जिला ऊना का प्राचीन रियासत कालीन श्री गौरी गंगा महादेव मन्दिर

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जिला ऊना का प्राचीन रियासत कालीन श्री गौरी गंगा महादेव
मन्दिर

देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना

जिला ऊना के अम्ब उपमंडल तहसील मुख्यालय का श्री गौरी गंगा महादेवन मंदिर पांडवकालीन एवं अम्बिकानगर-अम्ब प्राचीन रियासत कालीन श्री छोटा हरिद्वार उपनाम से प्रसिद्ध है।
लोगों की आज भी यही अवधारणा है कि यहां पर ही श्री छोटा हरिद्वार माना जाता है। यहां श्री गौरी कुंड है, जहां पर आज भी पार्वती माता जी स्नान के लिए आती है। यही नहीं द्वापुर युग में भगवान श्री कृष्ण जी ने जंगलों में गऊओं को चराया था। आज भी प्राचीन सरोवर गौर खड्ड समीप स्थित है जिसे स्थानीय लोक प्रचलित भाषा में कपिला सरोवर कहा जाता है।
पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान खीर गंगा लोहारा,अंबिकानगर-अंब ऊना-हिमाचल में श्री सिद्ध गुफा का निर्माण करवाया था।प्राचीन पांडवकालीन गौरी-गंगा महादेव लोहारा गांव में उपमंडल अंबिकानगर-अंब से 10 कि0मी0 की दूरी पर चीड़ के घने जंगल में स्थित है।लोक प्रचलित मान्यतानुसार यहाँ गौरी-गंगा महादेव के सन्निकट एक खड्ड जहाँ वर्तमान में भी बहती है,यहाँ स्थानीय किंवदंतीनुसार इसे खीर-गंगा के नाम से जाना जाता है। संभवतः पांडवों ने अपने बनवास के अज्ञातवास में इस मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर में स्थापित नंदी बैल की मूर्ती का दर्शन करने से मालूम पड़ता है कि यह मंदिर हजारों साल पहले बनवाया गया था। स्थानीय ग्रामीण मंदिर समीप शमशानघाट में मृतकों की अंत्येष्टि भी यहीं करते हैं। महाकाल क्षेत्र होने से दिन में भी इस स्थल का वातावरण। भयावह प्रतीत होता है। मंदिर परिसर में लेखाकार को ग्रामिणों ने बतलाया कि गौरी -गंगा और गौर खड्ड जिसे खीर गंगा के नाम से भी जाना जाता है यहां स्वयं पार्वती माता स्नान करने आती रहती हैं। जिन कन्याओं की शादी नहीं होती उनके लिये विवाह-बाधा दूर करवाने का यह सिद्ध तीर्थ स्थल भी माना जाता है।मंदिर परिसर की कुटिया में अलौकिक चमत्कारी महात्मा महंत श्री 1008 श्री गुरशरण जी इस तीर्थ स्थल में आठ पहर चौंसठ घड़ी विराजमान रहते हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता हैं। यहां रूद्राभिषेक करने का अनंतगुणा फल मिलता हैं। यहाँ महाकाल का अखंड दीपक प्रज्वलित रहता है। यह पापनाशक और अरिष्टनाशक माना जाता है। यह स्थल नवग्रह शांति के लिये भी प्रभावी है। विशेषकर शनि साढ़ेसाती,ढैय्या, मार्केश के लिये भी प्रशस्त माना गया स्थल है। अधिकांशतः वाहनों को दुर्घटनाओं से बचाव हेतु भी यहाँ लाया जाता है। जिला ऊना-हिमाचल के अतिरिक्त बाहर से भी श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर यहाँ अवश्य ही आते रहतें हैं।लोहारा के शास्त्री रजनीश ने इस स्थल को आध्यात्मिक,आधिभौतिक,आधिदैविक को शांति प्रदायक बतलाया है। यह गौरी-गंगा मंदिर मुख्य सड़क मार्ग से सटा है किंतु मंदिर तक जाने का रास्ता ठीक नहीं है। इससे श्रद्धालुओं को आने-जाने में भारी दुविधा का सामना करना पड़ता है। स्थानीय ग्रामवासियों नें उपायुक्त जिला ऊना व एस0 डी0 एम0 अम्ब से माँग भी की है कि गौरी-गंगा महादेव का रास्ता और प्राचीन शमशानघाट की दशा तत्काल ही सुधारी जाये। भारत सरकार के पुरातत्व विभाग को भी पांडवकालीन प्राचीन गौरी-गंगा महादेव मंदिर को पूर्ण संरक्षण दिलवाकर ऐतिहासिक धार्मिक-सांस्कृतिक,पर्यटन धरोहर को सुरक्षित करवाना चाहिये।
राजीव शर्मन