देवभूमि न्यूज 24.इन
देश के प्रधानमंत्री तीन दिन के विदेश दौरे से लौटे उम्मीद थी कि इस पर वक्तव्य देंगे और देश के लिए खुशखबरी सुनाएंगे। जापान टेक्नोलॉजी में बहुत आगे है अभी उन्होंने इंटरनेट में रिकॉर्ड स्पीड हासिल की है और भी बढ़िया तकनीकी युक्त देश है तो इस दिशा में समझौते हुए होंगे इसकी जानकारी देश को दी जाएगी। सिंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन मीटिंग की उपलब्धि देश को बताई जाएगी। जिसे योगेन्द्र यादव जी के लेख में फॉरेन पॉलिसी को फौरन पॉलिसी कहा गया है। यानी तुरंत विदेश नीति पर बात हुई। विदेश नीति तो दीर्घकालीन होती है और टिकाऊ होती है। खैर पिछले 11 साल में विदेश नीति प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत प्रचार पर आधारित रही है इसमें टिकाऊपन देखने को नहीं मिला। और भारत के संबंध पड़ोसियों के साथ बाकी देशों से भी कोई खास नहीं रहे हैं। अमेरिका से तो लगभग बहुत ही निम्न स्तर पर पहुंच गए हैं। इसके लिए वर्तमान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी टैरिफ वार जिम्मेदार है।
यह भी प्रधानमंत्री से उम्मीद थी कि वे देश में हिमाचल प्रदेश पंजाब जम्मू कश्मीर उत्तराखंड के आपदा प्रभावित लोगों को मरहम पटी करते हुए कोई राहत की घोषणा करते कुछ पीड़ितों को धीरज बंधाते राहत देते। उल्टा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की धरती पर पैर रखते ही उन्हें किसी बिहार में सड़क शाप यानि किसी साधारण व्यक्ति जिसका कांग्रेस और राजद से कोई दूर दूर का नाता नहीं है द्वारा गाली याद आ गई। ” कह दें सभ्य समाज में गाली मान्य नहीं है इसकी निंदा ही होनी है”

जैसा कि कहा जा रहा है उस व्यक्ति ने राहुल गांधी तेजस्वी की वोट अधिकार यात्रा के लिए बने मंच जिसे इन्होंने सांझा भी नहीं किया था क्योंकि इसका कोई कार्यक्रम नहीं था किसी कांग्रेस के नेता द्वारा बनाया गया था यात्रा के वहां निकल जाने के बाद इस व्यक्ति ने गाली दी होगी और किसी ने इसे रिकॉर्ड किया और वायरल किया। फिर क्या था भाजपा संघ तो ऐसे मुद्दों की तलाश में थे ही क्यों कि ये जो यात्रा बिहार में चल रही है इसमें चुनाव आयोग द्वारा अपरा तफरी में SIR यानि वोटर लिस्ट की गहन छानबीन करवाने के नाम पर बड़े स्तर पर लोगों के वोट काटे जा रहे हैं एक बहुत बड़ा मुद्दा है। भाजपा संघ के इशारे पर यह सब हो रहा है इसमें जो डॉक्यूमेंट मांगे गए थे वो ज्यादातर लोगों के पास है ही नहीं और इन डॉक्यूमेंट को बनवाने या हासिल करने में लोगों की बहुत मेहनत समय और पैसा बर्बाद हो रहा है। पर भाजपा संघ को इसका कोई लेना देना नहीं है पिछले 11 साल से केंद्र सरकार लोगों को किसी न किसी बहाने लाइनों में खड़ा करती रही है। लोगों में भारी रोष है क्योंकि बिहार में विधानसभा चुनाव नवंबर होने हैं इसलिए ये सारी कवायद किसी न किसी रूप में लोकसभा के हरियाणा और महाराष्ट्र में जो वोट चोरी का इल्ज़ाम लगता रहा है जिसके पुख़्ता सबूत भी पेश किए गए हैं वैसा ही खेल घुसपैठियों के नाम पर किया जा रहा है। वैसे भी भाजपा घुसपैठियों का बार बार इसलिए लेते हैं क्योंकि इससे हिंदुत्ववादी लोगों के वोट का ध्रुवीकरण बड़ी आसानी से हो जाता है। जो भी अभी तक वोटर की पड़ताल हुई हैं इसमें घुसपैठिया तो की भी मिला ही नहीं ऐसी खबर है। वैसे भी 11 साल से भाजपा संघ की केंद्र सरकार है तो इस समय में यदि ऐसा कोई है तो इसकी पहचान हो जानी चाहिए थी पर भाजपा संघ का मकसद ही बेइमानी है उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता बस लोगों को व्यर्थ के झमेले में डाल कर सत्ता हासिल करनी है।
इस राहुल और तेजस्वी की वोट चोरी यात्रा में बड़ा समर्थन मिल रहा है और भाजपा संघ के साथ चुनाव आयोग की बहुत किरकिरी हुई है साख गिरी है। इससे बौखलाए भाजपा संघ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह किसी मुद्दे की तलाश में थे। अब लोग यहां तक कह रहे हैं कि ये भाजपा संघ का ही एक टूल है इसे गड़ा गया है क्योंकि जिस व्यक्ति ने गाली दी है वो कांग्रेस या राजद का सदस्य नहीं है।
अब जैसा कहा जा रहा है मां की गाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी है न कि जैसा प्रधानमंत्री और भाजपा संघ के लोग कह रहे हैं कि उनकी स्वर्गीय मां को दी है। जिस आदमी ने ऐसा कृत्य किया है उसे पुलिस में अरेस्ट किया है उस पर कार्रवाई हो रही है।
फिर प्रश्न उठता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश से आते क्यों इस पर भावनात्मक वक्तव्य विशेष रूप में प्रसारित करवा रहे हैं और इसे देश की महिलाओं के अपमान से जोड़ कर राहुल गांधी और तेजस्वी के ऊपर निशाना साध रहे हैं यह प्रधानमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति से उम्मीद नहीं की जा सकती है। पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके लिए जाने जाते हैं कि वे वोट की राजनीति के लिए इतने घटिया स्तर तक जाते रहे हैं।
प्रधानमंत्री खुद भाषा की मर्यादा को तार तार करते रहे हैं और राहुल गांधी की माता सोनिया गांधी के लिए अपशब्द संसद के बीच और बाहर मंच से बोलते रहे हैं और लोग इसकी चर्चा कर भी रहे हैं।
हम पहले भी कह चुके हैं कि सभ्य समाज में सभी को भाषा की गरिमा बनाएं रखनी है। पर पिछले 11 साल में देखा गया है कि भाजपा संघ का शीर्ष नेतृत्व के साथ नीचे तक के लोग अक्सर भाषा की गरिमा भूल कर गाली ग्लोच करते हैं और इसपर भोपा संघ का शीर्ष नेतृत्व किसी प्रकार का अंकुश लगाना तो दूर इसे प्रोत्साहित करते रहे हैं।
यह भारत की संस्कृति और लोकतंत्र के लिए बहुत ही गंभीर मसला बनता जा रहा है इसके लिए अब जनता को हो आगे आना है।