*देवभूमि न्यूज 24.इन*
⭕नारी ईश्वर का वह अनमोल उपहार है, जिसके बिना स्वयं ‘शक्तिमान’ (ईश्वर) की लीलाएं भी अधूरी हैं। शास्त्रों के अनुसार, स्त्री और पुरुष एक ही सत्ता के दो बराबर हिस्से माने गए हैं।
महिला दिवस 8 मार्च 2026 को मनाया जायेगा। महिला दिवस के इस विशेष अवसर पर, आइए जानते हैं हमारे धर्मग्रंथों में छिपे वे 8 स्वर्णिम प्रमाण, जो राष्ट्र के विकास और ईश्वर की पूर्णता में नारी शक्ति के महत्व को सिद्ध करते हैं।
📿1. ईश्वर का आधा स्वरूप (श्रीमद्भागवतम् 3.12.52)
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🚩श्लोक:- तयोस्तु यत् समुत्पन्नं मिथुनं द्विजसत्तम | ब्रह्मा तदभिधायाह मनु: स्वायम्भुव: स्वराट् ||
🚩अर्थ:- ब्रह्मा जी के शरीर से जो स्त्री-पुरुष का जोड़ा उत्पन्न हुआ, उनमें से पुरुष ‘स्वायम्भुव मनु’ कहलाए और स्त्री ‘शतरूपा’ हुई।
📿2. ह्लादिनी शक्ति (चैतन्य चरितामृत, आदि 4.96)
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🚩श्लोक:- राधा पूर्ण शक्ति, कृष्ण पूर्ण शक्तिमान | दुइ वस्तु भेद नाहि, शास्त्र-परमाण ||
🚩अर्थ:- श्री राधा पूर्ण शक्ति हैं और श्री कृष्ण पूर्ण शक्तिमान हैं। शास्त्रों के प्रमाण अनुसार इन दोनों में कोई वास्तविक भेद नहीं है।
📿3. राष्ट्र का नेतृत्व (ऋग्वेद 10.125.3)
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🚩श्लोक:- अहं राष्ट्री संगमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्।
🚩अर्थ:- मैं (नारी शक्ति) ही पूरे राष्ट्र की शासिका हूं, जो सभी को सुख-संपत्ति प्रदान करती है और ज्ञान में सर्वप्रथम है।
📿4. साक्षात् देवी स्वरूप (मार्कण्डेय पुराण 11.6)
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🚩श्लोक:- विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु।
🚩अर्थ:- हे देवि! संसार की समस्त विद्याएं और जगत की समस्त स्त्रियाँ आपके ही स्वरूप के भिन्न-भिन्न रूप हैं।
📿5. प्राण चेतना (देवी भागवत पुराण 9.1.96)
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🚩श्लोक:- त्वं स्वाहा च स्वधा त्वं च दक्षिणा सर्वधारिणी।
🚩अर्थ:- आप ही स्वाहा, स्वधा, दक्षिणा और सभी को धारण करने वाली शक्ति हैं।
📿6. सुख-समृद्धि का निवास (मनुस्मृति 3.56)
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🚩श्लोक:- यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
🚩अर्थ:- जहां नारी का पूजन (सम्मान) होता है, वहां देवता रमण करते हैं (अर्थात ईश्वर का वास होता है)।
📿7. संकट का अटूट सहारा (वाल्मीकि रामायण, अयोध्या कांड 2.39.29)
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🚩श्लोक:- न भर्ता न सुतः स्वो न माता न सहायाः। प्रेत्य चेह च नारीणां पतिरेको गतिः सदा॥
🚩अर्थ:- संकट और विपत्ति के समय परिवार के लिए नारी ही सबसे बड़ा सहारा और शक्ति बनती है।
📿8. संस्कारों की जननी (स्कंद पुराण, काशी खंड 4.41)
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🚩श्लोक:- सर्वावस्थासु नारीणां पूज्यता शास्त्रनिश्चयः।
🚩अर्थ:- शास्त्रों का यह निश्चित मत है कि हर अवस्था में नारी सदैव पूजनीय और वंदनीय है।
*🚩जय_माता_की🚩*
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