शिलाई क्षेत्र में विवाह की दक्षिणा पर फैसले से भाट ब्राह्मण कल्याण समिति नाराज, पुनर्विचार की मांग

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कांडों भटनोल, शिलाई और शरली में शादी समारोहों का खर्च कम करने के निर्णय पर जताई आपत्ति; समिति बोली समाज सुधार का स्वागत, लेकिन ब्राह्मणों की दक्षिणा पर सीमा तय करना उचित नहीं

   *देवभूमि न्यूज 24*
      *शिलाई ब्यूरो*

शिलाई : गिरिपार क्षेत्र में विवाह समारोहों के दौरान होने वाले खर्च को कम करने के उद्देश्य से कांडों भटनोल, शिलाई और उसके बाद शरली गांव में लिए गए निर्णयों को लेकर भाट ब्राह्मण कल्याण समिति गिरिपार ने असंतोष व्यक्त किया है। समिति ने इन निर्णयों पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि समाज सुधार के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन विवाह संस्कार संपन्न करवाने वाले ब्राह्मणों की दक्षिणा को लेकर सीमा तय करना उचित नहीं है।

समिति का कहना है कि विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने के प्रयासों का वह सम्मान करती है। समाज में फैली कुरीतियों को दूर करना और फिजूलखर्ची कम करना समय की जरूरत है। हालांकि, समिति ने सवाल उठाया कि यदि विवाह समारोहों में खर्च कम करना ही उद्देश्य है, तो शराब और अन्य महंगे आयोजनों पर भी इसी तरह निर्णय लिए जाने चाहिए।

दक्षिणा श्रद्धा और सामर्थ्य के आधार पर देने की मांग

भाट ब्राह्मण कल्याण समिति गिरिपार ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ब्राह्मणों की दक्षिणा पर सीमा निर्धारित करने के बजाय इसे यजमान की श्रद्धा, सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार तय करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

समिति के अनुसार, यदि कोई ब्राह्मण निर्धारित परंपरा से अधिक दक्षिणा की मांग करता है या उसका आचरण उचित नहीं है, तो यजमान को दूसरे योग्य ब्राह्मण से धार्मिक कर्मकांड करवाने का विकल्प चुनना चाहिए। लेकिन कुछ लोगों के आचरण के आधार पर सभी ब्राह्मणों की दक्षिणा पर सीमा तय करना उचित नहीं है।

शराब और अन्य खर्चों पर भी उठाए सवाल

समिति ने विवाह समारोहों में होने वाले दूसरे खर्चों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बार शराब पर बड़ी रकम खर्च की जाती है। डीजे और अन्य आयोजनों पर भी हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च होने की बात सामने आती है।

समिति का सवाल है कि यदि समाज वास्तव में विवाह समारोहों का खर्च कम करना चाहता है, तो शराब और दूसरे अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

समिति ने कहा कि समाज सुधार का उद्देश्य किसी एक वर्ग को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर अनावश्यक खर्चों और सामाजिक कुरीतियों को दूर करना होना चाहिए।

विवाह संस्कार में ब्राह्मणों की भूमिका का किया उल्लेख

समिति ने कहा कि हिंदू धार्मिक परंपराओं में विवाह संस्कार को विधिपूर्वक संपन्न करवाने में ब्राह्मणों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। विवाह की विभिन्न रस्मों के दौरान मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियां संपन्न करवाई जाती हैं। ऐसे में इस कार्य से जुड़े ब्राह्मणों की भूमिका और सम्मान को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

समिति के अनुसार, दक्षिणा केवल आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि धार्मिक परंपरा में यजमान की श्रद्धा और सम्मान से जुड़ी होती है। इसलिए इस विषय पर निर्णय लेते समय सभी पक्षों की भावनाओं और परंपराओं का ध्यान रखना जरूरी है।

यजमानों से पुनर्विचार करने की अपील

भाट ब्राह्मण कल्याण समिति गिरिपार ने संबंधित यजमानों से अपने फैसलों पर पुनर्विचार करने की अपील की है। समिति का कहना है कि समाज में सुधार के प्रयास आपसी संवाद, सहमति और सभी वर्गों के सम्मान के साथ किए जाने चाहिए।

समिति ने स्पष्ट किया कि वह समाज सुधार के विरोध में नहीं है, बल्कि चाहती है कि विवाह समारोहों में होने वाली फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के साथ-साथ धार्मिक परंपराओं और उनसे जुड़े लोगों के सम्मान का भी ध्यान रखा जाए।

समिति का संदेश है कि समाज सुधार के निर्णय ऐसे होने चाहिए, जिनसे अनावश्यक खर्च कम हों, सामाजिक समरसता बनी रहे और किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।

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