जय श्री मांडव्य नगर एवं श्री अम्बिकानगर-अम्ब गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू -राजीव शर्मन

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जय श्री मांडव्य नगर एवं श्री अम्बिकानगर-अम्ब गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू -राजीव शर्मन

देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना

श्रावण मास के दस्तक देते हुए हिमाचल प्रदेश में शिव-गौरी नन्दन आदि गणेश जी के भव्य सार्वजनिक गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती है।

पावन श्रावण मास में ही गणेश प्रतिमाओं को तैयार करने में कारीगर-कलाकार जुट जाते हैं।
हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक गणेशोत्सव का गढ़ जिला मंडी और जिला ऊना को माना जाता है। जिला मंडी के श्री सिद्ध गणपति मंदिर में अस्सी के दशक में “श्री मांडव्य नगर गणेशोत्सव” आयोजित करने की शुरुआत की गई थी। इसी तरह नब्बे के दशक में “श्री अम्बिकानगर-अम्ब गणेशोत्सव” को धूमधाम से मनाने की सरंचना की गई थी।

दोनों सार्वजनिक गणेशोत्सव आयोजन की विशेषता यह रही कि इनको आयोजित करने का मूल उद्देश्य लोकमान्य बालगंगाधर तिलक जी द्वारा 1893 पूणें महाराष्ट्र का राष्ट्रीय, धार्मिक, सांस्कृतिक आदान-प्रदान सुनिश्चित करने का ही प्रमुख उपलक्ष्य रहा है। श्री मांडव्य नगर गणेशोत्सव मंडी और अम्बिकानगर -अम्ब गणेशोत्सव की एक बहुत बड़ी समानता और उपलब्धि का रिकॉर्ड इन दोनों गणेशोत्सवों को स्थापित एवं प्रचारित-प्रसारित करने का श्रेय भी लेखाकार के नाम दर्ज है।

सर्वप्रथम सन् ईस्वी 1989 में कुल्लू घाटी के देवता श्री देव बड़ा छमाहुं ने हज़ारों देवलुओं के साथ छोटी काशी को श्री मांडव्य नगर गणेशोत्सव की समरसता से सरावोर कर दिया था।इसी तरह अम्बिकानगर-अम्ब गणेशोत्सव जिला ऊना ने भी लगातार अपनी सिल्वर जुबली की ओर अग्रसर होने की बढ़त बना ली है।
हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक गणेशोत्सव के संस्थापक सदस्य राजीव शर्मन् ने बताया कि वह समूचे हिमाचल प्रदेश की देवी-देवताओं की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा का संवर्धन एवं प्रचार प्रसार इस गणेशोत्सव के माध्यम से हर सम्भव संचालित कर हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में एक देव संस्कृति की स्वस्थ परम्परा का सतत् निर्वहन करवाने की ओर समर्पित है।

वह इस सार्वजनिक गणेशोत्सव आयोजन को सरकारी संरक्षण देने की प्रासंगिकता की लगातार वकालत करते आ रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी व्यास नदी की स्वच्छता एवं जलस्रोतों की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने हेतु मांडव्य नगर झील निर्माण की जद्दोजहद में भी डटे हुए हैं। इसी तरह जिला ऊना में भी ऐतिहासिक सोमभद्रा-स्वां नदी में भी सोमभद्रा झील निर्माण का लगातार प्रचार प्रसार करते चले आ रहे हैं। राजीव शर्मन् का मानना है कि वर्तमान में व्यास नदी की पंडोह बांध के कारण सूखी व्यास नदी धारा ने समस्त पर्यावरण प्रेमियों को चिन्तित किया है।
मंडी शहर की रमणीयता पर प्रश्न चिह्न लगा हुआ है?
इस रमणीयता की बहाली श्री मांडव्य ऋषि झील से ही बहाल करवाई जा सकती है। इसी तरह जिला ऊना की सोमभद्रा-स्वां नदी भी प्रदूषण से मुक्त होने के लिए छटपटा रही है। जिला ऊना की सोमभद्रा-स्वां नदी में अवैध खनन ने तो पर्यावरण प्रेमियों को निराशा की ओर धकेल दिया है। ऐसे में सोमभद्रा-स्वां नदी का जीर्णोद्धार करवाने की गर्ज से सोमभद्रा-स्वां नदी झील निर्माण की भी नितांत आवश्यकता है। इसके लिए वह पिछले दो दशकों से लगातार प्रचार प्रसार कर रहे हैं।

राजीव शर्मन् ने बताया कि जिला मंडी व जिला ऊना के क्रमशः सार्वजनिक गणेशोत्सवों श्री मांडव्य नगर गणेशोत्सव और अम्बिकानगर -अम्ब गणेशोत्सव का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय, धार्मिक, सांस्कृतिक एकात्मकता को सुदृढ़ करवाना और जनमानस को रचाने बसाने वाली नदी संस्कृति की सुरक्षा व्यवस्था को भी पुनर्रउद्धार करवाना है। इसलिए उन्होंने दोनों गणेशोत्सव आयोजन को सरकारी उत्सव घोषित करवाने और सरकारी संरक्षण में आयोजित करवाने की अपील पुनः दोहराई है।
गौरतलब है कि हर साल की तरह इस साल भी 31 अगस्त से 9 सितम्बर तक चलने वाले सार्वजनिक गणेशोत्सव की तैयारियां जोरों पर शुरू हो गई है।