शिवरात्रि को भांग का नशे के लिए उपयोग बंद होना चाहिए -डॉ अर्चिता महाजन*

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*शिवरात्रि को भांग का नशे के लिए उपयोग बंद होना चाहिए -डॉ अर्चिता महाजन*

देवभूमि न्यूज डेस्क
चंबा

जैसे जैसे कोई भी प्रथा पुरानी होती जाती है वह चलन में आ जाती है। और हम यह नहीं देखते कि यह समाज में कुरीतियों को बढ़ावा दे रही है। पान का पत्ता भांग धतूरा यह सब चीजें भगवान शंकर को अर्पण की जाती है तो फिर सिर्फ भांग ही क्यों पीते हो जहर भरा धतूरा भी खाओ। दरअसल यह सब चीजें देवी देवताओं को अर्पण करने का अर्थ यह है

कि इन सब का औषधीय उपयोग लोग याद रखें परंतु हुआ इससे बिल्कुल उल्टा लोगों ने इसे एक नशे के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया लगभग सभी मंदिरों के बाहर भांग के पकौड़े और भांग की श्रद्धाई बांटी जाती है। भगवान शंकर महाकाल है अजन्मा है मृत्यु से परे है। भला उन्हें नशे की क्या जरूरत। अपने नशे की जरूरत पूरी करने के लिए भगवान को जरिया बनाया जाता है। भांग के औषधीय गुण होते हैं। पान के पत्ते के भी औषधीय गुण होते हैं।दमा जैसी समस्याओं से निजात पाने के लिए भी भांग का उपयोग किया जा सकता है.धतूरा स्ट्रैमोनियम (डीएस) एक व्यापक वार्षिक पौधा है, जिसमें एट्रोपिन, हायोसायमाइन और स्कोपोलामाइन होता है, जो एक गंभीर एंटीकोलिनर्जिक सिंड्रोम के साथ विषाक्तता पैदा कर सकता है धतूरे में एंटी-इन्फेल्मेट्री और एंटी-सेप्टिक गुण पाया जाता है. इस कारण से यह कान के दर्द की समस्या को ठीक कर देता है. जिन लोगों को दमा की शिकायत है उनके लिए धतूरा फायदेमंद है पर सावधान इसका फायदा तभी है जब यह पता हो कि इसका उपयोग कैसे और किस मात्रा में करना है अन्यथा यह जानलेवा हो सकता है।

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रिशन डायटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेन योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पदम श्री राष्ट्रीय पुरस्कार एवं नॉमिनेटेड फॉर नेशनल यूथ अवार्ड 94638 19002