शिमला में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के बाद जनसभा को किया संबोधित, राहुल गांधी और सुक्खू सरकार पर साधा निशाना
*देवभूमि न्यूज 24*
*शिमला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को शिमला में भारतीय जनता पार्टी की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के बाद चौड़ा मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस, राहुल गांधी और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार पर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा की सरकार बनेगी और कांग्रेस सत्ता से बाहर होगी।
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि शिमला में उमड़ा जनसमर्थन प्रदेश में राजनीतिक बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं को अभी से चुनाव की तैयारियों में जुटकर जनता के बीच जाना चाहिए। उन्होंने देवभूमि हिमाचल को नमन करते हुए कहा कि वह मां कामाख्या की धरती असम से देवी-देवताओं की पावन भूमि में आए हैं।
ईवीएम से सत्ता में आई कांग्रेस, अब उसी पर उठा रही सवाल
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए सरमा ने सवाल किया कि जिस ईवीएम प्रणाली के माध्यम से कांग्रेस हिमाचल प्रदेश में सत्ता में आई, उसी मतदान प्रणाली पर अब सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को ईवीएम पर भरोसा नहीं है तो मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह इसी व्यवस्था से मिले जनादेश के आधार पर सरकार क्यों चला रहे हैं।
सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में चुनाव जीतती है तो ईवीएम पर सवाल नहीं उठाती, लेकिन भाजपा की जीत होने पर निर्वाचन आयोग और मतदान प्रक्रिया पर आरोप लगाने लगती है। उन्होंने राहुल गांधी से भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।
एसआईआर को बताया मतदाता सूची की शुद्धता के लिए जरूरी
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूचियों का सही और अद्यतन होना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैला रही है।
उन्होंने कहा कि पात्र भारतीय नागरिकों के मतदान अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए, लेकिन मतदाता सूची में अपात्र नामों की पहचान और नियमानुसार कार्रवाई का विरोध नहीं किया जाना चाहिए। सरमा ने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता जनता का जनादेश है और लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान किया जाना चाहिए।
1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस पर सवाल
हिमंत बिस्वा सरमा ने 1 नवंबर की तारीख का उल्लेख करते हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा हुई थी। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की ऐतिहासिक जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
सरमा ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की बात करने वाली कांग्रेस को अपने इतिहास से जुड़े सवालों का भी जवाब देना चाहिए।
असम में 1.07 लाख नौकरियां देने का दावा, हिमाचल की रोजगार गारंटी पर सवाल
असम और हिमाचल प्रदेश की सरकारों की तुलना करते हुए सरमा ने दावा किया कि असम में भाजपा सरकार ने एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था, जबकि उनकी सरकार के अनुसार लगभग 1.07 लाख युवाओं को रोजगार दिया गया है।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के पांच लाख रोजगार देने के चुनावी वादे पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू से पूछा कि अब तक कितने युवाओं को रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवा रोजगार के अवसरों का इंतजार कर रहे हैं।
सरमा ने यह भी दावा किया कि असम सरकार लगभग सात लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1,250 रुपये की आर्थिक सहायता दे रही है। उन्होंने हिमाचल में महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह देने के कांग्रेस के चुनावी वादे का उल्लेख करते हुए पूछा कि प्रदेश की कितनी महिलाओं को इसका लाभ मिल रहा है।
मतपत्रों से होने वाले चुनावों का हवाला देकर कांग्रेस पर हमला
असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ईवीएम पर सवाल उठाती है, जबकि मतपत्रों से होने वाले चुनावों में भी उसे हार का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के जिला परिषद चुनावों और विभिन्न राज्यों के विधान परिषद चुनावों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि भाजपा ने मतपत्रों के माध्यम से भी चुनावी सफलताएं हासिल की हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक स्थिति और संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए, न कि चुनावी हार के लिए मतदान प्रणाली को जिम्मेदार ठहराना चाहिए।
राम मंदिर और सरदार पटेल का भी किया उल्लेख
सरमा ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर राम मंदिर को लेकर अपना राजनीतिक दृष्टिकोण स्पष्ट नहीं करने का आरोप लगाया।
उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री के चयन से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के संदर्भ में कांग्रेस पर सवाल उठाए। सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के माध्यम से सरदार पटेल के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई।
भाजपा कार्यकर्ताओं से घर-घर जाकर गारंटियों का हिसाब मांगने का आह्वान
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता चुनावी वादों और उनके क्रियान्वयन का मूल्यांकन करती है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर चुनावी गारंटियां पूरी नहीं करने का आरोप लगाते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं से घर-घर जाकर जनता के मुद्दे उठाने और सरकार से वादों का हिसाब मांगने का आह्वान किया।
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रदेश में सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य हिमाचल में सुशासन, विकास और जवाबदेह सरकार स्थापित करना है।
गुरुद्वारा साहिब से चौड़ा मैदान तक निकली पदयात्रा
भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा शिमला के पुराने लोकल बस स्टैंड स्थित गुरुद्वारा साहिब पार्किंग से शुरू हुई। पदयात्रा विक्ट्री टनल और विधानसभा मार्ग से होते हुए चौड़ा मैदान पहुंची, जहां जनसभा आयोजित की गई।
इस दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर, सांसद सुरेश कश्यप, राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार, प्रदेश संगठन महामंत्री सिद्धार्थन सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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