देवभूमि न्यूज 24.इन
हिमालय नीति अभियान व जनजागरण मंच ने देव संसद जगती के बाद एक बड़ा बयान दिया है। हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह व जनजागरण मंच के तत्कालीन अध्यक्ष लाल चंद कटोच व महासचिव डाक्टर पुष्पाल चंद ठाकुर ने कहा कि स्की विलेज जगती से नहीं बल्कि जन आंदोलन से निरस्त हुआ था। गुमान सिंह ने कहा कि जगती करवाने बाले कर्ताधर्ता कभी सरकार के साथ होते हैं तो कभी प्रोजेक्ट के विरोध में। उन्होंने कहा कि स्की विलेज की अंतिम हियरिंग तक जगती करवाने बाले सरकार के साथ खड़े थे न कि विरोध में। उन्होंने कहा कि पब्लिक हियरिंग में हमारे हक में फैसला आया था और बाद में कोर्ट में हमने केस जीता था तब जाकर स्की विलेज निरस्त हुआ था न कि देव जगती से। उन्होंने कहा कि विजली महादेव रोपवे लाने बाले भी यही और अब विरोध का ड्रामा कर रहे हैं। जिस दिन टिकट मिल जाएगा उस दिन फिर से रोपवे का राग अल्पया जाएगा। पहले यह लोग कहते थे कि विजली महादेव रोपवे मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है और अब जगती का नाम लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम सभी पर्यावरण विद रोपवे के खिलाफ हैं और रोपवे नहीं बनने देंगें ,इसके लिए लड़ाई लड़नी पड़ेगी और आंदोलन करने पड़ते हैं न कि जगती से निरस्त होते हैं। उन्होंने कहा कि विजली महादेव में भारी भीड़ व यहां की पहाड़ी के साथ पर्यावरण की दृष्टि छेड़छाड़ उचित नहीं। वहीं जनजागरण मंच के तत्कालीन अध्यक्ष लालचंद कटोच व महासचिव डाक्टर पुष्पाल चंद ठाकुर ने कहा है कि हमने वर्ष 2007 में हाईकोर्ट में पीआईएल दायर की थी और 11 वर्ष तक कोर्ट में मामला चला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में हाईकोर्ट की डबल बैंच ने हमारे पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्की विलेज को निरस्त किया था। उन्होंने कहा कि सारी लड़ाई हमारी संस्था ने लड़ी है न कि जगती के कर्णधारों ने। यह तो उस समय सरकार व स्की विलेज के साथ खड़े थे। उन्होंने कहा कि हमेशा हमारी लड़ाई का राजनीतिक फायदा उठाने के प्रयास हुए हैं जो बिल्कुल सहन नहीं होगा।