पहाड़ी बावा कांशीराम महान स्वतंत्रता सेनानी व क्रान्तिकारी साहित्यकार।
देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना
पहाड़ी बावा कांशीराम का जन्म 11जुलाई 1882 को जिला कांगड़ा के डाडासीबा के गुरनवाड़ गांव में हुआ था।
बचपन से ही मेधावी छात्र होने से इनकी लेखन व वक्तृत्व शक्ति अद्वितीय थी। देश की गुलामी से वह व्यथित होकर स्वतंत्रता सेनानियों के सम्पर्क से जुड़ते चले गए। उन्होंने अपनी लेखनी और वक्तृत्व शक्ति का प्रयोग देश की आजादी के लिए बखूबी कर अपना राष्ट्रीय धर्म निभाया था।

वह लाला लाजपतराय के सम्पर्क में भी निरन्तर बने रहे। पहाड़ी बावा को पहाड़ी गांधी की उपाधि होशियारपुर पंजाब की जनसभा में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी ने दी थी।
इसी तरह वर्तमान में दौलतपुर जिला ऊना जो उस समय पंजाब का ही हिस्सा था में एक जनसभा में भारत की महान कवियत्री सरोजिनी नायडू जी ने बावा कांशीराम की कविताएं सुनकर उन्हें हिमाचली बुलबुल की उपाधि से अलंकृत किया था।
जलियांवाला बाग कांड से दुखी होकर बावा कांशीराम जी ने जीवन पर्यन्त काले कपड़े धारण किए थे। पहाड़ी बावा कांशीराम जी का संकल्प था कि जब तक भारत अंग्रेजी हुकूमत से छुटकारा नहीं मिलता वह काले वस्त्रों का त्याग नहीं करेंगे।

पहाड़ी गांधी बावा कांशीराम क्रांतिकारी साहित्यकार होने के साथ-साथ महान समाजसेवी भी थे। उन्होंने 1905 में कांगड़ा में आये भूकम्प में लोगों की जान माल की रक्षा दल बल सहित की थी।
पहाड़ी बावा कांशीराम जी का भारत को आजाद देखने का संकल्प जीते जी साकार नहीं हो पाया था।उनकी 15अकटूबर 1943 को मृत्यु हो गई थी।
सन् ईस्वी 1984 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनकी स्मृति में डाक टिकट जारी किया था।
आज समूचे भारत में पहाड़ी गांधी बावा कांशीराम जी की 140 वीं जन्म जयंती मनाई जा रही है।
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पहाड़ी गांधी बावा कांशीराम जी के पुश्तैनी घर का अधिग्रहण करने की अधिसूचना जारी करने के साथ-साथ इसे एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित करवाने की प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर अमली जामा पहनाया जा रहा है।

इससे साहित्य संस्कृति प्रेमियों ने खुशी का इजहार किया है।
पहाड़ी गांधी बावा कांशीराम जी की जन्म भूमि पर बनने वाला साहित्य संस्कृति सदन आने वाली भावी पीढ़ी को उनके द्वारा आजादी की लड़ाई में अपनी साहित्यिक क्रांतिकारी प्रेरणादायक स्रोत बना रहेगा।
आशा की जानी चाहिए कि पहाड़ी गांधी बावा कांशीराम जी की जन्म स्थली पर बनने वाला साहित्यक संग्रहालय शीघ्रातिशीघ्र बनकर तैयार हो जायेगा।
राजीव शर्मन,ऊना