं। यदि आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं तो आप समस्त 700 श्लोकों का हवन किसी आचार्य की देखरेख में कर सकते हैं या फिर आप पंचम अध्याय के श्लोक संख्या 9 से श्लोक संख्या 80 के बीच देवताओं द्वारा देवी की स्तुति का भी हवन कर सकते हैं।

📿हवन में अन्तिम आहुतियां
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ॐ भूः अग्नये स्वाहा।

ॐ भुवः वायवे स्वाहा।

ॐ स्वः सूर्याय स्वाहा।

ॐ भूर्भुवः स्वः स्वाहा।

ॐ विष्णवे स्वाहा।

ॐ रुद्राय स्वाहा।

अब 6 किशमिश, 6 फल या 6 फल के टुकड़े लें और इस मन्त्र का उच्चारण करें…

ॐ पार्ष्देभ्यो नमः।

📿पूर्णाहुति
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इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये एक गोला का टुकड़ा, बड़ी लकड़ी और थोड़ा घी हवन में अर्पित करें और साथ ही यह कल्पना करें कि आप अपना सम्पूर्ण अस्तित्व मां दुर्गा को समर्पित कर रहे हैं।

ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः स्वाहा।

इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये हवन में घी अर्पित करें।

ॐ अग्नवे सप्तवते स्वाहा।

इस मन्त्र या माता के किसी अन्य मन्त्र द्वारा यथाशक्ति ध्यान करें।

ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः।
सिंहस्था शशिशेखरा मरकतप्रख्ययैश्चतुर्भिर्भूयै।
शङ्खं चक्रधनुःशरांश्चर दधती नेत्रैस्त्रिभिः शोभिता।
आमुक्ताङ्गदहारकङ्कणरणत्काञ्चीरणन्नूपुरा।
दुर्गा दुर्गतिहारिणी भवतु नो रत्‍‌नोल्लसत्कुण्डला॥
ध्यानार्थे अक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।
ॐ श्रीदुर्गायै नमः।

अन्त में इस मन्त्र का उच्चारण करें।

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः

अंत में कपूर से आरती करें और हवन संपन्न करने के बाद कन्याओं को भोजन कराएं।

📿पूर्णाहुति देने का एक तरीका ये भी है-
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एक नारियल के गोले में कलावा बांध लें। उसके ऊपर के भाग को काट कर उसमें घी, पान, सुपारी, लौंग, जायफल, खीर और पूरी भर लें और बची हुई हवन सामग्री भी उस नारियल में डाल दें। फिर पूर्ण आहुति मंत्र पढ़ते हुए इस गोले को हवनकुंड के बीच में रख दें। पूर्णाहुति मंत्र है: ऊँ पूर्णमद: पूर्णम् इदम् पूर्णात पूर्णादिमं उच्यते, पुणस्य पूर्णम् उदच्यते। पूर्णस्य पूर्णभादाय पूर्णमेवावाशिष्यते।।

⚜️नवरात्रि हवन मुहूर्त
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नवरात्रि नवमी हवन मुहूर्त 1 अक्टूबर की सुबह 06:14 से शाम 06:07 बजे तक रहेगा।

🛑(नोट: यह एक संक्षिप्त और सरल विधि है जिसके जरिए आप खुद ही घर पर आसानी से हवन पूजन कर सकते हैं। लेकिन विशेष हवन पूजन किसी योग्य विद्वान द्वारा ही कराएं।)

🪔हवन के बाद करें मां दुर्गा की आरती
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जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
ॐ जय अम्बे…..

मांग सिंदूर बिराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रबदन नीको।।
ॐ जय अम्बे…..

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै।।
ॐ जय अम्बे…..

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी।।
ॐ जय अम्बे…..

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत समज्योति।।
ॐ जय अम्बे…..

शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती।।
ॐ जय अम्बे…..

चण्ड-मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ॐ जय अम्बे…..

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।।
ॐ जय अम्बे…..

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं, नृत्य करत भैरू।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।।
ॐ जय अम्बे…..

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता।।
ॐ जय अम्बे…..

भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्परधारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी।।
ॐ जय अम्बे…..

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।।
ॐ जय अम्बे…..

अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै।।
ॐ जय अम्बे…..

📿नवरात्रि के हवन में दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का विशेष महत्व माना जाता है। आप इन मंत्रों से भी हवन में आहुतियां दे सकते हैं…
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  1. या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु च्छायारूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भुतानाञ्चाखिलेषु या ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद् व्याप्य स्थिता जगत् ।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  1. स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रया । त्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता ।
  • करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी । शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः ।। स्वाहा
  1. या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितै । रस्माभिरीशा च सुरैर्नमस्यते ।
  • या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति नः । सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः ।। स्वाहा
    🚩जयमाताकी🚩
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    नारायण सेवा ज्योतिष संस्थान