शिलाई के बाद अब शरली गांव में विवाह और समाज सुधार पर लिया बड़ा निर्णय

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देवभूमि न्यूज 24 – शिलाई
कार्तिकेय तोमर

सामाजिक परंपराओं में समय-समय पर सुधार और बदलाव की आवश्यकता महसूस की जाती है। इसी दृष्टि से आज दिनांक 25 अक्टूबर 2026 रविवार, शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर शर्ली गांव की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें गांव के वरिष्ठ जनों और युवाओं ने भाग लिया।

गहन विचार-विमर्श के बाद सौहार्दपूर्ण वातावरण में सर्वसम्मति से विवाह और समाज सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिन्हें आज से ही लागू कर दिया गया है। उल्लंघन करने वालों को गांव और पंचायत द्वारा दंडित किया जाएगा।

प्रमुख निर्णय इस प्रकार हैं :

विवाह संबंधी सुधार – लड़के तथा लड़की की शादी में रिश्ता करते समय गांव का खर्चा (माश खाने की परंपरा) और लकड़ी काटते समय पूरे गांव की धाम, शादी के बाद कारबारिया (टोलुआ) की दावत तथा पुल्टोज की परंपरा को बंद कर दिया गया है। अब रिश्ता करते समय लड़के के साथ तथा पुल्टोज में भी दूल्हा-दुल्हन के साथ उसके परिवार के सदस्य ही जाएंगे, गांव के लोग नहीं।

अपने घर में शादी के पहले दिन मामा स्वागत की खर्चीली दावत बंद कर दी गई है। उस दिन केवल भांजे के मामा-मामी या परिवार के सदस्य ही शगुन लेकर आएंगे और घर में डीजे भी नहीं बजेगा। गांव के लोग भांजे की शादी में मामा के रूप में बारात के दिन (मुख्य दावत के दिन) ही एक साथ अपने खर्चे पर तालमेल बनाकर मोउले के रूप में जाएंगे। इसी तरह भांजी की शादी में भी पहले दिन मामा-मामी, भाई या परिवार के सदस्य ही जाएंगे, गांव के लोग मुख्य दावत के दिन एक साथ जाएंगे।

बारात में सीमा – बारात में अपने बेड़े से एक-एक व्यक्ति प्रति परिवार तथा अन्य बेड़े से 5-5 व्यक्ति प्रति बेड़ा निर्धारित किया गया है। बाकी अतिरिक्त रिश्तेदार जा सकेंगे। बारातियों की संख्या भी सीमित रखनी होगी।

मुख्य दावत – बड़ी शादी की मुख्य दावत पहले दिन शाम को तथा दूसरे दिन नेवदा रस्म के साथ दोपहर को मेहमानों के साथ पूरे ग्रामवासियों के लिए एक साथ सामुदायिक भवन में धाम के रूप में होगी। कोई भी परिवार अपनी सुविधानुसार सुबह या शाम को एक ही दावत भी रख सकता है।

जेवरात पर सीमा – सोने-चांदी के बढ़ते दामों और दिखावे को देखते हुए दुल्हन के जेवर पहनने की परंपरा को सीमित कर दिया गया है। अब केवल तीन गहने सोने के (मंगलसूत्र के साथ नाक और कान के जेवर) तथा दो गहने चांदी के (पायल और पुलड़ी) तक सीमित किया गया है। शादी समारोह के अलावा गांव की कोई भी महिला स्वेच्छा से गहने पहन सकती है।

मनोरंजन – शादी में पहले दिन शाम को भोजन के बाद रात 12 बजे तक डीजे बजाने की अनुमति होगी। नेवदा रस्म के दिन हाटी लोक संस्कृति और गीतों का मुजरा कार्यक्रम होगा और दोपहर भोजन के बाद 5 बजे तक डीजे पर महिला-पुरुषों का संयुक्त नाच-गाना हो सकेगा।

दहेज प्रथा पर रोक – लड़का या लड़की की शादी में दहेज लेना और देना बंद कर दिया गया है। लड़की को परंपरागत सोबे के तौर पर पांच बर्तन, एक संदूक तथा कपड़े दिए जा सकेंगे और उसके साथ बिना दिखावे के नकद राशि गुप्त दान के रूप में दी जा सकेगी।

शगुन व्यवस्था – भांजे की शादी में सेहरा-चोटी के साथ सूट-बूट और लड़के की माता को भी सूट दिया जाएगा, बाकी को बंद लिफाफे में शगुन दिया जाएगा। भांजी की शादी में भांजी को एक परात के साथ सूट-बूट, लड़की की मां को एक सूट दिया जाएगा और बाकी परिवार को बंद लिफाफे में शगुन। भांजे के लिए डंग के एवज में मस्तभोज खत में पूर्व निर्धारित 105 रुपए दिए जाएंगे।

पंडित और नाई की दक्षिणा – वेदी पर विवाह संस्कार संपन्न करने पर पंडित को 1100 रुपए तथा शादी के निमंत्रण देने और सहयोग के लिए नाई को रास्ते के किराया खर्च के अतिरिक्त 1100 रुपए नकद देने का निर्णय लिया गया है।

नशा प्रतिबंध – युवाओं में नशे के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए गांव में किसी भी तरह का नशा बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। उल्लंघन करने वाले को सामाजिक रूप से दंडित करने के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज की जाएगी। बारात में शराब ले जाने पर पूरी तरह रोक तथा शादी की दावत में भी शराब परोसने की परंपरा को सीमित किया गया है।

प्रसूता संबंधी – लड़की के पास बच्चा पैदा होने पर लड़की की मां, चाची, भाभी, बहन, बुआ आदि उसी परिवार से संबंधित महिलाएं ही प्रसूता बेटी और उसके परिवार को भोजन लेकर जाएंगी, गांव की महिलाओं के लिए नहीं।

ग्रामवासियों से आग्रह किया गया है कि सर्वसम्मति से लिए गए इन निर्णयों का ईमानदारी और निष्ठा के साथ पालन करें और अपने रिश्तेदारों को भी जानकारी दें।

“परम्पराएं जब समस्या लगने लगे तो उन्हें बदलना ही चाहिए”

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