हिमाचल प्रदेश की देव भूमि का नैसर्गिक सौंदर्य एवं स्वर्ग श्री कमरूनाग झील -राजीव शर्मन

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हिमाचल प्रदेश की देव भूमि का नैसर्गिक सौंदर्य एवं स्वर्ग श्री कमरूनाग झील -राजीव शर्मन

देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना

हिमाचल प्रदेश देवी-देवताओं की पुन्य भूमि है। यहां पर देवी-देवताओं के असंख्य भव्यों मंदिरों के साथ साथ बहुत सारी झीलें भी है। हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी में बड़ा देव कमरूनाग झील,श्री पराशर ऋषि झील,श्री लोमश ऋषि रिवाल्सर झील प्रमुख हैं। बड़ा देव कमरूनाग जी का संबंध महाभारत कालीन से जुड़ा हुआ है। कहते हैं कि रत्न जच्छ का जब युद्ध में सिर धड़ से अलग हो गया तो उन्होंने जग चक्र काल चक्र और युग चक्र एक साथ घुमाने वाले अखिलात्मा भगवान श्री कृष्ण जी से सारा महाभारत देखने की इच्छा प्रकट की थी। इसी के अनन्तर श्री कमरूनाग जी को जोड़ा जाता रहा है। कहते हैं कि राजा वभ्रुवाहन ही श्री बड़ा देव कमरूनाग जी हैं जो हजारों सालों से अजर अमर होकर तपस्यारत हैं। कमरूनाग झील के बारे में भी असंख्य रहस्य जुड़े हुए हैं। कहते हैं कि एक ब्रिटिश शासक ने देखा कि भारी संख्या में आभूषण जेवरों और भारतीय मुद्रा के नोटों से झील भरी हुई है। अक्सर झील के चारों ओर लोगों द्वारा श्रद्धानुसार चढ़ाये गये नोट भी तैरते रहते हैं। उनको किसी ने भी भारी अनिष्ट घटित होने की आंशका से कभी नहीं निकाला। आखिरकार ब्रिटिश शासक ने कमरुनाग झील से बड़ा देवता कमरूनाग जी का अनगिनत स्वर्ण,हीरे,चांदी जेवरातों का खजाना झील से निकालने का दुस्साहस कर लोहे का कांटा झील के मध्य डाल कर कई बोरियां भरकर चलने लगा। ऐसे में हजारों नागों ने उस पर धावा बोल दिया। वह अंधा हो गया।उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और वह बड़े देवा कमरूनागा जी की शरणागति हो गया। उसकी भूल माफ कर कमरूनाग जी ने अपने गुरों के माध्यम से सारा खजाना वापिस अपनी झील के भंडार में डालने की आज्ञा दी। ब्रिटिश शासक दंडवत प्रणाम करता हुआ वहां से चल दिया था।
स्थानीय इलाका वासियों ने कहा कि उनकी पुश्तैनी दर पुश्तों से कमरूनाग जी से अपार श्रद्धा जुड़ी हुई है। अपनी मन्नत पूरी होने पर यथा शक्ति स्वर्ण, चांदी, हीरो के आभूषण श्रद्धालु आज भी कमरुनाग झील में चढ़ाते आये हैं। हर साल आषाढ़ संक्रांति को यहां कमरूनाग झील में सरानाहुली मेला बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर समूचे हिमाचल प्रदेश के साथ साथ बाहरी राज्यों से भी श्रद्धालु यहां बड़े देवता कमरूनाग जी के मंदिर में दर्शन करके निहाल हो जाते हैं।
इस बार सरानाहुली मेला आज पंद्रह जून की संक्रांति को बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से ही श्रद्धालुओं ने यहां हजारों की संख्या में विभिन्न स्थानों पर पड़ाव डाल कर श्री बड़े देवा कमरूनागा जी के गगनचुंबी उद्घोषों से सारा वातावरण गूंजायमान कर दिया है। अपनी मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति होने पर गाजे बाजे के साथ श्रद्धालुगण यहां नतमस्तक होते आये हैं।
वर्तमान में कमरूनाग झील एवं मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण किया गया है। धार्मिक पर्यटकों के ठहरने हेतु रोहान्डा,करसोग,निहरी सभी जगह विभिन्न होटल, भोजनालय व सर्किट हाउस भी है। जिला मंडी मुख्यालय से लगभग अस्सी किलोमीटर दूर स्थित श्री बड़े देव कमरूनाग जी का प्राचीन मंदिर व कमरुनाग झील सचमुच हिमाचल प्रदेश के धार्मिक पर्यटन का बहुत बड़ा अजूबा है।
यहां पर सारा साल ही भारी संख्या में हजारों श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।
सर्दियों की बर्फबारी में कमरूनाग झील पूर्णतया जम जाती है। ऐसे में धार्मिक पर्यटकों को झील में उतरने की सख्त मनाही है।
कालांतर में कमरूनाग जी के भव्य मंदिर व कमरुनाग झील तक पहुंचने की सभी सुविधाओं को जुटाया जा रहा है।

राजीव शर्मन्