सावधान! एक ही महीने में लगेंगे दो बड़े ग्रहण, जानें तारीख, सूतक काल और जरूरी नियम

Share this post

देवभूमि न्यूज 24.इन

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली खगोलीय घटनाएं माना जाता है। वर्ष 2026 में फाल्गुन माह के दौरान एक ही महीने के भीतर दो बड़े ग्रहण लगने जा रहे हैं, जिसे धार्मिक दृष्टि से शुभ संकेत नहीं माना जाता। खास बात यह है कि इन दोनों ग्रहणों के बीच केवल 15 दिनों का अंतर होगा, जिससे इनका महत्व और भी बढ़ जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब किसी एक माह में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों लगते हैं, तो इसका प्रभाव जनजीवन, प्रकृति और धार्मिक गतिविधियों पर पड़ता है। आइए जानते हैं Grahan 2026 की तारीखें, भारत में दृश्यता, सूतक काल और इससे जुड़े जरूरी नियम।
सूर्य ग्रहण 2026: 17 फरवरी को लगेगा पहला ग्रहण
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026, दिन मंगलवार को फाल्गुन अमावस्या के अवसर पर लगेगा।

क्या भारत में दिखाई देगा?
नहीं, यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा।

सूतक काल रहेगा या नहीं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, उसका सूतक काल मान्य नहीं होता इसलिए इस दिन पूजा-पाठ, दैनिक कार्य और खान-पान सामान्य रूप से किए जा सकते हैं।
चंद्र ग्रहण 2026: 3 मार्च को लगेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण
सूर्य ग्रहण के ठीक 15 दिन बाद, यानी 3 मार्च 2026 को वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। यह दिन धार्मिक रूप से और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन होलिका दहन का पर्व भी मनाया जाएगा।

क्या भारत में दिखाई देगा?
हां, यह चंद्र ग्रहण भारत में पूरी तरह दृश्य होगा।

सूतक काल:
चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है और ग्रहण समाप्ति तक प्रभावी रहता है।
सूतक काल में क्या करें और क्या न करें
जब ग्रहण भारत में दिखाई देता है, तो सूतक काल के नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है।

क्या न करें
सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
घर में पूजा-पाठ, हवन या शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
सूतक काल में भोजन बनाना और खाना निषेध होता है।
(हालांकि बीमार, बुजुर्ग और बच्चों पर यह नियम लागू नहीं होता)

क्या करें
सूतक शुरू होने से पहले दूध, दही और पके भोजन में तुलसी के पत्ते डाल दें।
ग्रहण काल में शांत मन से मंत्र जाप या इष्ट देव का स्मरण करें।
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर घर और मंदिर की शुद्धि करें।
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानियां
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण काल में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है इसलिए गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
ग्रहण के समय घर से बाहर न निकलें
सुई, कैंची, चाकू जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करें। ग्रहण काल में सोने के बजाय भगवान का नाम जपें।

एक ही महीने में दो ग्रहण क्यों माने जाते हैं अशुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय राहु और केतु की छाया सूर्य या चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा में कमी आती है। ज्योतिषीय दृष्टि से, एक ही महीने में दो ग्रहण होना प्राकृतिक असंतुलन, सामाजिक हलचल या प्राकृतिक आपदाओं की आशंका का संकेत माना जाता है।
धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषकर 3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण, जो भारत में दिखाई देगा, उसके सूतक नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है।