हिमाचल में कॉलेज के प्रवक्ताओं को अनुबंध सेवा के आधार पर ओपीएस का नहीं मिलेगा लाभ

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देवभूमि न्यूज 24.इन
हिमाचल प्रदेश के कॉलेजों में कार्यरत प्रवक्ताओं को अनुबंध सेवा के आधार पर पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलेगा। उच्च शिक्षा निदेशालय ने असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों की अनुबंध सेवा अवधि को लाभ देने के लिए अमान्य करार दे दिया है। इस फैसले के लिए प्रदेश में लागू हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम 2024 का हवाला दिया गया है। कॉलेज प्रवक्ताओं को नियमितीकरण की तारीख से ही लाभ देने को कहा है। सोमवार को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा की ओर से सभी कॉलेज प्रिंसिपलों को नए निर्देशों के तहत ही ओपीएस का लाभ लेने वालों को सूचीबद्ध करने को कहा गया है।

उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया कि प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम 2024 के लागू होने के बाद पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशन लाभों के लिए अनुबंध सेवा अवधि की गणना नहीं की जाएगी। अब केवल नियमितीकरण की तिथि से ही सेवा-संबंधी लाभ दिए जाएंगे। पेंशन गणना में अनुबंध सेवा अवधि की गणना करने की अनुमति देने वाले सभी पूर्व प्रावधान या कार्यालय ज्ञापन प्रभावी रूप से निरस्त भी कर दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार ने पहले पात्र कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना चुनने का अवसर दिया था। इस अवधि के दौरान वित्त (पेंशन) विभाग के मई 2023 और जून 2024 के कार्यालय आदेश के तहत कई असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों ने अपनी अनुबंध सेवा अवधि को ओपीएस पात्रता में शामिल करने का विकल्प चुना था। इससे पेंशन लाभों के लिए ऐसी सेवा की गणना को हरी झंडी मिल गई थी। अब भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम 2024 के 20 फरवरी 2025 से लागू होने के बाद सभी नियम बदल गए हैं। अधिनियम की धारा 6(2) के अनुसार सरकारी कर्मचारी नियमितीकरण की तिथि से ही सेवा लाभों का हकदार होगा।पहले से दिए गए सभी सेवा लाभ वापस लिए जाएंगे
इसके अलावा तीसरे प्रावधान में कहा गया है कि गैर-नियमित (अनुबंध) सेवा के लिए पहले से दिए गए सभी सेवा लाभ वापस ले लिए जाएंगे। सरकार के इस फैसले से कॉलेज प्रवक्ताओं के वित्तीय लाभ प्रभावित होंगे। जिन प्रवक्ताओं की अनुबंध सेवा को पेंशन पात्रता के लिए मान्य माना गया था, उनको अब अपने सेवानिवृत्ति लाभों का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ेगा। इससे उन्हें वित्तीय नुकसान या पेंशन श्रेणी में पूरी तरह से बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।