संसद और प्रदेश विधानसभाओं में आजकल चर्चा कम ड्रामे ज्यादा-डॉ अशोक कुमार सोमल

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देवभूमि न्यूज नेटवर्क


पिछले संसद सत्र में राहुल गांधी को संसद भवन जाने से रोका गया फिर उन्हीं के विरुद्ध थाने में रिपोर्ट भी लिखवाई गई इतना ही नहीं दो सांसद को ICU में भर्ती करने का ड्रामा भी हुआ! वाह भाजपा संघ के सा सांसदो! आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शाह का कमाल है। इस सत्र में भी काफी हंगामे हुए क्योंकि देश को पहलगाम में देश के निर्दोष 26 लोगों के मारे जाने से सुरक्षा चूक और ऑपरेशन सिंदूर पर संसद के माध्यम से जनता को सच्च सामने न आने पड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर पर अपना वक्तव्य लंबा लगभग डेढ़ घंटे का तो दिया पर इसमें सबसे ज्यादा कांग्रेस को ही कोसा! अपनी सरकार की सुरक्षा चूक या फिर ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर पर्दा बना रहा। खैर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी भी अपनी जिम्मेदारी ऐसे घटनाक्रम पर नहीं लेते हैं जगजाहिर है।
आज कल हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा और सत्र लंबा भी है अक्सर यह सत्र 4 या 5 दिन का होता है। अच्छी बात है कि विधायक प्रदेश के मसलों पर खुल कर अपना पक्ष रखें।
आज कल हिमाचल प्रदेश में भारी वर्षा से तबाही देखने को मिल रही है इसकी शुरुआत कुल्लू के गड़सा में आई बाढ से हुई फिर सराज विशेषकर थुनाग जो विपक्ष के नेता पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर का विधानसभा क्षेत्र और उनका अपना पुश्तैनी घर भी है वहां पर विकास के नाम पर तबाही का जीता जागता उदाहरण भयंकर मंजर के रूप में देखने को मिला। फिर पूरा मंडी कुल्लू लाहुल स्पीति किन्नौर शिमला और चम्बा सिरमौर में भी वर्षा से कहर बरपाए। उधर किन्नर कैलाश श्रीखंड महादेव और अभी मणिमहेश यात्रा को बीच में रोकना पड़ा। जम्मू कश्मीर में वैष्णो माता यात्रा भी रोकी गई है क्योंकि वहां भी रास्ते में भयंकर भूस्खलन हुआ। मणिमहेश में तो हजारों श्रद्धालु बीच रास्ते में ही फंस गए और रास्ते सड़कें बुरी तरह से खराब हुई। लोगों की गाड़ियां फंस गई लोग पैदल चलकर वहां से निकले और सरकार ने भी फ्री HRTC की बसों में अपने गंतव्य तक पहुंचाया। हर जगह आपदा प्रबंध टीमों ने बड़े ही निपुणता और साहस से लोगों को राहत पहुंचाई इसमें कोई शक नहीं है। हिमाचल प्रदेश के लोग भी पीड़ितों को पूरी तन्मयता से मदद कर रहे हैं यह इंसानियत का तकाजा भी है कि आदमी आदमी के काम आता है। अभी कल ही हिमाचल प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार पर ज्यादा भरोसा न करते हुए आपदा एक्ट के तहत हिमाचल प्रदेश में आई इस भयंकर त्रासदी को आपदा डिजास्टर घोषित किया है।
अब विधानसभा में ज्यादातर चर्चा आपदा पर हो रही है। इसमें यह सामने आया कि विपक्ष जिसमें केवल भाजपा संघ ही है अब तो 2022 के राज्यसभा चुनाव के ड्रामे के बाद आजाद विधायक भी भाजपा संघ के हो लिए। सबसे ज्यादा विपक्ष के नेता पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर बहुत ही सक्रिय हैं। पीछे उपमुख्यमंत्री ने टिप्पणी भी की कि “आपकी कुर्सी में स्प्रिंग तो नहीं लगे हैं” बार बार उठते हो। आपदा के बारे गंभीरता कम और राजनीति बहुत।
एक बात जरूर है कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने प्रस्ताव पास किया है कि केंद्र हिमाचल यमन आई इस त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करे और इसे केंद्र को भेजा जा रहा है। वैसे प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती क्योंकि 2023 में भी इसी तरह की त्रासदी को भी इन्होंने नजर अंदाज किया और कोई विशेष हिमाचल प्रदेश को राहत पैकेज नहीं देना इसका गवाह है। हाल ही में दो साल के बाद 10 हजार नुकसान के बदले 2 हजार करोड़ के राहत का पैसा हिमाचल प्रदेश के लिए मंजूर किया है जिसमें 500 करोड़ हिमाचल प्रदेश के बजट से देना है इस तरह 1500 करोड़ की राहत भेजी है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2023 में ही 4500 करोड़ की राहत पीड़ित लोगों में बांटी।
आज पूरा उत्तर भारत जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश पंजाब और हरियाणा दिल्ली उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ बंगाल असम मध्य प्रदेश इस बरसात में बाढ़ के हालात से गुजर रहे हैं। पर हिमाचल प्रदेश में बहुत बुरे हालात हैं सैकड़ों लोगों जाने गईं कुछ गुम भी हैं हजारों घायल हुए हैं और हजारों करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ है जिसे हिमाचल प्रदेश ने लगभग 3 हजार करोड़ आंका है इसके आंकड़े और ज्यादा होंगे। जो पर्यावरण का नुकसान हुआ है जल मिट्टी जंगल के नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। लोगों को अपने स्तर पर ही इसे झेलना भी है और इससे उभरना भी है। पर भाजपा संघ के विधायकों के साथ केंद्र सरकार के नेतृत्व की ओछी राजनीति देश पर भारी पड़ रही है। जनता को जागरूक बनना है और आपदा प्रबंध में खुद को तैयार करना है ताकि कभी भी ऐसे वक्त में अपनी अपने परिवार और संपत्ति को कम से कम नुकसान हो। धरती के बढ़ते तापमान को नियंत्रण करने में अपना अहम योगदान देना है क्योंकि ये सारी घटनाएं धरती के बढ़ते तापमान की वजह ही हैं