*देवभूमि न्यूज 24*
⭕हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय पूर्वजों के प्रति अपनी कृतज्ञता, आदर और श्रद्धा अर्पित करने का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है. पंचांग के अनुसार, कल 30 सितंबर 2026, बुधवार को पितृपक्ष का चतुर्थी श्राद्ध संपन्न किया जाएगा.
बुधवार का दिन भगवान श्रीगणेश को समर्पित होता है और इस दिन चतुर्थी श्राद्ध पड़ने से जातकों को प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता के साथ-साथ अपने कुल के पितरों का भी दोहरा आशीर्वाद प्राप्त होगा. इस दिन पितरों को याद करके श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता है कि अपनी मृत्यु तिथि के अनुसार पितरों का श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
⚜️चतुर्थी श्राद्ध किसके लिए किया जाता है?
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चतुर्थी श्राद्ध पितृपक्ष के दौरान चतुर्थी तिथि पर किया जाने वाला श्राद्ध है. मान्यता के अनुसार, अगर परिवार के किसी सदस्य का निधन शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ है, तो पितृपक्ष में उनके लिए चतुर्थी श्राद्ध किया जाता है. हिंदू परंपरा में जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर उसका श्राद्ध करने को विशेष महत्व दिया जाता है. इसलिए अगर किसी पितर की मृत्यु चतुर्थी तिथि को हुई थी, तो उनके लिए चतुर्थी श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण किया जाता है. चतुर्थी श्राद्ध को कई जगह चौथ श्राद्ध भी कहा जाता है. इस दिन परिवार के लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए धार्मिक कर्म करते हैं.
⚜️चतुर्थी श्राद्ध 2026 का शुभ मुहूर्त
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पंचांग के अनुसार, 30 सितंबर 2026, बुधवार को चतुर्थी श्राद्ध किया जाएगा. इस दिन श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त को शुभ माना गया है. श्राद्ध से जुड़े जरूरी कर्म अपराह्न काल समाप्त होने से पहले कर लेने की परंपरा है. 30 सितंबर को कुतुप मुहूर्त सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा. इसके बाद रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:35 बजे से 1:22 बजे तक रहेगा. वहीं अपराह्न काल दोपहर 1:22 बजे से 3:45 बजे तक रहेगा.
⚜️चतुर्थी श्राद्ध में क्या किया जाता है?
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चतुर्थी श्राद्ध के दिन श्राद्धकर्ता स्नान आदि करने के बाद अपने पितरों का स्मरण करके श्राद्ध का संकल्प लेता है. इसके बाद परंपरा के अनुसार पितरों के लिए श्राद्ध कर्म, पिंडदान और तर्पण किया जाता है.श्राद्ध के अंत में तर्पण करने की परंपरा बताई गई है. इसमें जल के साथ तिल आदि अर्पित करके पितरों का स्मरण किया जाता है. इसके बाद ब्राह्मण भोजन और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करने की भी परंपरा है. पितृपक्ष के श्राद्ध को पार्वण श्राद्ध कहा जाता है. इनके लिए कुतुप और रौहिण जैसे मुहूर्तों को शुभ माना गया है. मान्यता है कि श्राद्ध कर्म को अपराह्न काल समाप्त होने से पहले पूरा कर लेना चाहिए.
⚜️एक ही दिन होगा चतुर्थी और पंचमी का श्राद्ध
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30 सितंबर 2026, बुधवार को पितृ पक्ष की चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन किया जाएगा. तिथि के क्षय यानी तिथि के कम समय के अंतर के कारण इस बार दोनों तिथियां एक ही दिन पड़ रही हैं. इसलिए 30 सितंबर को ही चतुर्थी और पंचमी दोनों तिथियों से जुड़े पितरों का श्राद्ध अपराह्न काल में किया जाएगा. जिन पितरों का निधन चतुर्थी या पंचमी तिथि को हुआ है, उनके लिए इस दिन परंपरा के अनुसार श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है.
🚩ऊँ_श्री_गणेशाय_नम:🚩
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