रणधीर शर्मा ने भी फैसले का किया स्वागत, कहा- यह किसी एक सरकार की नहीं, सामूहिक प्रयासों की जीत
*देवभूमि न्यूज 24*
शिमला: भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में हिमाचल प्रदेश को उसका लंबित हक मिलने पर नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने इस ऐतिहासिक फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार का आभार जताया। जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के अधिकारों की यह लड़ाई करीब तीन दशक से चल रही थी और इस दौरान प्रदेश में सत्ता में रही सभी सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर मजबूती से पक्ष रखा। इसलिए यह जीत किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन संबंधित राज्य इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। इसके बाद 30 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार ने कैशलेस सेटलमेंट का फार्मूला सुझाकर सहमति बनाने की पहल की, जिससे विवाद के समाधान का रास्ता खुला।
उन्होंने कहा कि संबंधित राज्य हिमाचल की बकाया देनदारी चुकाने के लिए 30 साल का समय मांग रहे थे, लेकिन केंद्र सरकार के प्रयासों से सुप्रीम कोर्ट ने पूरी देनदारी चुकाने के लिए 20 साल की समयसीमा निर्धारित की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान ऐतिहासिक है।
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन दशक की लड़ाई में मिली इस जीत का श्रेय लेने के लिए मुख्यमंत्री जिस तरह राजनीति कर रहे हैं, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
बीबीएमबी फैसले का श्रेय लेने की राजनीति बंद करें सुक्खू : रणधीर शर्मा
शिमला :भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने बीबीएमबी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के हित में आया यह फैसला किसी एक सरकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों से किए गए सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री को इस उपलब्धि का एकतरफा श्रेय लेने की राजनीति बंद करनी चाहिए।
शुक्रवार को शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में रणधीर शर्मा ने कहा कि बीबीएमबी का मामला वर्ष 1996 से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था। इस दौरान प्रदेश की अलग-अलग सरकारों ने हिमाचल के अधिकारों की पैरवी की। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शांता कुमार के प्रयासों से वर्ष 1990 में जलविद्युत परियोजनाओं में 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली का अधिकार मिला था। बीबीएमबी मामले में 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी का फैसला भी प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है।
रणधीर शर्मा ने पीटरहॉफ अतिथिगृह को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड पर देने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने आपदा राहत राशि के इस्तेमाल को लेकर सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उनका दावा था कि केंद्र सरकार ने विभिन्न मदों में हिमाचल को हजारों करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है।
उन्होंने मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्रों के दौरों और वहां की जा रही घोषणाओं पर भी सवाल उठाए। रणधीर शर्मा ने इन्हें राजनीतिक नाटक करार देते हुए कहा कि जब सरकार के पास सड़कों की मरम्मत करवाने, एचआरटीसी बसों के टायर बदलने और विधायकों को विधायक निधि जारी करने के लिए पर्याप्त बजट नहीं है, तो नई घोषणाओं को पूरा करने के लिए पैसा कहां से आएगा?
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