राजीव शर्मन् की बहुचर्चित कविता “घराटी बावा”
देवभूमि न्यूज डेस्क
हमारे दुर्गम ग्राम्य-जीवन में,दिन-रात्रि बहुत संघर्ष था।
हम घराट-खड्ड पर अनाज-बोझा उठाते,बड़ा हर्ष था।।
हमारे गांव का घराटी बावा जी, उन दिनों एकमात्र शान रही।
हमें बचपन में सतत् देशभक्ति सिखाई, बड़ी उपलब्धि यही।।
घराटी बावा जी,अनाजपीस घराटी नहीं, कोई समझे, यूं ही अनाज पीसने हेतु खड़ा है।
सारा गांव मानता-पूजता,घराटी द्वितीय विश्व युद्ध व चीन युद्ध लड़ा है।।
ग्रामीण बच्चों को नित्यप्रति राष्ट्र प्रेम-जयहिंद संस्कार जगाया है।
घराटी जी ने अपने कर्मवीर सपूत को पाक युद्ध में भी गंवाया है।।
घराटी की पोती घूंघरी हमारी बचपन की सहपाठिन है।
हमें सैनिक ट्रेनिंग दांव-पेंच सिखाती,कहती,यह तो घराटी बावा जी की परिपाटी है।।
हर दिन खेल व्यायाम ,सच्चे सैनिक घराटी, ग्रामीण भावी पीढ़ी हिमायती, दृढ़ प्रतिज्ञ बना रहा।
हम नालायक शहर भाग गए,वह जटिलताओं में भी डटा रहा।।
गांव की यादें बनी रहीं, बहुत सारे साथी मिलते और बिछुड़ते गये।
घराटी बावा सुधारवादी टक्करें लेते,हालात नाजुक बिगड़ते गये।।
पचास साल अंतराल, कुछ हम उम्र पुरानें मित्रों संग गांव लौटा हूं।
गांव के हर घर स्कूली दिनों के मित्रों की तलाश में जुटा हूं।।
पुराना मित्र हंसराज घराट-खड्ड पर ले आया है।
वहां अब वहां घराट नहीं, हमनें घराटी बावा की आदमकद प्रतिमा को पाया है।।
घराटी बावा की पोती सहपाठिन घूंघरी मिली,वह सेना में डाक्टर है।
जयहिंद का जोश जागा ,उसका पति शेर सिंह सहपाठी भी आज मिलिट्री कमांडर है।।
हमने कई सालों बाद स्कूली दिनों बाद इक्कट्ठे मिल बैठ खाना खाया है।
देश की खातिर सिरधड़ की बाजी लगाने वालों को सभी ने जयहिंद पैगाम भिजवाया है।।
-राजीव कुमार शर्मन् सोमभद्रा-स्वां नदी बाजार समीप अम्बिकानगर-अम्ब कलौनी रेलवे स्टेशन रोड अम्ब-177203, जिला ऊना हिमाचल प्रदेश।