प्रधानमंत्री का कोरोना वायरस महामारी-महायुद्ध विजेता बतौर हार्दिक अभिनन्दन एवं साधुवाद

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प्रधानमंत्री का कोरोना वायरस महामारी-महायुद्ध विजेता बतौर हार्दिक अभिनन्दन एवं साधुवाद

देवभूमि न्यूज डेस्क
राजीव शर्मन्

मुझे खबरीलाल बनने से पहले कोरोना वायरस महामारी-महायुद्ध से निजात दिलाने व सकल मानवता की कल्याणार्थ और सुरक्षा हेतु परम आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी का दिल की गहराइयों से बहुत बहुत साधुवाद अदा करने में कोई झिझक अथवा भय नहीं है।
इस वैश्विक महामारी में प्रधानमंत्री ने देशवासियों को बचाया है तथापि संभावित चौथी लहर में भी उनकी दृढ़ता पर कोई संदेह नहीं है।

कोरोना वायरस महामारी-महायुद्ध ने भारत के अस्पतालों का कायाकल्प,बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाओं व राष्ट्रीय सहकारिता हेतु सकल मानवता को बिवश कर दिया। अभी सरकार के कठोर निर्णयों की अनुपालना का समय है।

कोरोनावायरस महामारी-महायुद्ध भारत में जहां नरसंहार से भीषण तांडव कर चुका है वहीं इस वैश्विक महामारी ने भारत के विभिन्न अस्पतालों का कायाकल्प करा एक जबरदस्त सुधारवादी प्रक्रिया का भी सूत्रपात किया है। पिछले पंद्रह महीनों में भारत के विभिन्न राज्यों के हजारों जिलों व ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की महाक्रांति लाने का सद् प्रयासों का शंखनाद कर दिया है। आजादी के बाद पहली बार इस वैश्विक महामारी ने भारत को किसी भी आपदा प्रबंधन से महायुद्ध करने का ऐतिहासिक व कटु प्रशिक्षण दिया है।
ऐतिहासिक त्रासदी ने जहां लाखों लोगों को अकाल मृत्यु का ग्रास बनाया वहीं पर इस वैश्विक महामारी ने भारत को राष्ट्रीय सहकारिता का नया मूल मंत्र भी दिया है। हालांकि अभी भी हजारों अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमियां हैं किन्तु आम जनता जनार्दन व स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से सैनीटाईजर, मास्क,कोरोना किट,ओक्सीमीटर, आक्सीजन सिलेंडर की भरपाई युद्ध स्तर पर उपलब्ध करवाई जा रही है। गांव व शहरों को कोरोना मुक्त करने हेतु कोरोना वारियर्स सैनेटाईजर छिड़काव जारी रखें हुए हैं।
विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं ने इस दौरान गरीब लोगों के पुनर्वास, भोजन, आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं के साथ साथ इस महामारी में जान गंवाने वाले मृतकों के दाह संस्कार का भी प्रबंधन करा एक राष्ट्रीय सहकारिता का नया मार्ग प्रशस्त करवाया है। यह एक मानवतावादी दृष्टिकोण का एक अलौकिक जागरण समूचे भारतवर्ष में देखने को मिला है।
भारत के राष्ट्रीय क्षितिज पर करोड़ों कोरोना वारियर्स विना किसी प्रयोजन के रात दिन पीड़ित मानवता की अथक सेवा में आखरी सांस तक डटे रहे हैं। इस राष्ट्रीय सेवा में स्वास्थ्य विभाग के डाक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने जीवन की भी आहुति देने से भी पीड़ित मानवता सेवार्थ कदम पीछे कदापि नहीं हटाये। यह भारत की महान राष्ट्रवादी सहकारिता का प्रमाण है।
भविष्य में भारत तीसरी कोरोना वायरस महामारी-महायुद्ध की लहर का डटकर मुकाबला करने की तैयारियों में युद्ध स्तर पर रात दिन कार्यप्रणाली को सर-अंजाम दे रहा है।
ऐसे में हम आम नागरिकों को भी कोरोना वायरस महामारी-महायुद्ध में ऐहतियातन प्रबंधन से निजात दिलाने हेतु आवश्यक कोरोना प्रोटोकॉल का मन क्रम वचन वाणी से निर्वहन करने पर कठोर अनुशासन पालन करना ही राष्ट्रीय कर्तव्य बनता है।
हमें अटल विश्वास है कि शीघ्रातिशीघ्र चंद महीनों में ही कोरोना वायरस महामारी-महायुद्ध का भारत से समूलनाश हो जायेगा।
निराश्रितों को आ‌श्रय देना, कोरोना वायरस पीड़ितों को भोजन व्यवस्था एवं जान गंवाने वाले भारतवासियों के दाह संस्कार की समुचित व्यवस्था आज की मूलभूत जिम्मेदारी है। भारत के लाखों गांवों की पंचायतीराज संस्थाओं ने भी इस महायुद्ध में मोर्चा संभाला हुआ है।
हमें हर स्तर पर पंचायती राज संस्थाओं के विभिन्न प्रतिनिधियों का इस राष्ट्रीय यज्ञ में सहकारिता से एक आदर्श नागरिक के तौर पर अपना कर्तव्य निर्वहन करना है।
एक अपील व्यापारिक संस्थानों से जुड़े व्यापारियों से भी है क्योंकि सबसे ज्यादा लाकडाऊन के चलते उन्हें आर्थिक कंगाली का भी सामना करना पड़ा है। आशा है वह भविष्य में इस आर्थिक विषमताओं से उभर जायेंगे। यह बहुत ही विकट आर्थिक आपातकाल का सभी छोटे बड़े व्यवसायियों को कड़वा घूंट पीना पड़ा है।
अतः शीघ्रातिशीघ्र सब कुछ सामान्य होने तक अभी तक धैर्य रखना एक बहुत बड़ी महाचुनौती है।
ऐसे में हम सभी नागरिकों को अपनी अपनी सामर्थ्य से इस महासंग्राम में जीत सुनिश्चित करने की दिशा में ही आगे बढ़ना भारत की जीत और कोरोनावायरस महामारी की हार निश्चित तौर पर होगी। वशर्तें यह समय भारत सरकार व राज्य सरकार के कठोर निर्णयों की अनुपालना का ही समय है। बस बचाव में ही बचाव है। इस समय भारत को कोरोनावायरस महामारी-महायुद्ध की चौथी लहर का खतरा मंडराता नजर आ रहा है। राजधानी दिल्ली में एकाएक कोरोना मामलों में वृद्धि इसका स्पष्ट संकेत है। आशा की जानी चाहिए कि सारा देश इससे सुरक्षात्मक उपाय से उभरने और सकल जगत को भी संरक्षण दिलाकर अपने स्वर्णिम देश और विश्व बंधुत्व का गुरू देश होने की प्रमाणिकता पुनः सिद्ध करने वाला है।