देवभूमि न्यूज 24.इन
राज्य को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू की अध्यक्षता में शुक्रवार को पीटरहॉफ, शिमला में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान और विधायक कुलदीप सिंह राठौर भी मौजूद रहे।
बैठक में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के प्रदेश पर संभावित प्रभाव पर चर्चा की गई। इसमें मुख्य विपक्षी दल भाजपा के साथ-साथ Communist Party of India (Marxist), Aam Aadmi Party और Bahujan Samaj Party के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था।
भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल कुछ विधायकों के साथ बैठक में शामिल हुए। हालांकि, चर्चा के दौरान भाजपा ने बैठक से वॉकआउट कर दिया। बाद में जयराम ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में राज्य सरकार पर केंद्र पर दोष मढ़ने और अपनी गारंटियों के दबाव में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री का पक्ष
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान वापस लेने का प्रस्ताव प्रदेश के लिए चिंता का विषय है और इससे राज्य की आर्थिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है और जनता के हितों की रक्षा के बजाय राजनीति कर रही है।
उन्होंने कहा कि न केवल कांग्रेस, बल्कि सीपीआई (एम), आम आदमी पार्टी और बसपा ने भी प्रधानमंत्री से मिलकर आरडीजी बहाल करने की इच्छा जताई है। मुख्यमंत्री ने अनुच्छेद 275(1) का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्व घाटा अनुदान राज्यों का संवैधानिक अधिकार है, जिसका उद्देश्य राजस्व और व्यय के अंतर को कम करना है और यह व्यवस्था 1952 से लागू है।
भाजपा पर आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा नेताओं को भी एहसास है कि केंद्र द्वारा आरडीजी समाप्त करना उचित नहीं है, लेकिन वे स्पष्ट रुख अपनाने से बच रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कभी राज्य के लोगों के साथ खड़ी नहीं रही। वर्ष 2023 की आपदा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विशेष राहत पैकेज की मांग पर भी भाजपा ने सदन से वॉकआउट किया था।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान और कांग्रेस नेता कुलदीप सिंह राठौर ने भाजपा के वॉकआउट की आलोचना की। हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष डा. बिंदल ने बैठक में केवल राजनीतिक बयानबाजी की और आरडीजी पर कोई ठोस बात नहीं रखी। उनके अनुसार, भाजपा पूर्व निर्धारित राजनीतिक उद्देश्य से आई थी।
अन्य दलों का समर्थन
आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि डा. राजेश चानना ने कहा कि राज्य के सीमित संसाधनों को देखते हुए केंद्र से वित्तीय सहायता आवश्यक है और आरडीजी बहाल की जानी चाहिए। बसपा प्रतिनिधि ने भी कहा कि प्रदेश को अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।
पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने सभी दलों से प्रदेश हित में सहमति बनाने की अपील की और चेतावनी दी कि यदि भाजपा का रुख यही रहा तो चुनाव में उसे नुकसान उठाना पड़ सकता