देवभूमि न्यूज 24.इन
श्री मांडव्य नगर गणेशोत्सव के संस्थापक राजीव शर्मन ने भारत सरकार व हिमाचल प्रदेश सरकार से जिला मंडी शहर मुख्यालय को पौराणिक, ऐतिहासिक व रियासतकालीन श्री मांडव्य नगर जनपद नामकरण को ततकाल प्रभाव से मान्यता दिलवाने की जोरदार अपील की है। हिमाचल प्रदेश के राज्य अस्तित्व में आने से पहले रियासतकालीन पौराणिक धर्म संस्कृति की राजधानी श्री मांडव्य नगर जनपद छोटी काशी के नाम से विख्यात रही है। कालान्तर में जब पौराणिक नगरी मांडव्य नगर जनपद का मंडी जिला हिमाचल प्रदेश में विलय हुआ तो प्राचीन मांडव्य नगर व मंडयाल नामकरण ने मंडी नामकरण ही प्रसिद्ध हो गया। आज भी मंडी शहर को प्राचीन श्री मांडव्य नगर जनपद छोटी काशी उपनाम से बेहतर जाना जाता है। व्यास नदी की पावन धारा के सानिध्य में रसा-बसा आधुनिक मंडी शहर अपने नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य व प्राचीन मंदिरों के लिए जगत प्रसिद्ध है।

व्यास नदी समीप श्री मांडव्य शिला जिसका संबंध मांडव्य ऋषि से माना जाता रहा है। इस शिला को पौराणिक श्री मांडव्य ऋषि की तपश्चर्या शिला भी कहा जाता है। इसी मांडव्य शिला पर गुरू गोविंद सिंह जी ने रियासतकालीन राजा श्री सिद्ध सेन के आतिथ्य से प्रसन्न होकर एक कच्ची हांडी फैंककर अभयदान दिया था।
कहते है कि यह हांडी टूटी नही धी।
श्री गुरू गोविंद सिंह जी के आशीर्बचन थे। ” राजा जैसे बची यह हंडी,वैसे सलामत रहेगी तेरी मंडी”!
“जो मंडी को लूटेंगे,आसमानी गोले छूटेगें!!”
इसके उपरांत मंडी शहर सिक्ख-हिन्दू धर्म संस्कृति का सौहार्दपूर्ण संचार हुआ जो आज भी समरसता व समग्रता से सतत आगे बढ़ रहा है।
वर्तमान में मंडी शहर मुख्यालय में ” मांडव्य महोत्सव ” का आयोजन किया जा रहा है । इसका सर्वत्र स्वागत किया जाना चाहिए।

इसी के साथ साथ पौराणिक श्री मांडव्य शिला व श्री मांडव्य नगर जनपद छोटी काशी की ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि के दृष्टिविगत श्री मांडव्य ऋषि का भव्य मंदिर भी बनवाया जाना प्रासंगिक है। अत: जिला प्रशासन मंडी,नगर निगम मंडी और हिमाचल प्रदेश सरकार को श्री मांडव्य महोत्सव को राज्य स्तरीय उत्सव का दर्जा प्रदान करते हुए मंडी जिला शहर मुख्यालय में श्री मांडव्य ऋषि की प्रतिमा स्थापित करा भव्य मंदिर का निर्माण भी करवाया जाना चाहिए।
अत: मंडी लोकसभा की सांसद माननीया कंगणा रणौत जी एवं मंडी सदर के विधायक श्री अनिल शर्मा जी को इस बारे आवश्यक कार्रवाई अमल में लानी चाहिए।