देवभूमि न्यूज 24
कोसीकलां (मथुरा)। दीपावली भारत के प्रमुख एवं लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। इसे दीपों का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन घर-घर दीपमालाएं सजाई जाती हैं और चारों ओर प्रकाश एवं खुशियों का वातावरण बन जाता है। अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक यह पर्व हमें जीवन में सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणा देता है।

यह विचार ममता सक्सेना चित्रांश ने अपने लेख ‘दीपमाला घर-घर उजाला : दीपावली’ के माध्यम से व्यक्त किए हैं। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद जब अयोध्या लौटे थे, तो अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में दीप जलाकर खुशियां मनाई थीं। तभी से दीप जलाने की परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है।
दीपावली के अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, रंगोली सजाते हैं, नए वस्त्र पहनते हैं और एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर त्योहार की खुशियां साझा करते हैं।

ममता सक्सेना चित्रांश के अनुसार, दीपावली केवल घरों में दीप जलाने का त्योहार नहीं, बल्कि मन के अंधकार को मिटाने का भी पर्व है। हमें अपने भीतर से अहंकार, द्वेष, क्रोध और ईर्ष्या जैसी बुराइयों को दूर कर प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाना चाहिए। जिस प्रकार एक छोटा-सा दीपक अंधकार को दूर करता है, उसी प्रकार हमारा छोटा-सा अच्छा प्रयास भी किसी के जीवन में खुशियां ला सकता है।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि दीपावली पर पटाखों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए तथा जरूरतमंद और गरीब लोगों की मदद कर त्योहार की खुशियां उनके साथ भी बांटनी चाहिए। सच्ची दीपावली तभी सार्थक होगी, जब समाज के प्रत्येक घर में खुशहाली और हर व्यक्ति के जीवन में उजाला हो।
लेखिका : ममता सक्सेना चित्रांश
निवास : कोसीकलां, जिला मथुरा (उत्तर प्रदेश)
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