देवभूमि न्यूज 24.इन
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंडी-कुल्लू फोरलेन निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि डीपीआर बनाने वाले लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने गूगल के सहारे डीपीआर तैयार की है, जिसमें स्थानीय स्तर की कोई डिटेल नहीं है।
डीपीआर बनाने वालों की गलती: गडकरी ने कहा कि डीपीआर बनाने वाली कंपनियों के मालिकों में से अधिकांश रिटायर्ड सरकारी अधिकारी हैं और वे गूगल के सहारे डीपीआर तैयार कर रहे हैं।
टेंडर प्रक्रिया में खामियां: गडकरी ने कहा कि सड़क निर्माण का काम करने वाली कंपनियां टेंडर तक में ऐसी शर्तें जुड़वा रही हैं, जिसके चलते काम किसको मिलना है, इसका भी निर्धारण हो जाता है।
पहाड़ों में टनल बनाने की जरूरत: गडकरी ने कहा कि पहाड़ों के बीच से टनल बनाकर ही सफर को सुरक्षित बनाया जा सकता है और इसके लिए व्यापक शोध की जरूरत है।

फोरलेन निर्माण की समस्याएं:
भूस्खलन और पहाड़ों का धंसना: मंडी-कुल्लू फोरलेन निर्माण के दौरान भूस्खलन और पहाड़ों का धंसना एक बड़ी समस्या है।
स्थानीय लोगों की चिंताएं: स्थानीय लोग फोरलेन निर्माण के कारण अपनी जान और संपत्ति के नुकसान की चिंता कर रहे हैं।
गडकरी के बयान का प्रभाव:
सोशल मीडिया पर वायरल: गडकरी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और लोग मान रहे हैं कि पहली बार गडकरी ने कुल्लू-मंडी में चल रहे सड़क निर्माण पर सच्चाई व्यक्त की है।
फोरलेन निर्माण पर पुनर्विचार*: गडकरी के बयान से फोरलेन निर्माण पर पुनर्विचार करने की जरूरत है और पहाड़ों में टनल बनाने की संभावनाएं तलाशने की जरूरत है