पंजाब बॉर्डर पर ड्रोन से नशे की तस्करी, 10 महीनों में 1,056 किलो हेरोइन बरामद

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बीएसएफ के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी का दावा, 210 ड्रोन जब्त और 360 तस्कर गिरफ्तार
देवभूमि न्यूज 24
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से नशे के खिलाफ अभियान चलाए जाने के बावजूद सीमा पार से हेरोइन और हथियारों की खेप पहुंचाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के शुरुआती 10 महीनों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने पंजाब बॉर्डर पर 1,056 किलोग्राम हेरोइन बरामद की है। इसे बीएसएफ के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी बताया जा रहा है।

सीमा से सटे कुछ संवेदनशील गांवों में ड्रोन की गतिविधियां लगातार सामने आ रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती यह है कि ड्रोन के माध्यम से गिराई गई खेप को लेने वाले तस्करों तक पहुंचना आसान नहीं हो पा रहा है।

बचीविंड में 13 किलो हेरोइन का पैकेट बरामद

हाल ही में बीएसएफ ने अमृतसर के बचीविंड गांव के क्षेत्र से करीब 13 किलो हेरोइन का एक बड़ा पैकेट बरामद किया। इसमें हेरोइन के 10 छोटे पैकेट बताए गए हैं। इसके अलावा अटारी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट और आसपास के इलाकों में छह-छह किलो वजन के दो पैकेट भी जब्त किए गए।

बरामदगी के बढ़ते आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि वर्ष 2026 में हेरोइन जब्ती का आंकड़ा और बढ़ सकता है। अभी वर्ष के दो महीने शेष हैं।

पिछले साल के मुकाबले बरामदगी में भारी बढ़ोतरी

वर्ष 2025 के दौरान पंजाब के सीमावर्ती जिलों में पूरे साल में लगभग 423 किलो हेरोइन जब्त की गई थी। वहीं, वर्ष 2026 के शुरुआती 10 महीनों में अकेले अमृतसर सीमा क्षेत्र में ही करीब 500 किलो हेरोइन बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

बीएसएफ के अलावा पंजाब पुलिस, काउंटर इंटेलिजेंस, एसएसओसी और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) भी नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं। इन अभियानों में हेरोइन के साथ हथियारों की बरामदगी भी की जा रही है।

10 महीनों में 210 ड्रोन जब्त, 360 तस्कर गिरफ्तार

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 महीनों में सुरक्षा एजेंसियों ने 210 छोटे-बड़े ड्रोन जब्त किए हैं। इसके अलावा बीएसएफ ने अन्य एजेंसियों, विशेषकर एएनटीएफ के सहयोग से 360 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है।

एंटी-ड्रोन सिस्टम की क्षमता बढ़ाने की जरूरत

सीमा पर ड्रोन गतिविधियों को देखते हुए अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक की आवश्यकता महसूस की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों की बैठकों में भी इस विषय पर चर्चा हुई है। इजरायल की एक कंपनी द्वारा निर्मित एंटी-ड्रोन सिस्टम का परीक्षण किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में आधुनिक निगरानी और ड्रोन रोधी प्रणालियों को मजबूत करना जरूरी है, ताकि नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

बीएसएफ जवान की गिरफ्तारी से उठे सवाल

ड्रोन गतिविधियों पर निगरानी से जुड़े एक मामले में बीएसएफ और एनसीबी की कार्रवाई के दौरान कांस्टेबल करणबीर को कथित तौर पर 15 किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किए जाने की खबर ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उसकी निशानदेही पर एक सरपंच की गिरफ्तारी की बात भी सामने आई है। इस घटनाक्रम के बाद सीमा पर तैनात सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सेकेंड लाइन ऑफ डिफेंस मजबूत करने की जरूरत

भारत-पाकिस्तान सीमा पर बीएसएफ के साथ-साथ ग्रामीण पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा के आसपास रहने वाले लोगों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी तथा तस्करी के नेटवर्क की पहचान करना जरूरी है।

अमृतसर का करीब 143 किलोमीटर लंबा क्षेत्र पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है। अटारी, नेष्टा, मुहावा, मोदे, रत्नखुर्द, धनोआ कलां, धनोआ खुर्द, डल्लेके, दाऊके, राजाताल, कक्कड़, कक्कड़ राणियां, बल्लड़वाल और भिंडी सैदां सहित कई सीमावर्ती गांवों में ड्रोन गतिविधियों और नशीले पदार्थों की बरामदगी के मामले सामने आते रहे हैं।

सीमा पर लगातार हो रही बरामदगियों ने स्पष्ट कर दिया है कि नशा तस्करी का नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के सामने गंभीर चुनौती बना हुआ है। ऐसे में केवल खेप बरामद करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि इसके पीछे सक्रिय पूरे तस्करी नेटवर्क की पहचान कर उसे खत्म करना भी जरूरी है।

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