“छोटा हरिद्वार” उपनाम सार्थक सिद्ध करती सोमभद्रा-स्वां नदी का अस्तित्व खतरनाक दौर में।
देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना
अवैध खनन और गंदगी की लगातार शिकार हो रही स्वां नदी के संरक्षण के लिए कोई सार्थक पहल नहीं किया जाना अत्यंत ही चिंताजनक है।

सोमभद्रा-स्वां नदी की पौराणिक महता के चलते इसे स्वर्ग की नदी और जिला ऊना को “छोटा हरिद्वार”उपनाम की संज्ञा से विभूषित किया जाता है।
जिला ऊना,शहर की प्राचीन धार्मिक सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक सोमभद्रा-स्वां नदी तट सानिध्य में रसा बसा प्रमुख धार्मिक पर्यटन एवं रमणीय स्थल है।
सोमभद्रा-स्वां नदी को स्वर्ग में बहने वाली पोराणिक नदी का दर्जा प्राप्त है,इस नदी का अमृत जल पान व स्नान के लिए अलोकिक महत्व रखता है। सोमभद्रा-स्वां नदी जब ब्रह्मोति में सतलुज की धारा में विलीन होती है तो वहां का स्नान महातीर्थ प्रयागराज और हरिद्वार का ही पुन्य स्नान कहलाता है। यही कारण है कि जिला ऊना को “छोटा हरिद्वार” उपनाम से भी जाना जाता है।
यहां पर मुस्लिम,सिख व हिन्दू धर्म के अनेकों मस्जिद-मजार, गुरूद्वारा और मंदिर हैं। शिवालिक धौलाधार पर्वत श्रृंखला की ओट में बसा जिला ऊना विभिन्न धार्मिक सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए मुख्य केंद्र है।
हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों का हृदय जिला ऊना एक सितम्बर 1972 को हिमाचल के नये जिला के रूप में अस्तित्व में आया। इसके बाद इस जिला ने निरन्तर उन्नति के सतत् सोपान तीव्र गति से लांघकर चहुंमुखी सर्वांगीण विकास क्रांति हासिल की है तो ऐसा कहने में कोई भी संशय नहीं है।
जिला ऊना चिरकाल से ही जब यह पंजाब राज्य के होशियारपुर से जुड़ा रहा तभी से ही यह धार्मिक गुरुओं की नगरी मानी जाती है। सर्वप्रथम जिला मुख्यालय ऊना में प्रथम सिख गुरूजी श्री बावा नानक देव जी के वंशज यहां मौजूद हैं और श्री किला वेदी जी का प्रमुख गुरूद्वारा आज भी हिन्दू-सिख एकता का प्रतीक है।
जिला ऊना में ही श्री डेरा बावा बड़भाग सिंह जी ,मंजी साहिब गुरुद्वारा व श्री डेरा बावा रूद्रानंद आश्रम सारा साल धार्मिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रमुख आकर्षण है।
यहां पर प्राचीन पांडवकालीन श्री सदाशिव महादेवन जी मंदिर जो कि पांडवों के राज कुल पुरोहित श्री धौम्य ऋषि जी द्वारा पांच हजार वर्ष से भी ज्यादा पुराना है,शैव सनातनी भक्तों की अगाध श्रद्धा का महातीर्थ माना जाता है।
सोमभद्रा-स्वां नदी तट पर गगरेट-ऊना में ही पांडवों-कौरर्वो के गुरु आचार्य द्रोणाचार्य जी द्वारा स्थापित शिव मंदिर है जिसे शिव वाड़ी और द्रोण शिव मंदिर के नाम से समूचे हिमाचल प्रदेश में जाना जाता है।
पांडवकालीन श्री गौरी गंगा महादेवन जी समीप लोहारा अम्बिकानगर-अम्ब छोटा हरिद्वार का भी प्राचीन महत्व है।
इसी तरह तहसील मुख्यालय अम्ब उपमंडल की प्राचीन श्री कामाख्या देवी जी मंदिर भी पांडवकालीन है।
अम्ब तहसील उपमंडल के सोमभद्रा-स्वां नदी बाजार रेलवे स्टेशन रोड अम्ब-ऊना के ही समीप “बीवी फातिमा मस्जिद ” मुसलमान भाईयों के लिए मक्का मदीना का ही महत्व रखती है।
यहां हर शुक्रवार को भारी मात्रा में मुस्लिम श्रद्धालु आते रहते हैं। इसी तरह पीर निगाह ऊना मुख्यालय में हिन्दू मुस्लिम संयुक्त तौर पर नतमस्तक होते हैं।
जिला ऊना का माता चिंतपूर्णी जी,श्री छिन्न मस्तिकाधाम मंदिर उत्तर भारत के साथ साथ जगत प्रसिद्ध महातीर्थ शक्ति सम्पन्न स्थल माना गया है। यहां सारा ही साल श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
कालांतर में जिला ऊना के धार्मिक स्थलों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की नितान्त आवश्यकता है। इसमें सर्वप्रथम यहां की सोमभद्रा-स्वां नदी में सुखना झील चंडीगढ़ की तर्ज पर ” सोमभद्रा-स्वां”झील की भी सालों से दरकार है। इसी तरह श्री सदाशिव महादेवन जी तलमेहड़ा से डेरा बाबा बड़भाग सिंह,माता चिंतपूर्णी जी को ट्राली परियोजना से जोड़े जाने की धार्मिक श्रद्धालु अरसा दराज से लगातार ही मांग करते आ रहे हैं।
भारत सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार को जिला ऊना की ऐतिहासिक, पौराणिक पवित्र सोमभद्रा-स्वां नदी में पर्यटकों के आकर्षण की “सोमभद्रा-स्वां झील” और चिंतपूर्णी व श्री सदाशिव मंदिर तलमेहड़ा को तत्काल ट्राली परियोजना से जोड़े जाने से धार्मिक पर्यटन क्रान्ति लाई जा सकती है तथापि जिला ऊना को वास्तविक तौर पर इसके उपनाम “छोटा हरिद्वार” को भी यथार्थ में सार्थक सिद्ध किया जा सकता है।
*राजीव शर्मन*