गोगा नवमी पर गोगा माड़ी में गूंजे भजन, दशमी को धूमधाम से शिलाई लौटीं छड़ियां

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कार्तिकेय तोमर
देवभूमि न्यूज 24

शिलाई गोगा जाहरवीर की आस्था के केंद्र शिलाई की गोगा माड़ी में गोगा नवमी के अवसर पर रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। जागरण में श्रद्धालुओं ने देर रात तक गोगा जाहरवीर के भजनों के साथ पहाड़ी गीतों का आनंद लिया। पूरी गोगा माड़ी भक्तिमय माहौल से गूंजती रही।
दशमी के दिन गोगा माड़ी से छड़ियां वापस शिलाई गांव पहुंचीं। छड़ियों के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ छड़ियों का स्वागत किया।शंख ध्वनि और डोरूओ की थाप, गोगा जाहरवीर के जयकारों और पारंपरिक गीतों के बीच छड़ियों को गांव में लाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु स्वागत यात्रा में शामिल हुए। लोगों ने छड़ियों के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और पूजा-अर्चना की।
शिलाई के लोगों के अनुसार, दशकों पहले शिलाई की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित गोगा माड़ी करीब नौ मंजिला हुआ करती थी। यहां प्रतिदिन गोगा जाहरवीर की पूजा-अर्चना की जाती थी। स्थानीय मान्यता के अनुसार, एक बार बीणी नामक व्यक्ति ने गोगा माड़ी पर आक्रमण कर इसे तहस-नहस कर दिया था।
इसके बाद शिलाई गांव में ही गोगा जाहरवीर की पूजा-अर्चना की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है।शिलाई गांव के एक मुहल्ले के लोग प्रतिदिन बारी बारी से गोगा जी की पूजा करते हैं अब शिलाई गांव में गोगा जाहरवीर का सुंदर मंदिर बनाया गया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्तमान में गोगा माड़ी में केवल गोगा जाहरवीर के जन्मोत्सव यानी गोगा नवमी के अवसर पर ही रात्रि जागरण किया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु माड़ी पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और रातभर भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं।
गोगा जाहरवीर से जुड़ी यह परंपरा शिलाई की धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। ग्रामीण आज भी पूरी श्रद्धा के साथ इस दशकों पुरानी परंपरा को निभा रहे हैं।