जल, जंगल, जमीन का समुचित दोहन ना होने से हिमाचल प्रदेश में विद्युत उत्पादन समृद्ध राज्य का सपना साकार नहीं!
-राजीव शर्मन्
देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना (हि. प्र)
हिमाचल प्रदेश में विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाने की अपार संभावनाएं व्याप्त है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश समूचे भारतवर्ष का एक मात्र राज्य है जो कि अपनी प्राकृतिक क्षमता का समुचित दोहन करके एक अद्वितीय विद्युत उत्पादन समृद्ध प्रदेश बन सकता है।
यहां पर जल, जंगल जमीन का समुचित दोहन आज भी साकार नहीं किया जा सका है।
इस बारे अपने विचार सांझा करते हुए समाज सेवी एवं सोशल मीडिया एक्टीविस्ट राजीव शर्मन् ने खुलासा किया है कि हिमाचल प्रदेश में विद्युत उत्पादन की क्षमता बढ़ाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। आज भी हिमाचल प्रदेश मात्र शानन विद्युत उत्पादन और भाखड़ा बांध जो कि पंजाब के अधिकार क्षेत्र में सपुर्द हो चुका है।
हिमाचल प्रदेश आज भी अपने विद्युत उत्पादन क्षमता के कारण भी काफी पीछे चल रहा है। अपनी बिजली-पानी की रायल्टी हासिल करने के लिए भी एक मुश्त लाभकारी योजना साकार नहीं कर पाया है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश को भागीरथी प्रयत्नों को हर सम्भव साकार करा अमली जामा पहनाने की नितांत आवश्यकता है।
सर्वप्रथम जल जंगल जमीन का समुचित दोहन करने के लिए जिला मंडी से अनवरत बहती आ रही व्यास नदी को कुन्नतर नामक स्थान पर बांध बनवाने की योजना को प्राथमिकता के आधार पर साकार करवाने की आवश्यकता है। इसके लिए सर्वप्रथम विभिन्न खड्डों का पानी तुंगल घाटी कोटली के रछौड़ा खड्ड में रछौड़ा नामक गांव में झील निर्माण में सहायक खड्डों का जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के साथ साथ कुन्नतर व्यास नदी में बांध बनवाने की आवश्यकता पर पुरजोर बल लगाकर इस बहुआयामी कायाकल्प के विद्युत उत्पादन के बांध को साकार करवाने की विकासोन्मुखी योजना को प्राथमिकता के आधार पर साकार करवाना चाहिए।
यही नहीं हिमाचल प्रदेश के अन्य जिलों जहां पर सतलुज,रावी,व्यास की सहायक उप-नदियों और खड्डों का समुचित भंडारण एवं दोहन विद्युत उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में बांधों का निर्माण किया जाना प्रासांगिकता लिए हुए है। अतः अब समय आ गया है जब हिमाचल प्रदेश को विद्युत उत्पादन हेतु अतिरिक्त बांधों को साकार करवाना समय की पुकार है।
हिमाचल प्रदेश की विभिन्न सरकारों ने जल, जंगल जमीन के समुचित दोहन के अभाव में इस बारे कारगर और सटीक अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है।
हिमाचल प्रदेश को दिल्ली राज्य का अनुसरण भी करना चाहिए। दिल्ली सरकार जल के अभाव में भी वहां पर रिकार्ड समय में मानव निर्मित रोहणी झील को साकार करने जा रही है जबकि हिमाचल प्रदेश इस मामले में फिसड्डी है। हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना में सोमभद्रा-स्वां नदी जल भंडारण का प्राकृतिक जल स्रोतों का भंडार है। आज भी बहुत दशकों से सोमभद्रा-स्वां नदी पर अरबों-खरबों रुपए व्यय करके तटीयकरण करने के बावजूद भी इसे झील निर्माण करवाने अथवा तटबांध बनवाने का समुचित दोहन नहीं किया जा सका है। राजीव शर्मन् ने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश में झीलों और बांधों को साकार करने की बहुआयामी कायाकल्प की योजनाओं को क्रियान्वित करने का बहुविधि सार्थक प्रयास करना होगा। हिमाचल प्रदेश को आर्थिक तौर पर आत्म निर्भर बनाने में इन झीलों और बांधों की कारगर भूमिका सिद्ध हो सकती है।
राजीव शर्मन् ने केन्द्र सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार को शीघ्रातिशीघ्र जनहित में प्रदेश में जल, जंगल और जमीन के समुचित दोहन से झीलों और बांधों के निर्माण की बहुआयामी योजनाओं को क्रियान्वित करने का पुरजोर आग्रह किया है। उन्होंने दावा किया है कि हिमाचल प्रदेश इन प्राकृतिक झीलों और बांधों के बलबूते एक आर्थिक सम्पन्नता वाला राज्य बन सकता है। राजीव शर्मन् ने दोहराया कि जिला मंडी के कुन्नतर बांध और जिला ऊना में सोमभद्रा-स्वां नदी झील निर्माण से इस कार्य का श्री गणेश कर दिया जाना चाहिए।