सरस्वती विद्या मंदिर नई शिक्षा नीति की तर्ज पर कर रहे है कार्य- सुरेश भारद्वाज
देवभूमि न्यूज डेस्क
शिमला
भारत में सरस्वती विद्या मंदिर के 12500 स्कूल क्रियाशील है और इन स्कूलों का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का प्रचार प्रसाद करना मुख्य उद्देश्य है. यह बात आज यहां कालीबाड़ी सभागार में सरस्वती विद्या मंदिर लोवर कुफटाधार परिच द्वारा वार्षिक पारितोषिक समारोह के दौरान शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कही.

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि स्कूली बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि उनका संपूर्ण विकास संभव हो सके. उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में बच्चों का सर्वागीण विकास अति आवश्यक है ताकि उनके व्यक्तित्व का विकास संभव हो सके.
उन्होंने अभिभावकों एवं अध्यापकों से आह्वान किया कि वे बच्चों के चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व विकास पर ध्यान केंद्रित करें ताकि वे राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा सके.

उन्होंने बताया कि राज्य के निर्माण के वक्त साक्षरता दर प्रदेश में 4.8 परसेंट थी जो बढ़कर 90% से अधिक होगी है और राज्य केरल के समीप पहुंच चुका है. उन्होंने बताया कि शिक्षा क्षेत्र में राज्य को कई सम्मान मिले हैं और दुर्गम क्षेत्रों में घर द्वार पर शिक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है.
सुरेश भारद्वाज ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 में मातृभाषा को विशेष महत्व दिया जा रहा है और भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता को नालंदा विश्वविद्यालय के तर्ज पर बढ़ावा दिया जा रहा है और भारत फिर से विश्व गुरु के पटल पर स्थान हासिल करेगा.
उन्होंने बताया कि सरस्वती विद्या मंदिर के स्कूल नई शिक्षा नीति की तर्ज पर कार्य कर रहे हैं और भारत की प्राचीन संस्कृति एवं सभ्यता को बढ़ावा दे रहे हैं.

इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष किसान मोर्चा जियालाल ठाकुर ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया.
प्रधानाचार्य सरस्वती विद्या मंदिर नेन्सी शर्मा ने मुख्य अतिथि के स्वागत वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की.
इस अवसर पर सुरेश भारद्वाज ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले छात्र छात्राओं को ₹11000 देने की घोषणा की.

इस अवसर पर जिला किसान मोर्चा महामंत्री प्रेम चौहान बाल कल्याण समिति अध्यक्ष अमिता भारद्वाज तथा अन्य पदाधिकारी गण उपस्थित थे.