ब्रेन ट्यूमर के मरीजों के लिए बड़ी उम्मीद, PGI चंडीगढ़ में आधुनिक तकनीक से होगा सटीक इलाज

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मॉलिक्यूलर टेस्टिंग, एडवांस्ड इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बीमारी की पहचान और इलाज की योजना बनाने में मिलेगी मदद
देवभूमि न्यूज 24

चंडीगढ़ ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे मरीजों के लिए पीजीआई चंडीगढ़ में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के माध्यम से इलाज को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। अब ब्रेन ट्यूमर के इलाज में केवल ट्यूमर की स्थिति, आकार और सर्जरी ही महत्वपूर्ण नहीं रह गई है, बल्कि ट्यूमर कोशिकाओं में मौजूद मॉलिक्यूलर बदलावों की जांच भी इलाज की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही है।

पीजीआई के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफेसर राजेश छाबड़ा के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर के उपचार का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। अब सर्जरी और रेडियोथेरेपी के साथ आधुनिक इमेजिंग, मॉलिक्यूलर टेस्टिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों को भी चिकित्सा प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। इससे प्रत्येक मरीज की बीमारी की प्रकृति को समझकर उसकी जरूरत के अनुसार उपचार की योजना तैयार करने में मदद मिल रही है।

मॉलिक्यूलर टेस्टिंग से मिलेगी ट्यूमर की सटीक जानकारी

ब्रेन ट्यूमर की पहचान में MRI और अन्य इमेजिंग जांचों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनसे ट्यूमर की स्थिति, आकार और मस्तिष्क के आसपास के हिस्सों पर पड़ने वाले प्रभाव का पता चलता है। वहीं, ट्यूमर के ऊतकों की जांच और मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग से उसकी जैविक प्रकृति को समझने में सहायता मिलती है।

इस प्रक्रिया में IDH म्यूटेशन, MGMT प्रमोटर मिथाइलेशन, 1p/19q को-डिलीशन और BRAF जैसे मॉलिक्यूलर मार्कर महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये मार्कर ट्यूमर के प्रकार की पहचान, बीमारी के संभावित परिणाम और कुछ मामलों में उपचार के विकल्प निर्धारित करने में मददगार होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, IDH म्यूटेशन कुछ प्रकार के ग्लियोमा की पहचान और वर्गीकरण में महत्वपूर्ण है। वहीं, MGMT प्रमोटर मिथाइलेशन से विशेष रूप से ग्लियोब्लास्टोमा के मरीजों में कीमोथेरेपी के संभावित प्रभाव का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है। इसी प्रकार 1p/19q को-डिलीशन कुछ ग्लियोमा के वर्गीकरण में उपयोगी है, जबकि BRAF में होने वाले बदलाव कुछ विशेष ट्यूमर में टारगेटेड थेरेपी की संभावनाएं खोल सकते हैं।

हर मरीज के लिए अलग उपचार योजना पर जोर

ब्रेन ट्यूमर के उपचार में सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और चुनिंदा मामलों में टारगेटेड ट्रीटमेंट का सहारा लिया जाता है। मरीज के लिए कौन-सा उपचार उपयुक्त होगा, यह ट्यूमर के प्रकार, उसकी स्थिति, मॉलिक्यूलर प्रोफाइल और मरीज की संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

इसी कारण आधुनिक चिकित्सा में प्रत्येक मरीज के लिए उसकी बीमारी की विशेषताओं के आधार पर उपचार तय करने पर जोर दिया जा रहा है। मॉलिक्यूलर जांच और एडवांस्ड इमेजिंग से डॉक्टरों को बेहतर चिकित्सकीय निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

AI तकनीक पर भी शोध कर रहा पीजीआई

पीजीआई चंडीगढ़ में ब्रेन ट्यूमर के उपचार के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक इमेजिंग तकनीकों पर भी शोध किया जा रहा है। संस्थान में ड्यूरल-बेस्ड ब्रेन ट्यूमर के मरीजों की इमेजिंग से संबंधित उच्च गुणवत्ता वाला डेटा तैयार करने के लिए ICMR समर्थित परियोजना पर काम चल रहा है।

इस परियोजना का उद्देश्य भविष्य में ऐसे AI आधारित उपकरण विकसित करना है, जो ट्यूमर की पहचान, उपचार की योजना बनाने और बीमारी के संभावित परिणामों का अनुमान लगाने में मदद कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि मॉलिक्यूलर टेस्टिंग, आधुनिक इमेजिंग और AI तकनीक का समन्वय ब्रेन ट्यूमर के उपचार को नई दिशा दे सकता है। हालांकि, किसी भी जांच के परिणामों के आधार पर उपचार का अंतिम निर्णय मरीज की चिकित्सकीय स्थिति और अन्य रिपोर्टों का मूल्यांकन करने के बाद ही लिया जाता है।

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