रिवालसर झील हिंदू-सिक्ख-बौद्धौं का त्रिवेणी धार्मिक महासमागम का प्रतीक।

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रिवालसर झील हिंदू-सिक्ख-बौद्धौं का त्रिवेणी धार्मिक महासमागम का प्रतीक।

देवभूमि न्यूज डेस्क
मंडी

प्राचीन श्री मांडव्य नगर जनपद श्री छोटी काशी जिला मंडी से 22 किलोमीटर दूर स्थित श्री लोमश ऋषि नगर रिवालसर झील को भारत के हिन्दू-सिक्ख-बौद्धौं का धार्मिक त्रिवेणी महासमागम माना जाता है। कहते हैं कि बौद्ध धर्म के प्रवर्तक अनुयायियों में लोमश ऋषि ने यहां कठोर तपश्चर्या की थी। प्राचीन श्री मांडव्य नगर जनपद के रियासती राजाओं की पहली धार्मिक आस्था का महातीर्थ रिवालसर झील रही है। इस स्थल को भारत के धार्मिक, सांस्कृतिक पर्यटन आदान-प्रदान का पर्याय बनवाने में तत्कालीन शासकों ने अभूतपूर्व सुधारात्मक योगदान किया है। वर्तमान में रिवालसर झील एक बहुत बड़ा धार्मिक सांस्कृतिक पर्यटन का महासमागम है। यहां पर साल में पूरा वर्ष धार्मिक महामेला नित्य प्रति ही लगा रहता है।
रिवालसर झील में हिंदू देवी-देवताओं के मंदिर, सिक्ख गुरुद्वारा एवं लोमश ऋषि का भव्य मंदिर धार्मिक पर्यटक श्रद्धालुओं का मन मोह लेता है। रिवालसर झील की मछलियों का विशेष आकर्षण है। वर्तमान में इन मछलियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नगर निगम रिवालसर ने विशेष प्रबंधन किया है।
लोगों की इस स्थल से अटूट श्रद्धा हजारों सालों से पूर्ववत जुड़ी रही है तथापि कालांतर में यह स्थल त्रिवेणी धार्मिक महासमागम होने से धार्मिक सांस्कृतिक पर्यटन आदान-प्रदान सुनिश्चित करवाने का पर्याय बन चुका है।
वर्तमान में यह अत्यंत महत्वपूर्ण एवं विचारणीय है कि मंडी जिला मुख्यालय से रिवालसर झील को जाने वाला मार्ग आज भी सैंकड़ों सालों से यथावत संकरा है जो कि यातायात के लिए महाबाधा बना हुआ है। तीखे मोड़ आज भी विभिन्न दुर्घटनाओं को न्योता देते रहते हैं। अतः हिमाचल प्रदेश सरकार को रिवालसर झील-मंडी के संकरे मार्ग के चौड़ीकरण को तत्काल प्रभाव से अमली जामा पहनाने की तत्काल आवश्यकता है। इस मार्ग को विकसित करवाने से निश्चित तौर पर रिवालसर झील मंडी के धार्मिक सांस्कृतिक पर्यटन आदान-प्रदान को चार चांद लग जायेगें।

राजीव शर्मन्