जिला ऊना की नई नगर पंचायत अम्ब में बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना होगा।

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जिला ऊना की नई नगर पंचायत अम्ब में बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना होगा।

देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना

जिला ऊना के अम्ब उपमंडल तहसील मुख्यालय में एक नई नगर पंचायत अस्तित्व में आई है।
नई नगर पंचायत अम्ब का गठन को एक साल व्यतीत होने के बाद कभी नहीं लगा है कि सचमुच इतने बड़े अम्ब उपमंडल में नगर पंचायत गठित हो गई है।
सर्वप्रथम नगर पंचायत में होने वाले इसके अधिकार क्षेत्र के अनिवार्य और ऐच्छिक कार्यों का सविस्तार आंकलन होना चाहिए।
अनिवार्य कार्यों में सफाई व्यवस्था आलम बहुत निराला है। नवगठित नगर पंचायत अम्ब को नौ वार्डों में विभक्त किया गया है।
नगर पंचायत अम्ब ने घर द्वार से कूड़ा कर्कट एकत्रीकरण का माहवार ठेका दिया है। इसकी एवज में हर वार्ड के आम जनसाधारण से पचास रूपए की राशि प्रत्येक मकान से आंगनवाड़ी हैल्थ वर्कर के माध्यम से बसूल की जा रही है।
ठेकेदारी पर रखे गए सफाई कर्मचारी कभी भी समयानुसार कूड़ा कर्कट एकत्रीकरण में नहीं आते हैं। नतीजतन सरकारी नौकरी पेशा लोगों को तो नौ बजे सुबह घर से अपने गंतव्य कार्यस्थल पर पहुंचना होता है।
ऐसे में वह अपने घर का मुख्य द्वार बंद करके घर निकल जाते हैं। गाहे-बगाहे अगर कूड़े की बाल्टी बाहर रह जाये तो रविवार को कूड़ा-करकट एकत्रीकरण कर्मचारियों का अवकाश रहता है।
ऐसे में गर्मियों में गलने सड़ने वाले दुर्गंधयुक्त फल सब्जियों के छिलकों को कूड़ा-करकट ढेर पर फैंक दिया जाता है। वार्ड नम्बर एक से नौ वार्डों के सभी लोगों ने बतलाया कि कभी भी सफाई कर्मचारी घर द्वार से कूड़ा कर्कट एकत्रीकरण को समयानुसार नहीं आते हैं।
ऐसे में ठेकेदारी पर रखे गए सफाई कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगना लाजमी है ?

यह सर्वविदित है कि नगर पंचायत के अस्तित्व में आने के बाद भी बिजली व्यवस्था का तो आलम बेहद निराला है। वार्ड नम्बर आठ के लोगों ने बतलाया कि पिछले एक साल से उनकी स्ट्रीट लाइट खराब चल रही है। वार्ड पंच से सम्पर्क साधा गया तो कहा कि पुरानी लाईट को ठीक करवाया जायेगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि कभी नई लाईटों के आने का हवाला दिया जाता है तो कभी कहा जाता है कि पुरानी लाईट को ठीक करवाया जायेगा। अब नगर पंचायत की प्रधान महोदया अथवा वार्ड पंच ही बेहतरीन बता सकते हैं कि यह नई लाईटों अथवा पुरानी लाईटों को कब ठीक करवाया जायेगा?
आवारा पशुओं का अतिक्रमण इतना बढ़ चुका है कि लोगों का चलना फिरना मुहाल हो गया है। आवारा सांडों ने तो समूचे अम्ब उपमंडल में लोगों को आतंकित कर रखा है। इसी तरह आवारा कुत्तों ने भी लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। पिछले साल बरसात की उगी झाड़ियों को देख कर लगता है कि सफाई व्यवस्था का यहां कोई समुचित प्रबंधन नहीं है। बरसात का मौसम आने वाला है और लोगों को इस बार भी वार्ड नम्बर आठ-नौ से रेलवे स्टेशन की ओर जाने पर झाड़ियों में छिपे विषधर सांपों से बचाना होगा?
प्रोफेसर कालोनी अम्ब का लिंक रोड रेलवे स्टेशन से जस का तस कच्चा और कीचड़ से सना हुआ है। उसको अभी तक पक्का नहीं करवाया जा सका है। इसी लिंक रोड पर रेलवे का बड़ा नाला भी खुला है। इसमें भी कोई भी राहगीर, साईकिल स्कूटर मोटरसाइकिल सवारों के गिरने का भय लगा रहता है। यहां से थोड़ी सी चूक यमपुरी का रास्ता दिखा सकती है क्योंकि मस्जिद के सामने का रास्ता कच्चा और रेलवे लाईन से सटा हुआ विना किसी रेलिंग से रेलगाड़ियों के गुजरने से जनसाधारण के लिए बेहद ख़तरनाक सिद्ध हो सकता है।
अब यह नगर पंचायत अम्ब की प्रधान महोदया अथवा विभिन्न वार्डों के चुनें हुए वार्ड मेम्बर बेहतरीन तरीके से बतला सकते हैं कि अम्ब उपमंडल तहसील मुख्यालय की नई नगर पंचायत में कौन कौन से अनिवार्य और ऐच्छिक कार्यों का सम्पादन किया जा रहा है?
वार्ड नम्बर तीन, चार और पांच के पुराने मकान गलियों में गिरने के कगार पर है। लोगों की सुरक्षा के लिए यह बहुत बड़ी चूक और बेहद ख़तरनाक हादसे का सबब बन सकती है। एक दीगर बात यह भी है कि टाऊन एंड कंट्री प्लानिंग की समुचित व्यवस्था का पालन ना करके धड़ाधड़ निर्माण कार्य हो रहे हैं। ऐसे में जिला प्रशासन ऊना, स्थानीय एस डी एम अम्ब और नगर पंचायत अम्ब को लोगों को यथोचित राहत दी जानी चाहिए ताकि उनके रास्तों का अतिक्रमण ना हो सके।
इसी तरह अनिवार्य और ऐच्छिक कार्यों के अन्तर्गत पुराने बिजली के खंभों और बेवजह लटकती तारों से भी निजात दिलवाई जानी चाहिए। अम्ब उपमंडल तहसील मुख्यालय के वार्ड नम्बर सात आठ और नौ के बच्चों के लिए वार्ड नम्बर आठ में उपलब्ध कृषि विभाग की जमीन पर एक दशक से बच्चों का पार्क बनवाने की यथोचित मांग को भी पूरा करके अमली जामा पहनाया जाना चाहिए। रेलवे चौराहे पर एक बड़ा चौक व समुचित लाईटों का भी प्रबंधन किया जाना चाहिए ताकि यातायात की व्यवस्था बहाल रखी जा सके। अतः नई नगर पंचायत अम्ब को शीघ्रातिशीघ्र विभिन्न अनिवार्य और ऐच्छिक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करवाने की यथासंभव जुगत भिड़ाई जानी चाहिए।
*राजीव शर्मन*