देवभूमि न्यूज 24.इन
पहलगाम में हुए आतंकी हमले से क्षुब्ध पावन चिंतन धारा आश्रम के संस्थापक और राष्ट्रवादी विचारक डॉ. पवन सिन्हा ‘गुरुजी’ ने देशवासियों को संदेश देते हुए कहा कि पहलगाम में हुए 27 लोगों की जघन्य हत्याकांड की मैं भरसक निंदा करता हूँ। प्रभु उन्हें अपनी शरण में लें, उनके परिवारों को शक्ति दें और जो घायल हो गये हैं, उन्हें शीघ्र ही स्वस्थ करें।
पहले मुर्शिदाबाद और अब कश्मीर ने यह दिखा दिया है कि हिन्दू कितना कमज़ोर है और अपने ही घर में किस तरह से सिमटा हुआ है।
ये militants या तो पाकिस्तान से आए थे या फिर यहीं पर हमारे समाज में घुल मिलकर sleeper cell की तरह रह रहे थे। दोनों ही स्थितियां बहुत चिन्ताजनक हैं कि हम उनका पता नहीं लगा पाए। कश्मीर के हालात सुधरने शुरू हुए ही थे कि इतना जघन्य हत्याकांड हुआ। इससे आतंकवादियों की तैयारियों का पता चलता है।

इस अवसर पर मैं हर उस व्यक्ति के दावों की निंदा करना चाहूँगा जो यह कहते हैं कि भारत हिंदू राष्ट्र है या ये कहते हैं मैं इसे हिन्दू राष्ट्र बनाऊँगा। बस मज़ाक़ बना के रख दिया है। क्योंकि इस प्रकार के वाक्यों को बोलने से लोग उत्तेजित हो जाते हैं और ऐसे लोगों की जय जयकार हो जाती है। लेकिन ज़रा आप सोच के देखिए, क्या आप राम नवमी का जुलूस निकाल सकते हैं बिना पुलिस की सहायता के? सोच के देखिए। क्या आप कहीं भी पण्डाल लगा सकते हैं? आपको अपनी रामायण यात्रा निकालने के लिए भी permission की लम्बी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है। संविधान के अनुसार सब बराबर हैं, ये मैं मानता हूँ लेकिन मैं ये भी मानता हूँ कि तुष्टिकरण क्यों? बार-बार, हर साल 2-3 बार हम तुष्टिकरण करके दिखा देते हैं कि हम आज भी backfoot पर हैं और वो front foot पर खेलते हैं, हिंदू राष्ट्र ऐसे नहीं बनता है। नारों से हिंदू राष्ट्र बनना होता, कथाओं पण्डालों में हिंदू राष्ट्र बनना होता तो बहुत पहले ही बन गया होता। राष्ट्रवाद का दुरुपयोग सामान बेचने में किया जाता है, क्या ये जायज़ है? हमारे ही लोग buisness की धुन में पागल हो चुके हैं कि हलाल certificate हासिल करके business करते हैं और फिर भी दुर्भाग्य की बात है कि वो Hindu Icons बने हुए हैं। स्थिति नाज़ुक ही नहीं बल्कि बहुत चिंताजनक है और हमारा Youth सिर्फ़ नारे लगाता है वो भी social मीडिया पर। कितने से youth हैं जो सामने आते हैं, हमारा youth शराब आदि नशे और relationships में ही व्यस्त है, ये लोग देश के लिए क्या कुछ कर पायेंगे? जहाँ ये लोग थोड़े से सक्षम हुए, विदेश चले जाएँगे।
फ़िलहाल और कोई बात नहीं करके मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहूँगा कि इस जघन्य हत्याकांड की हर ओर से भर्त्सना होनी चाहिए, मुसलमानों की ओर से भी भर्त्सना होनी चाहिए। क्योंकि अगर वे लोग कहते हैं कि ये देश उनका भी है, तो मारे गये लोग भी उनके ही हैं।