चीफ जस्टिस (CJI) बीआरगवईसुप्रीम कोर्ट की नई कहानी और दास्तानदेशवासियों के सूचनार्थ समर्पित

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*देवभूमि न्यूज 24.इन*

केरल के एक मामले में नाबालिग लड़की से रेप के दोषी कैथोलिक पादरी फादर एडविन फिगारेज को मिली उम्रकैद की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सस्पेंड कर दिया।

💥 चीफ जस्टिस(CJI) बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने ईसाई पादरी को मिली सजा सस्पेंड करने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट बेंच ने फादर एडविन फिगारेज की ओर से सजा के खिलाफच दाखिल की गई अपील पर फैसले तक जमानत भी दे दी।

💥 केरल हाईकोर्ट ने ईसाई पादरी को ट्रायल कोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा को 20 साल की कैद में बदला था।

💥💥 अब तो CJI ने पादरी को नहीं कहा -जाओ अपने गॉड से, जीसस से ही सजा कम /निलंबित कराओ।तुम पादरी हो, तुम्हारा गॉड /जीसस से सीधा संबंध है,उनकी शक्ति देखो”। वैसे भी ज़ब किसी क्रिस्चियन पादरी /मिशनरी का केस आता है,तब मी लार्ड अत्यंत दयालु नजर आते हैं। क्या ये अंतर्राष्ट्रीय लॉबी का असर है ⁉️

वैसे याद दिला दें पप्पू की सजा निलंबित कर संसद सदस्यता बहाल करने वाले भी गवई ही थे।

और सुनिए गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री,वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ षडयंत्र रचने के मामले में गुजरात हाईकोर्ट द्वारा तीस्ता सीतलवाड़़ की जमानत रद्द कर सरेंडर करने के आदेश पर रोक लगाकर नियमित जमानत देने वाले भी गवई ही हैं।

ये जमानत तब दी गईं जब जून महीने की छुट्टी चल रही थी। सुप्रीम कोर्ट के मी लार्ड छुट्टी पर थे।

कपिल सिब्बल ने तत्कालीन CJI चंद्रचूड़ को सुचना दी।वो उस समय शाम को साथी जज की बेटी के शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति देख रहे थे।

तुरंत दो जजों की पीठ बना दी।कुछ ही घंटो में देर शाम सुनवाई हुई।दोनों जजों में मतभेद था।कोई निर्णय नहीं हुआ। रात में तीन जजों की पीठ फिर बना दी।रात में ही सुनवाई हुई।

💥गवई की सदस्यता वाली पीठ गुजरात हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा,इस षडयंत्रकारी महिला को तत्काल नियमित बेल दी।साथ ही प्रवचन दिया.. तीस्ता की गिरफ्तारी नहीं होंगी तो कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा।

ये है देश का सुप्रीम कोर्ट और ये हैं मी लार्ड..।
किन्तु किसी हिन्दू साधु पर झूठा केस भी लग जाए तो बरसों तक जमानत नहीं होती।मीडिया भी दिन भर न्यूज़ चलाता है।
प्रश्न इतना ही है कि पादरी,पास्टर,मुल्ला मौलाना को शीघ्र जमानत कैसे और क्यों मिल जाती है तथा हिन्दू सन्त को जमानत नहीं मिलती।
न्याय धर्म देखकर होता है भारत में।
भारत में हिन्दू हितं की बात करने से व्यक्ति साम्प्रदायिक हो जाता है और हिन्दू धर्म की आलोचना करे तो धर्म निरपेक्ष कहलाता है।