देवभूमि न्यूज 24.इन
हर वर्ष 20 फरवरी को मनाया जाने वाला विश्व सामाजिक न्याय दिवस हमें यह याद दिलाता है कि विकास का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करना है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र की उस सोच को प्रतिबिंबित करता है जिसमें गरीबी उन्मूलन, लैंगिक समानता, श्रमिक अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है।
सामाजिक न्याय क्यों आवश्यक है?
सामाजिक न्याय का अर्थ है—ऐसा समाज जहां व्यक्ति की पहचान उसके धर्म, जाति, लिंग, भाषा या आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके मानवीय अधिकारों और क्षमताओं से तय हो। जब समाज में संसाधनों, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों का समान वितरण नहीं होता, तब असमानताएं गहराती हैं और सामाजिक तनाव बढ़ता है।
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में सामाजिक न्याय केवल एक आदर्श नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है। हमारे संविधान में समानता का अधिकार, भेदभाव के विरुद्ध सुरक्षा और कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रावधान इसी सोच का परिणाम हैं।
आर्थिक विकास बनाम सामाजिक संतुलन
आज वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास की होड़ है, लेकिन यदि यह विकास कुछ सीमित वर्गों तक सिमट जाए तो सामाजिक असंतुलन पैदा होता है। सामाजिक न्याय का उद्देश्य यही है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
गरीबी, बेरोजगारी, लैंगिक असमानता, बाल श्रम, प्रवासी मजदूरों की स्थिति और दिव्यांगजनों के अधिकार जैसे मुद्दे आज भी गंभीर चिंता का विषय हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल योजनाओं की घोषणा से नहीं, बल्कि प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शिता से संभव है।
युवाओं और समाज की भूमिका
सामाजिक न्याय केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है। समाज, शिक्षण संस्थानों, मीडिया और युवाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
युवा पीढ़ी को संवेदनशीलता, समानता और सहिष्णुता के मूल्यों को अपनाना होगा। डिजिटल युग में सूचना की शक्ति का उपयोग सकारात्मक बदलाव के लिए किया जा सकता है। भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाना और समावेशी सोच को बढ़ावा देना समय की मांग है।
आगे की राह
विश्व सामाजिक न्याय दिवस केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन न रहे, बल्कि यह आत्ममंथन का अवसर बने। हमें यह विचार करना होगा कि क्या हमारी नीतियां और व्यवहार समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक न्याय पहुंचा पा रहे हैं?
समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षित कार्य वातावरण और सामाजिक सुरक्षा—ये केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि स्थायी विकास की आधारशिला हैं।
अंततः, सामाजिक न्याय का अर्थ है—ऐसा समाज जहां हर व्यक्ति सम्मानपूर्वक जीवन जी सके, अपनी क्षमता का विकास कर सके और अवसरों की दौड़ में पीछे न छूटे। यही इस दिवस का वास्तविक संदेश और हमारा सामूहिक संकल्प होना चाहिए।
संपादक
जगत सिंह तोमर
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