समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे भगवान धन्वंतरि, आयुर्वेद और चिकित्सा के देवता के रूप में होती है पूजा
देवभूमि न्यूज 24
धनतेरस का पर्व केवल धन-संपत्ति और खरीदारी का त्योहार नहीं, बल्कि आरोग्य, सुख-समृद्धि और स्वस्थ जीवन का संदेश देने वाला पावन अवसर भी है। हिंदू धर्म में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। आइए जानते हैं भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य से जुड़ी पौराणिक कथा।
समुद्र मंथन से हुआ भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण देवलोक की समस्त समृद्धि नष्ट हो गई। देवता शक्तिहीन हो गए और असुरों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। परेशान देवता भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे। ब्रह्मा जी उन्हें लेकर भगवान विष्णु के पास गए।
भगवान विष्णु ने देवताओं को समुद्र मंथन के माध्यम से अमृत प्राप्त करने का उपाय बताया। इसके लिए देवताओं और असुरों के बीच समझौता हुआ। मंदार पर्वत को मथनी और वासुकि नाग को रस्सी बनाया गया। भगवान विष्णु ने कच्छप अवतार धारण कर मंदार पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया।
समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले हलाहल विष निकला, जिसकी भयंकर ज्वाला से समस्त संसार संकट में पड़ गया। तब भगवान शिव ने लोक कल्याण के लिए विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। इसी कारण वे नीलकंठ कहलाए।
इसके बाद समुद्र से अनेक दिव्य रत्न प्रकट हुए। अंततः कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को एक दिव्य पुरुष अमृत से भरा स्वर्ण कलश लेकर समुद्र से प्रकट हुए। उनके चार हाथों में अमृत कलश, शंख, चक्र और औषधियां थीं। ये भगवान विष्णु के अंशावतार भगवान धन्वंतरि थे।
आयुर्वेद के जनक हैं भगवान धन्वंतरि
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने संसार को आरोग्य और चिकित्सा ज्ञान का संदेश दिया। उनके प्राकट्य दिवस को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है।
समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत को लेकर देवताओं और असुरों के बीच विवाद हुआ। इसके बाद भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पान कराया।
धनतेरस पर खरीदारी के साथ आरोग्य की पूजा का महत्व
धनतेरस के दिन लोग सोना, चांदी, नए बर्तन, धनिया और झाड़ू सहित विभिन्न वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा कर परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान भी किया जाता है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार पर अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
कहा भी गया है
पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में हो माया।
धनतेरस हमें यह संदेश देता है कि धन-संपत्ति जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन स्वस्थ शरीर से बढ़कर कोई संपत्ति नहीं है। सोना-चांदी और भौतिक वस्तुएं जीवन में सुख-सुविधाएं दे सकती हैं, लेकिन वास्तविक सुख अच्छे स्वास्थ्य में ही निहित है।
आइए, इस पावन धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि से प्रार्थना करें कि सभी के घरों में आरोग्य, सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे तथा प्रत्येक व्यक्ति स्वस्थ एवं मंगलमय जीवन व्यतीत करे।
शुभ धनतेरस! भगवान धन्वंतरि सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।
लेखिका: ममता सक्सेना चित्रांश स्थान: कोसीकलां, मथुरा (उत्तर प्रदेश)
देवभूमि न्यूज 24 | मेरा गांव, मेरा देश निष्पक्ष, निर्भीक और जनहित की पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध।
देश-दुनिया, गांव-देहात की खबरों को पढ़ते रहिए।
समाचार एवं विज्ञापन: 9816216579