देवभूमि न्यूज 24.इन
जन्म: 9 जनवरी 1927
निधन: 21 मई 2021
सुंदरलाल बहुगुणा भारत के अग्रणी पर्यावरणविद, सामाजिक कार्यकर्ता और चिपको आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे। प्रकृति संरक्षण के लिए उनके आजीवन संघर्ष ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। वृक्षों को बचाने के उनके अहिंसक आंदोलन के कारण वे “वृक्षमित्र” के नाम से प्रसिद्ध हुए और पर्यावरण संरक्षण की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाया।
🔹 जन्म एवं पारिवारिक परिचय
सुंदरलाल बहुगुणा का जन्म 9 जनवरी 1927 को देवभूमि उत्तराखंड के सिलयारा गांव में हुआ।
पिता: अंबादत्त बहुगुणा
माता: पूर्णा देवी
पत्नी: विमला नौटियाल
संतान: राजीवनयन बहुगुणा, माधुरी पाठक और प्रदीप बहुगुणा
🔹 शिक्षा
प्रारंभिक शिक्षा के बाद सुंदरलाल बहुगुणा लाहौर चले गए, जहां से उन्होंने कला स्नातक (बी.ए.) की शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति सजग हो गए थे।
🔹 सामाजिक एवं पर्यावरणीय योगदान
अपनी पत्नी विमला नौटियाल के सहयोग से उन्होंने सिलयारा में ‘पर्वतीय नवजीवन मंडल’ की स्थापना की।
1949 में मीराबेन और ठक्कर बाप्पा के संपर्क में आने के बाद उन्होंने दलित वर्ग और वंचित समाज के उत्थान के लिए कार्य शुरू किया। टिहरी में ठक्कर बाप्पा छात्रावास की स्थापना की और दलितों को मंदिर प्रवेश का अधिकार दिलाने के लिए आंदोलन चलाया।
1971 में उन्होंने जंगलों की कटाई के विरोध में 16 दिनों का अनशन किया।
इसके बाद शुरू हुआ चिपको आंदोलन, जिसने पर्यावरण संरक्षण को एक जनांदोलन का स्वरूप दे दिया। इसी आंदोलन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
🔹 सम्मान एवं पुरस्कार
सुंदरलाल बहुगुणा को उनके पर्यावरणीय संघर्षों के लिए देश-विदेश में अनेक सम्मानों से नवाजा गया—
1980 – अमेरिका की फ्रेंड्स ऑफ नेचर संस्था द्वारा सम्मान
1981 – स्टॉकहोम का वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार (राइट लिवलीहुड अवॉर्ड)
1981 – पद्मश्री (पेड़ों की कटाई जारी रहने के विरोध में अस्वीकार किया)
1985 एवं 1986 – जमनालाल बजाज पुरस्कार
1987 – राइट लिवलीहुड अवॉर्ड (चिपको आंदोलन)
1987 – शेर-ए-कश्मीर पुरस्कार
1987 – सरस्वती सम्मान
1989 – आईआईटी रुड़की द्वारा सामाजिक विज्ञान में मानद डॉक्टरेट
1998 – पहल सम्मान
1999 – गांधी सेवा सम्मान
2000 – सत्यपाल मित्तल अवॉर्ड
2001 – पद्म विभूषण
पर्यावरण को स्थायी संपत्ति मानने वाले इस महापुरुष को लोग स्नेहपूर्वक “पर्यावरण गांधी” भी कहते हैं।
🔹 निधन
21 मई 2021 को सुंदरलाल बहुगुणा का निधन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश में हुआ। उनका जीवन प्रकृति, समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य विरासत है।
🌱 सुंदरलाल बहुगुणा केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीने की प्रेरणा हैं।
उनकी जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
संपादक
देवभूमि न्यूज 24.इन
शिलाई,सिरमौर
हिमाचल प्रदेश