कोर्ट आदेश न मान कर सात साल की सजा वाले केसों में जबरन जेल भेजती है पुलिस —–राजा भईया

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कोर्ट आदेश न मान कर सात साल की सजा वाले केसों में जबरन जेल भेजती है पुलिस —–राजा भईया

देवभूमि न्यूज़ डेस्क
नई दिल्ली

जेलों में बढ़ती हुई बंदियों की भीड़ को देखते हुए और मानवता के आधार पर तथा झुंठे आरोपों का सामना करने वाले को राहत देते हुए हर मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लोगों को थानो की हवालातों में बंद करने व उन्हें जेल भेजनें पर एक अहम फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया जा चूका है परन्तु आज भी अधिकतर पुलिसकर्मी इसे नहीं मानते है या यूँ कहें की अपनी हेकड़ी दिखाते हुए इसका जान बूझ कर उलंघन करते है क्योंकि समाज की और विशेषकर गांव देहात की भोली भाली आम जनता को भी इस आदेश की जानकारी नहीं है कानूनहित,जनहित और न्यायहित में इस आदेश को जानना बहुत जरूरी है हिंदुस्तान शिवसेना के राष्ट्रीय प्रमुख और दिल्ली हाई कोर्ट के एडवोकेट राजेन्द्रसिंह तोमर राजा भईया ने आज इस अहम फैसले के बारे में जनता को जागरूक करते हुए प्रेस नोट जारी कर बताया कि सुप्रीम कोर्ट कि डबल बेंच के दो बरिष्ठ न्यायाधीशो श्री चंद्रमौली कुमार प्रसाद और श्रीमती पिंकी चंद्रा घोष ने एक क्रिमिनल अपील संख्या 1277–2014 में केस टाईटल अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य सरकार बगैरा में यह फैसला दिया है कि बिना गिरफ्तारी वारंट और मैजिस्ट्रेट के आदेश से यदि किसी भी आरोपी या सस्पीक्ट व्यक्ति को संज्ञेय अपराध की धारा के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद यदि गिरफ्तार किया जायेगा तों उसे थाने की हवालात या जेल में नहीं भेजा जायेगा बल्कि संबन्धित पुलिस अधिकारी उसे सीआर पीसी की धारा 41(1) का नोटिस दें कर पूछताछ के बाद यदि विशेष परिस्थियां ना हों और गिरफ्तारी अत्यंत आवश्यक ना हों तों,कोर्ट में हाजिरी के लिए पाबंदीनामा भरवा कर या पुलिस बेल पर छोड़ देगा,यह आदेश वर्ष 2014 में दिया जा चूका है और कोर्ट आदेशानुसार इसकी प्रतियां देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशको को पालना कराने हेतु भिजवाई जा चुकी है परन्तु अधिकतर पुलिसकर्मी इस आदेश को नहीं मानते है एडवोकेट राजा भईया ने कोर्ट आदेश की प्रतियाँ पत्रकारों को देते हुए बताया की यदि इस आदेश की ठीक से पालना की जाये तों जेलों और अदालतो में काफ़ी हद तक भीड़ भाड़ कम हों जाएगी है और साथ ही साथ दुर्भावना बश किसी निर्दोष को यदि आरोपी बना दिया गया है तों उसे भी जेल या थाने की हवालात में रहने और जिल्लत उठाने से बचाया जा सकता है जिले के बरिष्ठ पुलिस अधिकारियो को भी इस ओर ध्यान देने और इस आदेश की कड़ाई से पालना कराने की आवश्यकता है

— राजेन्द्रसिंह तोमर राजा भईया एडवोकेट दिल्ली हाई कोर्ट एवं राष्ट्रीय प्रमुख हिंदुस्तान शिवसेना मो. न.-9811371054–9818951279