*देवभूमि न्यूज 24*
⭕वैदिक पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से हो चुकी है। वहीं, इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। यह अवधि पितरों को प्रसन्न करने के लिए अधिक शुभ मानी जाती है।
इस दौरान घर में वास्तु शास्त्र में बताए गए विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। ऐसा न करने से घर में अशांति, धन हानि और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही पितर भी नाराज हो सकते हैं। यह जानकर आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि पितृ पक्ष के दौरान वास्तु की किन गलतियों से बचना चाहिए। आइए इस लेख में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
⚜️इन बातों का रखें ध्यान
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- वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों की दिशा माना जाता है। इसलिए पितृ पक्ष की अवधि के दौरान भूलकर भी इस दिशा में कूड़ा, कबाड़ या भारी सामान न रखें। माना जाता है कि इस गलती करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिसका सीधा प्रभाव घर के सदस्यों पर पड़ता है। इसलिए पितृ पक्ष के समय दक्षिण दिशा को हमेशा साफ-सुथरा रखें।
- वास्तु शास्त्र में पितरों की तस्वीर लगाने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। ध्यान रखें कि पितरों की तस्वीर उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में लगाना अशुभ माना जाता है। गलत दिशा में तस्वीर लगाने से पितर नाराज हो सकते हैं और घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। पितरों की तस्वीर हमेशा घर की दक्षिण दीवार पर ही लगानी चाहिए, जिससे उनका मुख उत्तर दिशा की ओर रहे।
- इसके अलावा पितृ पक्ष के दौरान घर में झगड़ा करना और बड़े-बुजुर्गों का अपमान करना पूरी तरह से वर्जित है। वास्तु के अनुसार, ऐसा करने से घर में अशांति का माहौल बनता है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान किसी से भी वाद-विवाद करने या अपमान करने से बचें। घर में सकारात्मक और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना अत्यधिक फलदायी साबित होता है।
- पितृ पक्ष में घर के मुख्य द्वार की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि मुख्य द्वार से ही घर में सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी का आगमन होता है। ऐसा माना जाता है कि द्वार पर गंदगी होने से घर में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है, जिससे जीवन में धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है और पितर भी बिना आशीर्वाद दिए लौट सकते हैं।
*🚩हरिऊँ🚩* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
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