✍️ देवभूमि न्यूज 24
हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और व्रत करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार का व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक व्रत कथा सुनने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं तथा अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। मान्यता है कि सोमवार व्रत कथा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।
सोमवार व्रत की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, किसी नगर में एक धनी साहूकार रहता था। उसके घर में धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने के कारण वह हमेशा दुखी रहता था। संतान प्राप्ति की कामना से वह प्रत्येक सोमवार को व्रत रखता और शिव मंदिर जाकर भगवान शिव तथा माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करता था।
साहूकार की भक्ति देखकर एक दिन माता पार्वती प्रसन्न हुईं। उन्होंने भगवान शिव से साहूकार की मनोकामना पूरी करने का आग्रह किया। इस पर भगवान शिव ने कहा कि संसार में प्रत्येक प्राणी को अपने कर्मों के अनुसार फल भोगना पड़ता है। हालांकि माता पार्वती के बार-बार आग्रह करने पर भगवान शिव ने साहूकार को पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि उसका पुत्र केवल 12 वर्ष तक ही जीवित रहेगा।
साहूकार ने भगवान शिव और माता पार्वती के बीच हुई सारी बातचीत सुन ली। इसके बावजूद उसकी श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई और वह पहले की तरह सोमवार का व्रत तथा शिव पूजन करता रहा।
कुछ समय बाद साहूकार के घर पुत्र का जन्म हुआ। जब बालक 11 वर्ष का हुआ तो साहूकार ने उसे शिक्षा प्राप्त करने के लिए काशी भेजने का निर्णय लिया। उसने अपने साले को बुलाकर बालक को उसके साथ काशी भेज दिया और रास्ते में यज्ञ करवाने तथा ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा देने का निर्देश दिया।
मामा और भांजा रास्ते में विभिन्न स्थानों पर यज्ञ करते और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देते हुए काशी की ओर चल पड़े। रास्ते में एक नगर आया, जहां के राजा की पुत्री का विवाह होने वाला था। जिस राजकुमार से राजकुमारी का विवाह तय हुआ था, वह एक आंख से काना था। राजकुमार के पिता ने इस बात को छिपाने के लिए साहूकार के सुंदर और योग्य पुत्र को दूल्हा बनाने की योजना बनाई।
उसने साहूकार के पुत्र को दूल्हे के वस्त्र पहनाकर राजकुमारी से उसका विवाह करवा दिया। विवाह के बाद उसने उसे धन देकर विदा करने और राजकुमारी को अपने पुत्र के साथ ले जाने की योजना बनाई।
लेकिन साहूकार का पुत्र ईमानदार और सत्यवादी था। उसने राजकुमारी के दुपट्टे पर लिख दिया कि उसका विवाह तो उसके साथ हुआ है, लेकिन जिस राजकुमार के साथ उसे भेजा जाएगा, वह एक आंख से काना है। उसने यह भी लिखा कि वह स्वयं काशी में शिक्षा प्राप्त करने जा रहा है।
राजकुमारी ने जब दुपट्टे पर लिखी बात पढ़ी तो अपने माता-पिता को सारी सच्चाई बता दी। राजा ने अपनी पुत्री को विदा करने से इनकार कर दिया और बारात वापस लौट गई।
इसके बाद साहूकार का पुत्र अपने मामा के साथ काशी पहुंचा। वहां दोनों ने यज्ञ का आयोजन किया और ब्राह्मणों को भोजन करवाया। जिस दिन बालक की आयु 12 वर्ष पूरी हुई, उस दिन भी यज्ञ चल रहा था। कुछ समय बाद बालक ने अपने मामा से कहा कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है। मामा ने उसे अंदर जाकर आराम करने के लिए कहा।
भगवान शिव के वरदान के अनुसार, कुछ ही देर में बालक के प्राण निकल गए। अपने भांजे को मृत देखकर मामा विलाप करने लगा।
उसी समय भगवान शिव और माता पार्वती वहां से गुजर रहे थे। माता पार्वती ने बालक के मामा का विलाप सुनकर भगवान शिव से उसके दुख को दूर करने का आग्रह किया।
भगवान शिव ने बालक को देखकर कहा कि यह उसी साहूकार का पुत्र है, जिसे उन्होंने 12 वर्ष की आयु का वरदान दिया था और अब इसकी आयु पूरी हो चुकी है।
लेकिन माता पार्वती ने करुणा से भरकर भगवान शिव से बालक को पुनः जीवन देने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि पुत्र के वियोग में उसके माता-पिता भी अत्यंत दुखी होंगे। माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने बालक को पुनः जीवन प्रदान कर दिया।
भगवान शिव की कृपा से बालक जीवित हो उठा। शिक्षा पूरी करने के बाद वह अपने मामा के साथ घर लौटने लगा। रास्ते में वे उसी नगर पहुंचे, जहां बालक का विवाह हुआ था। वहां भी उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया। बालक के ससुर ने उसे पहचान लिया और बड़े आदर-सत्कार के साथ महल में ले गए। इसके बाद अपनी पुत्री को उसके साथ विदा कर दिया।
दूसरी ओर साहूकार और उसकी पत्नी अपने पुत्र की प्रतीक्षा में भूखे-प्यासे बैठे थे। उन्होंने प्रण कर रखा था कि यदि पुत्र की मृत्यु का समाचार मिला तो वे भी अपने प्राण त्याग देंगे। लेकिन जब उन्हें अपने पुत्र के जीवित होने और घर लौटने का समाचार मिला तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
उसी रात भगवान शिव ने साहूकार को स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि हे श्रेष्ठी! मैं तुम्हारे सोमवार के व्रत, श्रद्धा और व्रत कथा सुनने से प्रसन्न हुआ हूं। इसी कारण मैंने तुम्हारे पुत्र को दीर्घायु प्रदान की है।
भगवान शिव ने कहा कि जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक सोमवार का व्रत करेगा और इस कथा को पढ़ेगा अथवा सुनेगा, उसके जीवन के कष्ट दूर होंगे और उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
सोमवार व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने, शिवलिंग पर जल अर्पित करने तथा श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन शिव मंत्रों का जाप और सोमवार व्रत कथा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
**हर हर महादेव, ॐ नमः शिवाय **
कथा एवं ज्योतिषीय मार्गदर्शन:
ज्योतिषाचार्य शैलेन्द्र सिंगला, पलवल, हरियाणा
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नारायण सेवा ज्योतिष संस्थान
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