देवभूमि न्यूज 24 साहित्यिक मंचमित्रता — अनमोल रिश्ता

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देवभूमि न्यूज 24

मित्र वही जो साथ दे, सुख-दुख में हर बार।
सूनी राहों में बने, आशा का आधार॥

धन-दौलत सब छूटती, छूटे जग संसार।
सच्चा मित्र वही कहो, जो ना छोड़े मझधार॥

हँसी बाँट ले हर्ष में, आँसू भी ले बाँट।
मित्र खड़ा हो सामने, दुख जाए फिर काँप॥

स्वार्थ बढ़े संबंध में, मित्रता खोए प्राण।
निस्वार्थी जो प्रेम हो, वही मित्रता मान॥

दर्पण जैसा मित्र हो, सच कहने में धीर।
भटके पथ पर रोककर, कर दे मन को स्थिर॥

दूरी चाहे हो कभी, मन से हो न दूर।
सच्चे मित्र के प्रेम का, रहता सदा सुरूर॥

समय कठिन जब आ पड़े, सब होते अनजान।
मित्र जो होवे सखा सही, लेता हाथ है थाम॥

मित्र मिले तो मानिए, ईश्वर का उपहार।
जीवन की इस राह में, मित्र बड़ा आधार॥

मित्रता न व्यापार है, ना कोई सौदा-मोल।
प्रेम, भरोसा, त्याग का, रिश्ता यह अनमोल॥

जीवन यदि संगीत है, मित्र मधुरता-ताल।
मित्र बिना संसार यह, लगता सूना-हाल॥

रिश्ते सारे जन्म के, मित्र मिले मन-मीत।
मित्रता ही वह दीप है, जो रखे हृदय पुनीत॥

✍️ रचनाकार: ममता सक्सेना चित्रांश निवास स्थान: कोसीकलां, मथुरा, उत्तर प्रदेश

💐देवभूमि न्यूज 24 की ओर से कवयित्री ममता सक्सेना चित्रांश को इस सुंदर, भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी रचना के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

सच्ची मित्रता जीवन का वह अनमोल उपहार है, जो कठिन समय में संबल, निराशा में आशा और जीवन में खुशियों के रंग भर देती है। यह रचना मित्रता के इसी पवित्र भाव, विश्वास और निस्वार्थ प्रेम को सुंदर शब्दों में अभिव्यक्त करती है।

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