मंडी जिला के शनोर घाटी के भटवाड़ पंचायत में भव्य गणपति मंदिर का निर्माण।

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मंडी जिला के शनोर घाटी के भटवाड़ पंचायत में भव्य गणपति मंदिर का निर्माण।

देवभूमि न्यूज डेस्क
मंडी

हिमाचल प्रदेश में देवी-देवताओं के भव्य रथों के श्रृंगार के साथ साथ यहां पर देवी-देवताओं के मंदिर भी धार्मिक श्रद्धालुओं की भक्ति की अगाध प्रगाढ़ता का केंद्र है। शनोर घाटी के भटवाड़ पंचायत का गणपति रथ सैंकड़ों साल पुराना है। इसी तरह अब यहां पर भव्य गणपति मंदिर का भी निर्माण किया गया है। इसमें स्थापित की गई सौम्म गणपति प्रतिमा दर्शन से भक्त अपने को कृत कृत कर रहे हैं। जिला मंडी के श्री सिद्ध गणपति मंदिर की प्रतिमा जो कि सत्रहवीं शताब्दी में राजा सिद्ध सेन द्वारा स्थापित होने के बाद शनोर भटवाड़ गांव में स्थापित यह दिव्य प्रतिमा दर्शन निहाल करने वाली है।
द्रंग विधानसभा क्षेत्र के इलाका शनोर की भटवाड़ी पंचायत में नव निर्मित देव गणपति महराज मंदिर की प्रतिष्ठा के इस शुभ अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ठाकुर कौल सिंह विशेष तौर पर शामिल हुए।
पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह अपने दलबल के साथ देव गणपति मंदिर की प्रतिष्ठा में शामिल हुए।
पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने सुबह 11:30 बजे मंदिर में पहुंच कर शीश नवाजा और गणपति महाराज का आशीर्वाद लिया।
देव गणपति महाराज के नवनिर्मित मंदिर की प्रतिष्ठा में हजारों लोगों ने अपनी हाजरी भरी।
मंदिर का निर्माण लकड़ी तथा पत्थर से किया गया है ।
लकड़ी की काष्ठ कला की खूबसूरत निकाशी कर्नाटक से आए हुए एक दर्जन मित्रियों द्वारा लगातार पांच सालों में पूरा किया है । मंदिर में लगे पथरों को राजस्थान से लाया गया है ।
माह की दाल तथा चुने से पथरों की चिनाई की गई गई।

द्रंग विधानसभा क्षेत्र के इलाका शनोर की भटवाड़ी पंचायत में नव निर्मित देव गणपति महराज मंदिर की प्रतिष्ठा के इस शुभ अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ठाकुर कौल सिंह विशेष तौर पर शामिल हुए।
पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह अपने दलबल के साथ देव गणपति मंदिर की प्रतिष्ठा में शामिल हुए।
पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने सुबह 11:30 बजे मंदिर में पहुंच कर शीश नवाजा और गणपति महाराज का आशीर्वाद लिया।
देव गणपति महाराज के नवनिर्मित मंदिर की प्रतिष्ठा में हजारों लोगों ने अपनी हाजरी भरी।
मंदिर का निर्माण लकड़ी तथा पत्थर से किया गया है ।
लकड़ी की काष्ठ कला की खूबसूरत निकाशी कर्नाटक से आए हुए एक दर्जन मित्रियों द्वारा लगातार पांच सालों में पूरा किया है । मंदिर में लगे पथरों को राजस्थान से लाया गया है ।
माह की दाल तथा चुने से पथरों की चिनाई की गई है।
-राजीव शर्मन्