*देवभूमि न्यूज 24.इन*
आज विश्व बहुत ही कठिन दौर से गुजर रहा है: तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडराने लगा है: आज विश्वभर में ऐसा समझदार और करिश्माई नेतृत्व नहीं जो शांति बहाल करने में आगे आए और जिसकी बात मानी जाए। UNO की भी हैसियत लगभग नगण्य है। ऐसे हालात में अमन पसंद जनता को आगे आना होगा। विश्वभर में सड़कों पर उतरना होगा। अपने अपने देशों के नेतृत्व को विश्व शांति के लिए बाध्य करना होगा।
इजरायल और ईरान का युद्ध बहुत ही खतरनाक रुख अख्तियार किए हुए है और इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इसमें अमेरिका और इजरायल की दादागिरी और ओछापन ही जिम्मेदार है। अमरीकन राष्ट्रपति ट्रंप लगता है बहुत ही जल्दबाजी में है कि खुद को साबित करने लगे कि अमरीका का अब तक का सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति हुए हैं। अन्यथा इजरायल की क्या औकात कि ईरान जैसे शक्तिशाली देश से सीधे भिड़े। इजरायल का ईरान के न्यूक्लियर फेसिलिटी को निशाना बनाना बहुत ही नादानी भरा फैसला है और अमेरिका का इजरायल को इसकी अनुमति देना अमरीकन राष्ट्रपति का बहुत ही जोखिम भरा फैसला है। अब ईरान ने भी इजरायल के न्यूक्लियर एस्टेब्लिशमेंट और फेसिलिटी को निशाना बनाया ही नहीं है बहुत बड़ा नुकसान किया है।

इजरायल ने ईरान की रिफाइनरी पर भी हमला किया है और ईरान ने भी अपने क्रूज मिसाइलों से इजरायल के रिफाइनरी को निशाना बनाया है। अब युद्ध बहुत ही निर्णायक मोड पर पहुंच गया है क्योंकि चीन ने भी ईरान की संप्रभुत्ता अखंडता और सुरक्षा के लिए बचनबद्धता प्रकट की है और ईरान को सैनिक सामरिक सामग्री मुहैया करना शुरू कर दिया है जैसे कि चीन का एक कार्गो ईरान पहुंचा है। अमेरिका पहले ही इजरायल को हथियार देता आया है। इजरायल ने पहले गाजा में बहुत बड़ा नरसंहार किया है और वहां पर स्वास्थ्य संस्थानों पर हमले किए हैं सिविलियन विशेषकर बच्चों महिलाओं घायलों को भेजी जा रही राहत सामग्री को भी रोक दिया है और जो लोग 10 किलोमीटर तक आवश्यक भोजन और दूसरी चीजों को मजबूरी में लेने जा रहे हैं उन्हें भी टारगेट कर मारा जा रहा है। हजारों बच्चों को भी भोजन के अभाव में मरने को मजबूर होना पड़ रहा है। इतना बेरहम राष्ट्रध्यक्ष शायद हिटलर के बाद नितनिहायु ही हैं और अमरीकन राष्ट्रपति ट्रंप भी उसी कैटेगरी में आंके जा रहे हैं क्योंकि उनकी सहमति के बिना इजरायल की बिल्कुल हिम्मत नहीं होगी।
आज विश्व में यह हालात इसलिए बने हैं कि ज्यादातर देशों के राष्ट्र अध्यक्ष अपने देशों में विश्वसनीयता खो चुके हैं और वो युद्ध उन्माद के सहारे अपनी सत्ता को बरकार रखे हुए हैं। अमरीका अपनी विश्वभर में दादागिरी को चमकाने के लिए इसे बनाए रखने के लिए और अपने देश की आर्थिकी की बिगड़ती हालात को विभिन्न देशों में युद्ध के हालात बना कर अपने हथियार बेच कर सुधारने में लगे हैं।
एक तरफ इजरायल ने गाजा के साथ खाड़ी देशों में युद्ध करके बहुत ही गंभीर स्थिति बनाई हुए है दूसरी तरफ रूस यूक्रेन युद्ध भी तीसरे साल में चल रहा है वहां भी अमेरिका और यूरोप के देश रूस यूक्रेन को युद्ध समझौता करने के लिए रोड़ा बने हुए हैं। इसलिए मौजूदा हालात ऐसे हैं कि तीसरा विश्व युद्ध लगभग छिड़ने के आसार नजर आ रहे हैं जिसके बहुत ही गंभीर परिणाम पूरी दुनियां को झेलने पड़ेंगे।
एक तरफ धरती का बढ़ता तापमान धरती पर जीवन के लिए संकट बना हुआ है जिसके लिए युद्ध में इतनी मात्रा में विस्फोटक का इस्तेमाल हो रहा है जिस से बड़ी भयंकर बरबादी हो रही है ग्रीन हाउस गैसेस का बहुत बड़ी मात्रा में उत्सर्जन हो रहा है। पहले से नाजुक बनी स्थिति में और इजाफा हो रहा है। इसके लिए अमरीका के साथ सभी यूरोप यूक्रेन और इजरायल के साथ रूस चीन बहुत बड़े दोषी हैं। इसलिए आज जरूरत है कि विश्व के सारे बुद्धिजीवी व्यापक स्तर पर आवाज उठाएं और सभी देशों के नेतृत्व पर दबाव बनाया जाए कि युद्ध को तुरंत बंद किया जाए और शांति बहाल की जाए।
डॉ अशोक कुमार सोमल
स्वराज सत्याग्रही
लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान