सरस्वती पूजा में करे मंत्र उच्चारण – डॉ सुमित्रा
सेलिब्रिटी वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा अग्रवाल,सिटी प्रेसीडेंट इंटरनेशनल वास्तु अकादमी , कोलकाता,यूट्यूब वास्तु सुमित्रा
देवभूमि न्यूज डेस्क
कोलकाता
बसंत पंचमी को माता सरस्वती की विधिवत पूजा करनी चाहिए इस दौरान पूजा सामग्री और मंत्रो का विशेष धयान रखा जाना चाहिए

देवी सरस्वती पूजा विधि और सामग्री:
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि,वसंत पंचमी के रूप में सर्वविदित है। इस दिन ज्ञान, वाणी और ललित कलाओं की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।सरस्वती पूजन का उद्देश्य जीवन में अज्ञानरुपी अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश उत्त्पन्न करना है। सत्वगुण से उत्पन्न होने के कारण इनकी पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियां अधिकांशः श्वेत वर्ण की होती हैं जैसे श्वेत चन्दन , श्वेत वस्त्र , फूल , दही-मक्खन , सफ़ेद तिल का लड्डू , अक्षत , घृत , नारियल और इसका जल , श्रीफल , बेर इत्यादि। इस दिन सुबह स्नानादि के पश्चात श्वेत अथवा पीले वस्त्र धारण कर विधिपूर्वक कलश स्थापना करें । श्वेत फूल-माला के साथ माता को सिन्दूर व अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करें । बसंत पंचमी के दिन माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित करने का विधान है। प्रसाद में माँ को पीले रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाएं । यथाशक्ति ”ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ” का जाप करें । माँ सरस्वती का बीजमंत्र ” ऐं ” है जिसके उच्चारण मात्र से ही बुद्धि विकसित होती है ।
विसर्जन:
शास्त्रों के अनुसार देवी सरस्वती की पूजा पंचमी तिथि में होती है और उनका विसर्जन षष्ठी तिथि में किया जाता है। जिन लोगों ने मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की है उन्हें मूर्ति का विसर्जन करके मूर्ति को जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।