जानें नवंबर के पहले प्रदोष व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और पूजा विधि
देवभूमि न्यूज 24धर्म/संस्कृति*
नवंबर 2026 का पहला प्रदोष व्रत इस बार धनतेरस के दिन मनाया जाएगा। शुक्रवार को पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ-साथ धनतेरस के अवसर पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में धनतेरस और शुक्र प्रदोष का यह संयोग श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
नवंबर 2026 का पहला प्रदोष व्रत कब है?
पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को विद्यमान रहने के कारण इसी दिन शुक्र प्रदोष व्रत रखा जाएगा। Mokshology +1
व्रत की तारीख: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। अलग-अलग शहरों के अनुसार पूजा का समय थोड़ा बदल सकता है।
शिमला के पंचांग के अनुसार प्रमुख समय इस प्रकार हैं:
- प्रदोष पूजा: शाम 5:29 से रात 8:07 बजे तक।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:55 से 5:48 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 बजे तक।
- निशिता मुहूर्त: रात 11:39 से 12:32 बजे तक। Global Panchang +1
धनतेरस पर करें भगवान शिव की आराधना
इस बार धनतेरस और शुक्र प्रदोष का संयोग एक ही दिन बन रहा है। धनतेरस पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, भगवान धन्वंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है। वहीं शुक्र प्रदोष होने के कारण भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना गया है। प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है।
मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष कहा जाता है। श्रद्धालु इस व्रत को परिवार की खुशहाली और मनोकामना पूर्ति के लिए रखते हैं।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करें। शिवलिंग पर जल अर्पित करें और बेलपत्र, धतूरा, पुष्प तथा फल चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें और प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। अंत में भगवान शिव की आरती करके परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें।
।। हर हर महादेव ।। ।। जय माता पार्वती ।।
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