मंडी अंतराष्ट्रीय महाशिवरात्रि उत्सव 19 से 25 फरवरी 2023 तक मनाया जा रहा है

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मंडी अंतराष्ट्रीय महाशिवरात्रि उत्सव 19 से 25 फरवरी 2023 तक मनाया जा रहा है

देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना/मंडी

जगत प्रसिद्ध मंडी शहर का अन्तराष्ट्ररीय शिवरात्रि उत्सव इस साल भी 19 से 25 फरवरी 2023 तक मनाया जाना प्रस्तावित है।इस बार के अंतराष्ट्रीय महाशिवरात्रि पर्व का समूचे नूतन श्री मांडव्य ऋषि नगर ,छोटी काशी जिला मंडी का हर्षोल्लास हिमाचल प्रदेश के साथ साथ देश-विदेश के लिए भी आनन्ददायक अनुभूति उपलब्ध करवाने जा रहा है।

विशेषतः नये नगर निगम की घोषणा व अधिसूचना ने प्राचीन मांडव्य ऋषि नगर जनपद को बहुआयामी विकासोन्मुखी इबारत लिखवाने की ओर उन्मुख कर दिया है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी ने भी मंडी शहर को द्वादश ज्योतिर्लिंगों का शिवधाम बनवाने,व्यास नदी में पर्यटक झील को साकार करने के दृढ़ संकल्प का आह्वान किया था। इस पर करोड़ों रुपए का बजट प्रावधान भी निर्धारित किया गया है। सचमुच में इस बार का अंतराष्ट्रीय महाशिवरात्रि पर्व एक नये इतिहास का सूत्रपात व संचार करवाने वाला है। मंडी शहर में शिवरात्रि महोत्सव का आयोजन रियासतकाल से ही अनवरत जारी है।मंडी शिवरात्रि की व्युत्पति स्वयम्भू श्री बावा भूतनाथ जी से ही हुई है

।जहाँ आज नई मंडी बसी है वहाँ बीहड-वीयवान जँगल था।एक गऊ माता जँगल में बावा भूतनाथ के शिवलिंग पर दुग्धधारा चढाती थी।एक चरवाहे ने तत्कालीन रियासतकालीन राजा अजवर सेन को इस अलौकिक कृत्य की जानकारी दी।पहले-पहल राजा ने विश्वास नहीं किया किन्तु स्वयम्भू बावा भूतनाथ जी ने राजा अजवर सेन को स्वप्न में दृष्टांत दिया और मंदिर स्थापना व नई मांडब्य नगरी बसाने की प्रेरणा दी। इस तरह राजा अजवर सेन ने सन् ईस्वी 1527 में बावा भूतनाथ मंदिर का निर्माण करवा नई मांडव्य जनपद बसाई।तदुपरान्त हर साल ही शिवरात्रि महोत्सव की परम्परा का संचार हुआ। कहते है कालान्तर में जब राजा ईश्वरी सेन महाराजा संसार चंद की 12 साल की क़ैद से छूटने के बाद मंडी लौटे तो शिवरात्रि का हर्षोल्लास बढ़ा ।आज वर्तमान में मंडी नगर छोटी काशी के नाम से भी धर्म संस्कृति की राजधानी मानी जाती है

जिसके आराध्यदेव स्वयम्भू श्री बावा भूतनाथ है।आज अन्तरास्ट्रीय शिवरात्रि मेला विश्व प्रसिद्ध मेला है।सर्वप्रथम शिवरात्रि महोत्सव का प्रारम्भ पहले दिन बावा भूतनाथ की सार्वजनिक पूजा से किया जाता है। राजा माधवराज की जलेब निकाली जाती है जिसमें हिमाचल के दूरदराज के देवी-देवताओं के रथ परम्परागत वाद्य यँत्रो के साथ हज़ारों देवलुओं के साथ भाग लेतें है।स्थानीय लोंगों में देवी-देवताओं के रथों को देवलुओं सहित ठहराने की भी अपनी-अपनी बारी की होड. मची रहती है। कमरूनाग का रथ कई सदियों से श्री टारना माता मंदिर में ही ठहरता आया है।शिवरात्रि-उत्सव के समापन पर सभी देवी-देवता चौहट्टा बाजार में सामूहिक समागम में मंडी जनपद के लोगों को अपना शुभ आशीर्वाद देते है ताकि आगामी शिवरात्रि तक सभी कुशल पूर्वक रहें।शिवरात्रि महोत्सव की रात्रिकालीन साँस्कृतिक संध्याओं का नजारा भी देखते ही बनता है।स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ माया नगरी मुम्बई के फ़िल्मी अदाकार भी खूब रँग जमाते हैं।शिवरात्रि-उत्सव धार्मिक,सांस्कृतिक व पर्यटन का सर्वाँगीण विकास भी सुनिश्चत करवाता आया है।

मँडयाली सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते है। सारा मंडी शहर शिवरात्रि-उत्सव की रंगत में रंग जाता है।स्थानीय होटल व्यवसायिओं के सारे होटल पर्यटकों के लिए बुक रहते है।यही नहीँ मँडी शहर के सभी वार्डों के लोगों के पास मेहमान-नवाजी का भी ज़ोर रहता है। लोगों के अधिकांश रिश्तेदार अग्रिम तौर पर शिवरात्रि-उत्सव देखने के लिए अपने रहने के प्रबन्ध का आग्रह कई दिन पहले कर लेतें हैं।वर्तमान में शिवरात्रि-उत्सव एक बहुत बड़ा व्यापारिक मेला भी बन गया है। इस शिवरात्रि-उत्सव आयोजन का वैकल्पिक स्थल ढूँढ़ा जाना भी आने वाले समय में व्यापक एवं जटिल चुनौती है।शिवरात्रि उत्सव मंडी के मुख्य आयोजन स्थल “पड्डल मैदान” का विस्तार आवश्यक हो गया है।विपाशा नदी (ब्यास-दरिया) की ओर ऐतिहासिक पड्डल मैदान का विस्तार नितान्त ज़रूरी है ताकि अन्तरास्ट्रीय शिवरात्रि -उत्सव का हर्षोल्लास बढ़ाया जा सके।सम्भवत: शिवरात्रि उत्सव का शुभारंभ व समापन हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल और परम आदरणीय मुख्यमंत्री ही करते आये हैं।आशा की जानी चाहिए कि इस बार शिवरात्रि उत्सव के आयोजन स्थल पड्डल मैदान का अवश्य ही विस्तार किया जायेगा।इसमें बड़े पैमाने पर समूचे हिमाचल प्रदेश के छोटे बड़े व्यापारी एक सप्ताह के मेलें में काफ़ी वस्तुओं का आदान प्रदान कर आर्थिक तौर पर खूब मुनाफा कमाते है।ज़्यादातर ऊनी वस्त्रों के व्यापार का काफ़ी व्यापार होता है। मेले के स्टाल शिवरात्रि उत्सव की समाप्ति पर भी जनता की मांग पर कई दिनों तक लगे रहते है।
एक विनम्र सुझाव इस लेखाकार को हिमाचल प्रदेश की नई सरकार के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जी के ध्यानाकर्षण हेतु पहुंचाना है कि सर्वप्रथम नूतन श्री मांडव्य ऋषि नगर में प्राचीन मांडव्य ऋषि की विशाल काय भव्य मूर्ति एवं मंदिर की स्थापना करा इस तपस्थली का समृद्ध इतिहास बरकरार रखा जाना चाहिए। इसी के साथ साथ प्राचीन रियासत कालीन श्री मांडव्य ऋषि नगर जनपद की समृद्ध धर्म संस्कृति को सतत सहेजने व संरक्षण हेतु जनाकांक्षाओं के अनुरूप बहुआयामी सूत्रपात करवाया जाना चाहिए।

लेखक: राजीव शर्मन
अम्बिका8-अम्ब कालोनी,
समीप रेलवे स्टेशन रोड,अम्ब,
जिला ऊना-177203
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