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🪦सावन शिव मंत्र: पंचाक्षर मंत्र “•ॐ नमः शिवाय” को बेहद शक्तिशाली माना गया है। इसे महामंत्र कहा जाता है और इसके जप मात्र से शिवजी प्रसन्न हो जाते हैं। इस पर सावन में इस मंत्र के जप से शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शिव पुराण में पंचाक्षरी मंत्र की उत्पत्ति की कहानी बताई गई है। ऐसे में आइये जानते हैं, शिव पंचाक्षर मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई और सावन में इसके जप के क्या फायदे हैं।
जिस प्रकार शिवजी के सहस्र नाम हैं उसी तरह उनके अनगिनत धाम हैं। भले ही बाबा के अनेक धाम हैं लेकिन वह तो कण-कण में में हैं, तभी तो कहा गया है कंकर कंकर में शंकर। और ऐसे भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए एक लोटा जल ही काफी है, इसलिए कहते हैं हर समस्या का हल, एक लोटा जल। भोलेनाथ को जल चढ़ाते हुए सिर्फ एक मंत्र ही काफी है जिसे महामंत्र कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। यह महामंत्र है शिवजी का पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय। इसे इतना शक्तिशाली क्यों माना गया है, इसकी उत्पत्ति कैसे हुई और इसके जप के क्या फायदे हैं। आइये शिव पुराण की कथा से जानते हैं।
📿पंचाक्षर मंत्र की उत्पत्ति की कहानी
शिव पुराण के अनुसार, ब्रह्माजी और भगवान विष्णु शिवजी से पूछते हैं कि सृष्टि के पांच लक्षण क्या हैं। हमें बताइये। इस पर भोलेबाबा कहते हैं, मेरे कर्तव्यों को गहराई से समझिएगा। जगत में मेरे पांच काम हैं- सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह। संसार की रचना का आरंभ सृष्टि है तो उसका सुस्थिर रहना पालन है। इसका विनाश संहार है और प्राणों का उत्क्रमण तिरोभाव है और जब सबसे छुटकारा मिल जाता है तो वह अनुग्रह यानी मोक्ष है। शिवजी बताते हैं सृष्टि धरती पर, स्थिति जल में, संहार अग्नि में, तिरोभाव वायु में और अनुग्रह आकाश में है। इन पांचों कृत्यों का भार वहन करने के लिए मेरे पांच मुंह हैं।
📿ॐ की उत्पत्ति कैसे हुई
शिवजी बताते हैं कि चार दिशाओं में उनके चार मुख हैं और बीच में पांचवां मुख हैं। आपने मेरी तपस्या करके मुझे प्रसन्न किया है और सृष्टि और पालन पाए हैं। विभूतिस्वरूप महेश्वर और रुद्र ने संहार और तिरोभाव का कार्य मुझसे प्राप्त किया है लेकिन मोक्ष में खुद देता हूं। मैंने पूर्व में अपने स्वरूप भूत मंत्र का उपदेश दिया जो ओंकार स्वरूप है। यह मंगलकारी ओंकार मंत्र ॐ मेरे मुख से सबसे पहले प्रकट हुआ है। यह मेरे स्वरूप को बताता है। और इसका लगातार जप करने वाले से मेरा ही हमेशा के लिए स्मरण होता है।
📿पंचाक्षर मंत्र कैसे बना
शिवजी आगे बताते हैं कि मेरे उत्तरवर्ती मुख से अकार, पश्चिम मुख से उकार, दक्षिण मुख से मकार, पूर्ववर्ती मुख से बिंदु का और मध्यवर्ती मुख से नाद का प्राकट्य हुआ है। इन पांच अवयव से ओंकार का विस्तार हुआ है और एकाकार होने पर ॐ की उत्पत्ति हुई है और इस संसार में सभी स्त्री और पुरुष इस प्रणव मंत्र में व्याप्त हैं। और इसी से शिव-शक्ति के बोधक पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय की उत्पत्ति हुई है जो शिवजी के साकार रूप का बोधक है।
📿पंचाक्षर मंत्र के जप के लाभ
पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय का जप करने के करोड़ों फायदे गिनाए गए हैं। शिवजी की प्रिय तिथि चतुर्दशी है। इस दिन शिव पूजन और पंचाक्षर मंत्र का जप करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। शिवलिंग के पूजन के दौरान भी पंचाक्षर मंत्र का पूजन करना चाहिए। शिव पंचाक्षर मंत्र के जप से मानसिक शांति मिलती है। शिवजी की कृपा प्राप्त होती है। इसके जप से इंद्रियां जाग उठती हैं। माना जाता है कि पंचाक्षर मंत्र के जप से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और पापों का नाश होता है।
हरहरमहादेवशिवशंभू