कैग की रिपोर्ट ने खोली हिमाचल की ‘खाली तिजोरी’ की पोल, 42 बार ओवरड्राफ्ट में गई सरकार

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देवभूमि न्यूज 24

शिमला : हिमाचल प्रदेश की बिगड़ती वित्तीय सेहत को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने गंभीर चिंता जताई है। वर्ष 2024-25 की वित्त लेखा परीक्षा रिपोर्ट में बढ़ता कर्ज, भारी प्रतिबद्ध व्यय, कमजोर राजस्व वृद्धि और लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा राज्य की वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। कैग की यह रिपोर्ट विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में रखी।रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार ट्रेजरी का दैनिक कैश बैलेंस 365 दिनों में से केवल 203 दिन ही बनाए रख सकी। 162 दिन ट्रेजरी में कैश बैलेंस नहीं था। यही नहीं, पूरे वर्ष के दौरान ट्रेजरी 42 बार ओवरड्राफ्ट में गई। इस दौरान कैश बैलेंस इन्वेस्टमेंट भी शून्य रही।1.02 लाख करोड़ के पार पहुंचा राज्य का कर्जकैग के अनुसार वर्ष 2024-25 में हिमाचल प्रदेश का कुल कर्ज बढ़कर करीब 1,02,187.62 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का करीब 44 फीसदी है। 31 मार्च 2025 तक राज्य की आंतरिक देनदारियां 67,448.38 करोड़ रुपये हो गईं, जिनमें एक साल के भीतर 9.78 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई।वित्त वर्ष के दौरान सरकार ने 24,100 करोड़ रुपये का नया आंतरिक कर्ज उठाया, जबकि 18,091 करोड़ रुपये का पुराना कर्ज चुकाया।राजकोषीय घाटा 5.44 फीसदी, एफआरबीएम सीमा से काफी ऊपररिपोर्ट के अनुसार 2024-25 में हिमाचल का राजकोषीय घाटा 12,611.05 करोड़ रुपये रहा, जो जीएसडीपी का 5.44 फीसदी है। यह हिमाचल प्रदेश एफआरबीएम अधिनियम में निर्धारित 3 फीसदी की सीमा से काफी अधिक है।वहीं, राज्य का राजस्व घाटा 6,804.61 करोड़ रुपये रहा, जो जीएसडीपी का 2.94 फीसदी है।40,872 करोड़ की आय, खर्च 47,676 करोड़कैग रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024-25 में राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियां 40,872.35 करोड़ रुपये रहीं, जबकि राजस्व व्यय 47,676.96 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यानी आमदनी की तुलना में खर्च कहीं अधिक रहा।सरकार ने अकेले ब्याज भुगतान पर 6,260.93 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि पूंजीगत व्यय 5,956.83 करोड़ रुपये रहा।वेतन-पेंशन-ब्याज ने निगला 86 फीसदी राजस्वहिमाचल की वित्तीय स्थिति पर सबसे बड़ी चिंता वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान के रूप में होने वाले प्रतिबद्ध खर्च को लेकर सामने आई है। इन तीन मदों पर कुल 33,266 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का करीब 86 फीसदी है।इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ा। राजस्व का महज 14 फीसदी हिस्सा ही विकास एवं अन्य जनकल्याणकारी गतिविधियों के लिए बच पाया।बजट अनुमान भी नहीं हो पाया पूराकैग ने कहा कि राज्य सरकार वित्त वर्ष 2024-25 में अपने बजट अनुमानों का केवल 84.57 फीसदी ही हासिल कर पाई। इसमें 2,328.68 करोड़ रुपये की कमी रही।राज्य के कुल राजस्व में एसजीएसटी, राज्य आबकारी शुल्क और बिक्री कर जैसे तीन प्रमुख कर स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 81 फीसदी है। कैग के अनुसार हिमाचल की आर्थिक वृद्धि दर 9.2 फीसदी रहने के बावजूद इसका अपेक्षित लाभ राजस्व सृजन में परिवर्तित नहीं हो पाया।पेंशन खर्च में 45 फीसदी उछालकैग ने पेंशन व्यय में तेजी से हुई वृद्धि को भी चिंताजनक बताया है। वर्ष 2022-23 में पेंशन खर्च 45 फीसदी बढ़कर 6,399 करोड़ रुपये से 9,284 करोड़ रुपये हो गया।बिजली, परिवहन और खाद्य एवं आपूर्ति समेत विभिन्न क्षेत्रों में सब्सिडी पर सरकार ने 1,872 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कुल राजस्व व्यय का करीब 4 फीसदी है।6,239 करोड़ लगाए, रिटर्न सिर्फ 191 करोड़राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों, बोर्डों और निगमों में सरकार द्वारा लगाए गए 6,239 करोड़ रुपये के मुकाबले केवल 191 करोड़ रुपये का रिटर्न प्राप्त हुआ। कैग की रिपोर्ट में इसे भी राज्य के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ाने वाले कारकों में शामिल किया गया है।कैग के आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था में विकास दर भले ही मजबूत दिखाई दे रही हो, लेकिन बढ़ता कर्ज, भारी प्रतिबद्ध खर्च और सीमित राजस्व क्षमता सरकार के सामने बड़ी वित्तीय चुनौती खड़ी कर रहे हैं।